नमो ड्रोन दीदी योजना (Namo Drone Didi Scheme) भारत सरकार की एक अभिनव पहल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और कृषि में तकनीकी क्रांति लाना है। इस योजना के तहत महिला स्व-सहायता समूहों (Self Help Groups – SHGs) को आधुनिक ड्रोन तकनीक, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है, ताकि वे कृषि कार्यों में ड्रोन का उपयोग कर सकें और अपनी आमदनी बढ़ा सकें।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना की शुरुआत 30 नवंबर 2023 को “सशक्त नारी – विकसित भारत” अभियान के अंतर्गत की थी। इसका मकसद है कि भारत के गांवों की महिलाएं न केवल ड्रोन चलाना सीखें बल्कि इसके ज़रिए कृषि-सेवा उद्यमी (Agri Service Entrepreneurs) बनें।
नमो ड्रोन दीदी योजना (Namo Drone Didi Scheme)
नमो ड्रोन दीदी योजना के कई उद्देश्य हैं, जिनका सीधा संबंध महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक उत्थान से है:
- महिला सशक्तिकरण: ग्रामीण महिलाओं को तकनीकी ज्ञान और आर्थिक अवसर प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना।
- कृषि आधुनिकीकरण: खेती में ड्रोन के प्रयोग से खाद, कीटनाशक और पानी की सटीक मात्रा का उपयोग।
- आय में वृद्धि: प्रत्येक महिला समूह (SHG) को सालाना कम से कम ₹1 लाख की अतिरिक्त आमदनी दिलाना — जिससे “लाखपति दीदी” का सपना साकार हो।
- तकनीकी समावेशन: ग्रामीण भारत में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देकर शहरी-ग्रामीण अंतर को कम करना।
- उद्यमिता विकास: महिलाओं को ड्रोन सेवाओं के माध्यम से व्यवसाय स्थापित करने के लिए प्रेरित करना।
नमो ड्रोन दीदी योजना की प्रमुख विशेषताएँ (Key Features of Namo Drone Didi Yojana)

नमो ड्रोन दीदी योजना की सबसे खास बात यह है कि यह सिर्फ एक कृषि तकनीक योजना नहीं, बल्कि एक महिला सशक्तिकरण मिशन है। इस योजना के अंतर्गत भारत सरकार ने देशभर के 15,000 महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) को आधुनिक कृषि ड्रोन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। इन ड्रोन के माध्यम से महिलाएँ फसलों में कीटनाशक, उर्वरक और तरल पोषक तत्वों का छिड़काव कर सकेंगी। इससे खेती का काम तेज़, सटीक और सुरक्षित होगा।
इस योजना का कुल बजट ₹1,261 करोड़ निर्धारित किया गया है, जो 2023-24 से 2025-26 तक तीन वर्षों में खर्च किया जाएगा। प्रत्येक चयनित महिला समूह को एक ड्रोन दिया जाएगा, जिसकी कीमत का 80% हिस्सा सरकार द्वारा अनुदान (subsidy) के रूप में वहन किया जाएगा। बाकी 20% राशि महिलाओं को एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) के तहत 3% ब्याज दर पर ऋण के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी।
महिलाओं को केवल ड्रोन नहीं दिए जाएंगे, बल्कि उन्हें इसके संचालन, देखभाल और कृषि उपयोग का प्रशिक्षण (training) भी दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण दो चरणों में होता है —
- पहला चरण (5 दिन): ड्रोन उड़ाने और सुरक्षा मानकों की जानकारी।
- दूसरा चरण (10 दिन): फसलों में ड्रोन के व्यावहारिक उपयोग का प्रशिक्षण।
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद महिलाएँ “ड्रोन दीदी” के रूप में अपने गांव में कृषि सेवाएँ देना शुरू कर सकती हैं। इसके लिए सरकार ने एक विशेष MIS (Management Information System) भी बनाया है, जिससे हर SHG की गतिविधियों की ऑनलाइन निगरानी की जा सके।
इस योजना को कृषि मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, राज्य सरकारों, और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) के सहयोग से लागू किया जा रहा है। इतना ही नहीं, ड्रोन निर्माण और ट्रेनिंग में कई निजी कंपनियों की भी साझेदारी की गई है।
कुल मिलाकर, नमो ड्रोन दीदी योजना आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहयोग, और महिला नेतृत्व — इन तीनों का बेहतरीन संगम है, जो भारत के ग्रामीण विकास मॉडल को एक नई दिशा दे रही है।
नमो ड्रोन दीदी योजना की विवरण तालिका
| घटक | विवरण |
|---|---|
| योजना का नाम | नमो ड्रोन दीदी योजना |
| प्रारंभ वर्ष | 2023 |
| संचालन अवधि | 2023-24 से 2025-26 तक |
| कुल बजट | ₹1,261 करोड़ |
| लाभार्थी | 15,000 महिला स्व-सहायता समूह (SHGs) |
| वित्तीय सहायता | ड्रोन लागत का 80% केंद्र सरकार द्वारा, अधिकतम ₹8 लाख तक |
| ऋण सुविधा | शेष 20% के लिए 3% ब्याज पर एग्रीकल्चर इंफ्रा फंड (AIF) से लोन |
| प्रशिक्षण अवधि | 15 दिन — 5 दिन पायलट ट्रेनिंग, 10 दिन कृषि अनुप्रयोग प्रशिक्षण |
| निगरानी व्यवस्था | MIS सिस्टम के माध्यम से ऑनलाइन मॉनिटरिंग |
| कार्यान्वयन एजेंसियाँ | कृषि मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, राज्य सरकारें, KVKs |
नमो ड्रोन दीदी योजना के लाभ (Benefits of Namo Drone Didi Scheme)

1️⃣ आर्थिक आत्मनिर्भरता (Financial Independence)
नमो ड्रोन दीदी योजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाती है। पहले जो महिलाएँ घर और खेत के छोटे कामों तक सीमित थीं, अब वे ड्रोन तकनीक के माध्यम से कृषि सेवा प्रदाता (Agri Service Provider) बन रही हैं। सरकार के आँकड़ों के अनुसार, प्रत्येक महिला स्व-सहायता समूह (SHG) सालाना औसतन ₹1 लाख या उससे अधिक की आय प्राप्त कर सकता है। महिलाएँ किसानों को कीटनाशक और उर्वरक छिड़काव जैसी सेवाएँ देकर शुल्क लेती हैं। इससे उनके परिवार की आय बढ़ती है और वे घर की वित्तीय ज़रूरतों को स्वयं पूरा कर पाती हैं।
2️⃣ नई तकनीक का ज्ञान (Knowledge of Modern Technology)
इस योजना के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक की ट्रेनिंग दी जाती है। महिलाएँ न केवल ड्रोन उड़ाना सीखती हैं, बल्कि उन्हें इसके रखरखाव (maintenance), बैटरी प्रबंधन, और फसल विश्लेषण (crop analysis) के उपयोग की जानकारी भी दी जाती है। इस ज्ञान से महिलाएँ आधुनिक कृषि के प्रति जागरूक होती हैं और खेती में सटीकता (precision farming) लाती हैं। पहले जहाँ ड्रोन तकनीक केवल शहरों या बड़े किसानों तक सीमित थी, अब यह ग्रामीण भारत की महिलाओं के हाथों में है — जो एक बड़ा सामाजिक परिवर्तन दर्शाता है।
3️⃣ रोज़गार सृजन (Employment Generation)
नमो ड्रोन दीदी योजना केवल प्रशिक्षण या उपकरण वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण रोजगार का एक नया स्रोत भी बन रही है। जो महिलाएँ ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित हैं, वे अन्य महिलाओं को भी इस क्षेत्र में प्रशिक्षित कर रही हैं। साथ ही, वे अपने गांव या आस-पास के क्षेत्रों में किसानों को सेवाएँ देकर स्थायी आय कमा रही हैं। इस तरह, यह योजना ग्रामीण स्तर पर लघु उद्यम (Micro-Entrepreneurship) को बढ़ावा दे रही है। हर SHG अपने गांव में रोजगार के नए अवसर पैदा कर रही है, जिससे पलायन (migration) की समस्या भी कम होती है।
4️⃣ नेतृत्व और सम्मान (Leadership & Social Recognition)
इस योजना ने महिलाओं को केवल कमाई का साधन नहीं, बल्कि नेतृत्व का अवसर भी दिया है। जो महिलाएँ पहले निर्णय लेने की प्रक्रिया से बाहर थीं, अब वे अपने समूह और गांव में तकनीकी व व्यावसायिक निर्णय ले रही हैं। “ड्रोन दीदी” बन चुकी ये महिलाएँ समाज में प्रेरणा स्रोत बन रही हैं। गाँव के पुरुष किसान भी अब उनसे तकनीकी सलाह लेते हैं। यह बदलाव ग्रामीण समाज में महिला सम्मान और समानता (Gender Equality) को मजबूत करता है।
5️⃣ वित्तीय सहयोग (Financial Assistance)
इस योजना का एक और बड़ा लाभ यह है कि महिलाओं पर किसी भी प्रकार का बड़ा आर्थिक बोझ नहीं आता। सरकार ड्रोन लागत का 80% हिस्सा सीधे सब्सिडी के रूप में वहन करती है। शेष 20% राशि महिलाएँ कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund) के तहत 3% ब्याज दर पर ऋण लेकर आसानी से चुका सकती हैं। यह लचीली वित्तीय संरचना सुनिश्चित करती है कि कोई भी महिला या समूह केवल पैसों की कमी के कारण इस योजना से वंचित न रहे। साथ ही, प्रशिक्षण, रखरखाव और बीमा जैसी सुविधाएँ भी सरकारी सहयोग से मिलती हैं, जिससे जोखिम बहुत कम हो जाता है।
नमो ड्रोन दीदी योजना से होने वाले कृषि लाभों का विस्तृत विवरण
1️⃣ सटीक खेती (Precision Farming)
ड्रोन तकनीक ने भारतीय खेती में “सटीकता” का नया अध्याय जोड़ा है। पारंपरिक तरीकों में खाद, पानी या कीटनाशक का वितरण अक्सर असमान होता था — कहीं ज़्यादा तो कहीं बहुत कम। इसके कारण फसल की गुणवत्ता प्रभावित होती थी और लागत बढ़ती थी। लेकिन ड्रोन के उपयोग से खेतों में समान रूप से स्प्रे किया जा सकता है। ड्रोन सेंसर और GPS तकनीक की मदद से प्रत्येक हिस्से पर सटीक मात्रा में उर्वरक और कीटनाशक पहुंचाता है। इससे इनपुट कॉस्ट (Input Cost) घटती है और उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ती है। इस तरह, यह तकनीक छोटे और मध्यम किसानों के लिए आर्थिक रूप से अत्यंत लाभकारी साबित होती है।
2️⃣ समय की बचत (Time Efficiency)
जहाँ पारंपरिक रूप से किसी किसान को बड़े खेत में कीटनाशक या उर्वरक का छिड़काव करने में पूरा दिन या कभी-कभी दो दिन तक लग जाते थे, वहीं ड्रोन इस काम को कुछ ही घंटों में पूरा कर सकता है। एक औसत ड्रोन प्रतिदिन लगभग 20–25 एकड़ तक का क्षेत्र कवर कर सकता है। इससे किसानों का श्रम (manual effort) घटता है और समय की भारी बचत होती है। यह लाभ विशेष रूप से बुआई या कटाई के मौसम में महत्वपूर्ण है, जब समय की कमी के कारण फसल नुकसान का खतरा रहता है। इस प्रकार, ड्रोन तकनीक खेती को तेज़, कुशल और आधुनिक बनाती है।
3️⃣ उपज में वृद्धि (Increase in Crop Yield)
ड्रोन के माध्यम से फसल की स्वास्थ्य निगरानी (Crop Health Monitoring) करना आसान हो जाता है। कैमरा और सेंसर से युक्त ड्रोन खेतों की ऊँचाई से तस्वीरें लेकर यह दिखा सकते हैं कि किन हिस्सों में पौधों की वृद्धि कम है या रोग का प्रभाव अधिक है। इस जानकारी से किसान समय पर आवश्यक कदम उठा सकते हैं — जैसे दवा छिड़कना या पोषक तत्व देना। इससे फसल को नुकसान कम होता है और औसतन 10% से 15% तक उपज बढ़ जाती है। इसके अलावा, ड्रोन तकनीक डेटा-आधारित निर्णय (Data-Driven Decisions) को भी प्रोत्साहित करती है, जिससे कृषि अधिक वैज्ञानिक और टिकाऊ बनती है।
4️⃣ पर्यावरणीय लाभ (Environmental Benefits)
ड्रोन के उपयोग से रासायनिक पदार्थों की अनावश्यक बर्बादी कम होती है, जिससे मिट्टी, जल और वायु प्रदूषण में कमी आती है। पारंपरिक छिड़काव में अधिक मात्रा में कीटनाशक उपयोग होने के कारण ज़मीन की उर्वरता घट जाती थी, लेकिन ड्रोन तकनीक केवल ज़रूरत के हिसाब से ही रसायन का प्रयोग करती है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है और भूजल में रासायनिक अवशेष (chemical residues) कम होते हैं। इसके साथ ही, ड्रोन के माध्यम से किए जाने वाले स्प्रे से मजदूरों को सीधे रसायनों के संपर्क में आने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे स्वास्थ्य सुरक्षा (Health Safety) भी सुनिश्चित होती है। इस तरह, यह तकनीक पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
नमो ड्रोन दीदी योजना का प्रभाव (Impact Of Namo Drone Didi Scheme)
नमो ड्रोन दीदी योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2023 में की गई थी, और थोड़े ही समय में इसने ग्रामीण भारत में परिवर्तन की नई लहर शुरू कर दी है। योजना के प्रारंभिक चरण में सरकार ने देशभर के लगभग 1,000 महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) को ड्रोन वितरित किए हैं, जबकि आगामी वर्षों में यह संख्या बढ़कर 15,000 समूहों तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
इन महिला समूहों को न केवल ड्रोन दिए गए हैं, बल्कि उन्हें ड्रोन संचालन, रखरखाव और कृषि उपयोग का पूरा प्रशिक्षण भी दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप कई गांवों में महिलाएँ अब “ड्रोन दीदी” के रूप में जानी जाने लगी हैं। उन्होंने किसानों को फसल छिड़काव, बीज बुवाई और फसल निगरानी जैसी सेवाएँ देना शुरू कर दिया है, जिससे खेती की लागत में 20–30% की कमी और उपज में 10–15% की वृद्धि देखी गई है।
इसके अलावा, महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक प्रतिष्ठा दोनों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। जहाँ पहले ग्रामीण महिलाएँ केवल मजदूरी या घरेलू कार्यों में सीमित थीं, वहीं अब वे तकनीकी विशेषज्ञ और उद्यमी (Entrepreneurs) के रूप में उभर रही हैं।
कुल मिलाकर, यह योजना न केवल कृषि सुधार का माध्यम बन रही है, बल्कि महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास की दिशा में एक प्रेरक परिवर्तन का प्रतीक भी बन चुकी है।
| पैरामीटर | उपलब्धि (2025 तक) |
|---|---|
| ड्रोन वितरित | 1,000+ |
| लक्ष्य (2026 तक) | 15,000 SHG |
| महिलाओं को प्रशिक्षण | लगभग 10,000 महिलाएँ प्रशिक्षित |
| औसत आय वृद्धि | ₹1 लाख प्रति SHG वार्षिक |
| फसल उत्पादकता वृद्धि | 10–15% तक |
| कीटनाशक/उर्वरक बचत | 25–30% तक |
ड्रोन दीदी योजना ने अब तक कई राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, और हिमाचल प्रदेश में बेहतर परिणाम दिए हैं।
नमो ड्रोन दीदी योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया (How to Apply for Namo Drone Didi Scheme)
नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत महिलाओं को ड्रोन और प्रशिक्षण दोनों उपलब्ध कराए जाते हैं। इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह सरल और पारदर्शी रखी गई है ताकि देश के सभी योग्य महिला स्व-सहायता समूह (Self Help Groups – SHGs) आसानी से इसका लाभ उठा सकें। नीचे आवेदन के चरण विस्तार से दिए गए हैं 👇
🔹 चरण 1: आधिकारिक पोर्टल पर जाएं
सबसे पहले इच्छुक महिला स्व-सहायता समूह को सरकारी पोर्टल “नमो ड्रोन दीदी योजना” (जैसे कि संबंधित राज्य सरकार या ग्रामीण विकास विभाग की वेबसाइट) पर जाना होगा। इसके अलावा, जानकारी ग्राम पंचायत कार्यालय, कृषि विभाग कार्यालय, या प्रधानमंत्री किसान सम्मान केंद्र (PM-Kisan Samriddhi Kendra) पर भी उपलब्ध है।
🔹 चरण 2: आवेदन फॉर्म भरें
ऑनलाइन पोर्टल पर “Apply Now (आवेदन करें)” बटन पर क्लिक करें। आवेदन फॉर्म में निम्न विवरण भरना आवश्यक होता है:
- स्व-सहायता समूह (SHG) का पंजीकरण नंबर
- समूह प्रमुख या प्रतिनिधि का आधार नंबर और मोबाइल नंबर
- बैंक खाता विवरण (जमा राशि और लेनदेन के लिए)
- समूह की वार्षिक आय और सदस्यों की संख्या
- आवेदन करने वाले क्षेत्र का क्लस्टर या ब्लॉक विवरण
सभी विवरण सही और अद्यतन होने चाहिए, क्योंकि इन्हीं के आधार पर पात्रता तय की जाती है।
🔹 चरण 3: आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड करें
फॉर्म भरने के बाद, निम्न दस्तावेज़ों की स्कैन कॉपी अपलोड करनी होती है:
- SHG का पंजीकरण प्रमाणपत्र
- समूह की सदस्य महिलाओं के आधार कार्ड
- बैंक पासबुक की प्रति
- आय प्रमाण पत्र या स्वयं सहायता समूह की वित्तीय स्थिति रिपोर्ट
- क्षेत्र या ब्लॉक अधिकारी द्वारा जारी सिफारिश पत्र (Recommendation Letter) (यदि लागू हो)
🔹 चरण 4: आवेदन की समीक्षा और चयन प्रक्रिया
सभी आवेदन प्राप्त होने के बाद, उन्हें ज़िला स्तरीय समिति (District Level Committee) द्वारा जांचा जाता है।
समिति यह सुनिश्चित करती है कि समूह:
- पंजीकृत और सक्रिय हो,
- योजना की पात्रता शर्तों को पूरा करता हो,
- और प्रशिक्षण लेने के लिए तैयार हो।
योग्य SHG का चयन होने पर उसे ईमेल या SMS के माध्यम से सूचना भेजी जाती है।
🔹 चरण 5: प्रशिक्षण और प्रमाणन (Training & Certification)
चयनित समूह से एक सदस्य को 15-दिन का प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा करना होता है —
- 5 दिन ड्रोन उड़ाने (Pilot Training) के लिए,
- और 10 दिन कृषि उपयोग प्रशिक्षण (Agricultural Application) के लिए।
इस प्रशिक्षण में महिलाओं को ड्रोन संचालन, रखरखाव, सुरक्षा नियम, और कृषि उपयोग के सभी पहलुओं की जानकारी दी जाती है। सफल प्रशिक्षण के बाद उन्हें प्रमाण पत्र (Certificate) प्रदान किया जाता है।
🔹 चरण 6: ड्रोन वितरण और वित्तीय सहायता
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद, समूह को सरकार द्वारा ड्रोन प्रदान किया जाता है, जिसकी कुल कीमत का 80% हिस्सा केंद्र सरकार सब्सिडी के रूप में देती है।
बाकी 20% राशि कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund – AIF) के तहत 3% ब्याज दर वाले ऋण के रूप में दी जाती है। इस तरह, किसी महिला समूह पर आर्थिक बोझ नहीं आता।
🔹 चरण 7: सेवा शुरू करना (Starting Operations)
ड्रोन मिलने के बाद, SHG अपने क्षेत्र में किसानों को खेतों में स्प्रे, निगरानी और डेटा एनालिसिस सेवाएँ देना शुरू कर सकता है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक समूह सालाना 2,000 से 2,500 एकड़ क्षेत्र में सेवाएँ दे सके, जिससे हर समूह ₹1 लाख या अधिक की अतिरिक्त आय अर्जित कर सके।
आवेदन प्रक्रिया का सारांश तालिका
| चरण | प्रक्रिया का विवरण |
|---|---|
| 1 | आधिकारिक पोर्टल या ग्राम पंचायत कार्यालय से जानकारी प्राप्त करें |
| 2 | ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें |
| 3 | आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड करें |
| 4 | ज़िला समिति द्वारा चयन प्रक्रिया |
| 5 | 15 दिन का ड्रोन और कृषि प्रशिक्षण |
| 6 | 80% सब्सिडी और 20% ऋण के साथ ड्रोन वितरण |
| 7 | SHG द्वारा सेवाएँ शुरू करना और आय अर्जित करना |
नमो ड्रोन दीदी योजना के लिए पात्रता शर्तें (Eligibility Criteria )
नमो ड्रोन दीदी योजना का उद्देश्य ग्रामीण भारत की महिलाओं को तकनीकी और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इसलिए, इस योजना के लाभ केवल उन्हीं महिला स्व-सहायता समूहों (Self Help Groups – SHGs) को दिए जाते हैं जो कुछ निश्चित पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं।
सबसे पहले, केवल वही महिला SHGs पात्र हैं जो “ दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) ” के तहत पंजीकृत हैं। समूह सक्रिय रूप से कार्यरत होना चाहिए और उसमें वित्तीय लेनदेन का स्पष्ट रिकॉर्ड मौजूद होना चाहिए।
इसके अलावा, समूह की महिला सदस्य की आयु 18 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए और उसने कम से कम दसवीं कक्षा (Class 10) पास की हो। यह शैक्षणिक योग्यता इसलिए आवश्यक है ताकि वह तकनीकी प्रशिक्षण को समझ सके और ड्रोन संचालन को सुरक्षित तरीके से कर सके।
समूह की प्रत्येक सदस्य शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होनी चाहिए ताकि वह प्रशिक्षण और ड्रोन संचालन में सक्रिय रूप से भाग ले सके।
साथ ही, समूह की वार्षिक औसत पारिवारिक आय ₹1 लाख या उससे अधिक होनी चाहिए, और कम से कम चार कृषि सीज़न तक स्थायी आय बनी रहनी चाहिए। इससे यह सुनिश्चित होता है कि समूह वित्तीय रूप से स्थिर है और ऋण पुनर्भुगतान में सक्षम है।
राज्य और जिला स्तरीय समितियाँ यह भी देखती हैं कि समूह ऐसे क्लस्टर या क्षेत्र में कार्यरत हो जहाँ ड्रोन उपयोग आर्थिक रूप से व्यवहारिक (economically feasible) हो — जैसे बड़े खेतों वाले इलाके या कृषि प्रधान क्षेत्र।
पात्रता मानदंड सारांश तालिका
| पात्रता मानदंड | आवश्यक शर्तें |
|---|---|
| SHG स्थिति | महिला स्व-सहायता समूह पंजीकृत होना चाहिए (DAY-NRLM के तहत) |
| आयु सीमा | 18 से 50 वर्ष |
| शिक्षा योग्यता | न्यूनतम दसवीं कक्षा पास |
| आय स्तर | सालाना औसत पारिवारिक आय ₹1 लाख या अधिक |
| शारीरिक क्षमता | मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ होना आवश्यक |
| प्रशिक्षण की इच्छा | कम से कम एक सदस्य को 15 दिन का ड्रोन प्रशिक्षण लेना आवश्यक |
| भौगोलिक क्षेत्र | ऐसा क्षेत्र जहाँ ड्रोन सेवाओं की आर्थिक उपयोगिता संभव हो |
नमो ड्रोन दीदी योजना का कार्यान्वयन तंत्र
नमो ड्रोन दीदी योजना का कार्यान्वयन केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग से बहु-स्तरीय संरचना के माध्यम से किया जा रहा है। इस योजना का संचालन मुख्य रूप से ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development) द्वारा किया जाता है, जबकि तकनीकी सहायता कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (Ministry of Agriculture) प्रदान करता है।
ज़मीनी स्तर पर योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (State Rural Livelihoods Mission – SRLM) और ज़िला स्तरीय समितियों की होती है। ये समितियाँ पात्र स्व-सहायता समूहों का चयन करती हैं, प्रशिक्षण का प्रबंधन करती हैं और ड्रोन वितरण की निगरानी करती हैं।
तकनीकी प्रशिक्षण एवं प्रमाणन के लिए सरकार ने कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), ड्रोन प्रशिक्षण संस्थान और निजी तकनीकी साझेदारों को भी जोड़ा है।
वित्तीय सहायता और ऋण वितरण की प्रक्रिया नाबार्ड (NABARD) तथा कृषि अवसंरचना कोष (AIF) के माध्यम से संचालित होती है।
इस बहु-स्तरीय समन्वय से यह सुनिश्चित किया जाता है कि योजना पारदर्शी, समयबद्ध और प्रभावी रूप से लागू हो सके, जिससे ग्रामीण महिलाएँ तकनीकी रूप से सक्षम बनकर कृषि क्षेत्र में नई भूमिका निभा सकें।
चुनौतियाँ और उनके समाधान (Challenges and Their Solutions)
नमो ड्रोन दीदी योजना ग्रामीण भारत में तकनीकी सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है, लेकिन इसके सफल क्रियान्वयन में कई व्यावहारिक चुनौतियाँ सामने आती हैं।
पहली बड़ी चुनौती है — तकनीकी प्रशिक्षण और साक्षरता की कमी। ग्रामीण इलाकों की कई महिलाएँ ड्रोन जैसे आधुनिक उपकरणों से अनभिज्ञ हैं। इसका समाधान है — स्थानीय स्तर पर निःशुल्क, व्यवहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना, जहाँ महिलाएँ ड्रोन संचालन को व्यावहारिक रूप से सीख सकें।
दूसरी चुनौती है — वित्तीय प्रबंधन और ऋण पुनर्भुगतान। कई SHG समूहों के पास सीमित पूंजी होती है। इसके लिए सरकार ने 80% सब्सिडी और 3% ब्याज दर वाला ऋण प्रदान करके वित्तीय दबाव को काफी हद तक कम किया है।
तीसरी चुनौती — ड्रोन रखरखाव और तकनीकी सहायता की उपलब्धता। ग्रामीण क्षेत्रों में सर्विस सेंटर न होने से समस्याएँ बढ़ती हैं। इसका समाधान है — हर जिले में ड्रोन सर्विस हब और मोबाइल तकनीकी सहायता केंद्र स्थापित करना।
इसके अलावा, सामाजिक मानसिकता भी एक बड़ी बाधा रही है — कुछ समुदायों में महिलाएँ तकनीकी कार्यों में कम भाग लेती हैं। इसे बदलने के लिए सफल “ड्रोन दीदी” मॉडलों को उदाहरण बनाकर प्रचारित किया जा रहा है, जिससे अन्य महिलाएँ प्रेरित हों।
इन सभी प्रयासों से यह योजना धीरे-धीरे ग्रामीण भारत में न केवल तकनीकी क्रांति, बल्कि महिला सशक्तिकरण की सामाजिक क्रांति भी ला रही है।
नमो ड्रोन दीदी योजना की सफलता की कहानियाँ (Success Stories Namo Drone Didi Scheme)
नमो ड्रोन दीदी योजना ने भारत के अनेक ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की जिंदगी बदल दी है। पहले जो महिलाएँ घर तक सीमित थीं, आज वे तकनीक की दुनिया में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं।
राजस्थान के झुंझुनूं ज़िले की सुषमा देवी कभी एक सामान्य गृहिणी थीं, लेकिन जब उनके स्वयं सहायता समूह को “ड्रोन दीदी योजना” में चुना गया, तो उन्होंने प्रशिक्षण लेकर ड्रोन उड़ाना सीखा। अब सुषमा अपने क्षेत्र के लगभग 40 किसानों के खेतों में कीटनाशक छिड़काव और फसल निरीक्षण सेवाएँ देती हैं। आज उनकी मासिक आय ₹10,000 से अधिक है — और वे अपने गांव की अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षित कर रही हैं।
इसी तरह, बिहार के भागलपुर जिले की रीता कुमारी ने इस योजना से आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की। पहले वे मजदूरी करती थीं, लेकिन ड्रोन संचालन सीखने के बाद उन्होंने अपने SHG की मदद से ड्रोन सेवाएँ शुरू कीं। अब वे न केवल खुद कमा रही हैं बल्कि अपने गांव की अन्य महिलाओं को भी रोज़गार दे रही हैं।
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी “ड्रोन दीदी” अब प्रेरणा का प्रतीक बन चुकी हैं। ये महिलाएँ अब सिर्फ खेती का हिस्सा नहीं, बल्कि कृषि नवाचार (Agricultural Innovation) की अगुवाई कर रही हैं।
इस योजना ने साबित किया है कि अगर अवसर मिले तो ग्रामीण महिलाएँ किसी भी तकनीक को अपनाने में पीछे नहीं रहतीं। “ड्रोन दीदी” अब नई भारत की उड़ान का प्रतीक हैं — आत्मनिर्भर, सशक्त और प्रेरणादायक।
नमो ड्रोन दीदी योजना का भविष्य (Future Prospects Namo Drone Didi Scheme)
नमो ड्रोन दीदी योजना आने वाले वर्षों में ग्रामीण भारत के लिए तकनीकी सशक्तिकरण का प्रतीक बनने जा रही है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2026 तक 15,000 महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को ड्रोन से लैस करना है। भविष्य में प्रशिक्षण मॉड्यूल में AI आधारित फसल विश्लेषण, प्रिसिजन एग्रीकल्चर, और डेटा-ड्रिवन खेती जैसे आधुनिक विषय शामिल किए जाएंगे। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर ड्रोन मरम्मत केंद्र और ड्रोन टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स को भी प्रोत्साहन मिलेगा। यह योजना न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि भारत को कृषि नवाचार और टिकाऊ खेती के क्षेत्र में विश्व स्तर पर अग्रणी बनाएगी।
निष्कर्ष (Conclusion)
नमो ड्रोन दीदी योजना भारत में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और कृषि क्षेत्र में तकनीकी क्रांति लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह योजना न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीक जैसे ड्रोन संचालन, रखरखाव और कृषि विश्लेषण में प्रशिक्षित कर रही है। इससे ग्रामीण महिलाओं को एक नई पहचान “ड्रोन दीदी” के रूप में मिली है, जो न केवल अपने परिवार के लिए बल्कि पूरे समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं।
इस योजना के तहत 15,000 स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे वे कृषि सेवाएँ देकर सालाना ₹1 लाख या उससे अधिक की आय अर्जित कर सकती हैं। इससे महिलाओं की वित्तीय स्थिति मजबूत हो रही है, साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार हो रहा है। ड्रोन के माध्यम से खेती अधिक सटीक, पर्यावरण-अनुकूल और उत्पादक बन रही है — जिससे किसानों को अधिक लाभ और समय की बचत हो रही है।
हालाँकि प्रारंभिक लागत और तकनीकी प्रशिक्षण जैसी चुनौतियाँ हैं, परंतु सरकार द्वारा सब्सिडी, प्रशिक्षण केंद्रों और निगरानी तंत्र के माध्यम से इनका प्रभावी समाधान किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में नमो ड्रोन दीदी योजना भारत की महिलाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाकर “सशक्त नारी – विकसित भारत” के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
नमो ड्रोन दीदी योजना से सम्बंधित सामान्य प्रश्न (FAQs on Namo Drone Didi Scheme)
प्र. 1. नमो ड्रोन दीदी योजना क्या है?
उत्तर: नमो ड्रोन दीदी योजना भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को ड्रोन तकनीक के माध्यम से सशक्त बनाना है। इस योजना के तहत महिलाओं को कृषि कार्यों जैसे कीटनाशक छिड़काव, खाद वितरण और फसल निगरानी के लिए ड्रोन और प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
प्र.2. इस योजना की शुरुआत कब हुई थी?
उत्तर: यह योजना 30 नवंबर 2023 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा “सशक्त नारी – विकसित भारत” अभियान के अंतर्गत शुरू की गई थी।
प्र.3. नमो ड्रोन दीदी योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना, कृषि क्षेत्र में तकनीकी क्रांति लाना और “लखपति दीदी” जैसे लक्ष्यों को प्राप्त करना है।
प्र.4. इस योजना से कौन लाभान्वित होगा?
उत्तर: देशभर के महिला स्वयं सहायता समूह (SHGs) इस योजना के प्रमुख लाभार्थी हैं। प्रत्येक चयनित समूह को ड्रोन और आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
प्र.5. योजना के तहत कितने महिला समूहों को लाभ मिलेगा?
उत्तर: सरकार ने 15,000 महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन प्रदान करने का लक्ष्य रखा है, जिससे लाखों ग्रामीण महिलाएं लाभान्वित होंगी।
प्र. 6. क्या ड्रोन मुफ्त में दिए जाते हैं?
उत्तर: नहीं, ड्रोन पूरी तरह मुफ्त नहीं दिए जाते। सरकार 80% तक की सब्सिडी (अधिकतम ₹8 लाख) देती है, जबकि बाकी राशि महिलाओं को कम ब्याज वाले AIF लोन के माध्यम से चुकानी होती है।
प्र.7. ड्रोन प्रशिक्षण कितने दिनों का होता है?
उत्तर: प्रशिक्षण कुल 15 दिनों का होता है — 5 दिन ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण और 10 दिन कृषि उपयोग जैसे कीटनाशक छिड़काव, उर्वरक छिड़काव आदि के लिए।
प्र.8. प्रशिक्षण कौन प्रदान करता है?
उत्तर: प्रशिक्षण कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), महिला एवं बाल विकास विभाग, और ड्रोन कंपनियों जैसे गरुड़ एयरोस्पेस तथा महिंद्रा एंड महिंद्रा** के सहयोग से दिया जाता है।
प्र.9. योजना के लिए आवेदन कैसे करें?
उत्तर: इच्छुक महिलाएं अपने नजदीकी ग्राम पंचायत, कृषि विज्ञान केंद्र, या नमो ड्रोन दीदी योजना पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं। आवेदन में SHG पंजीकरण, आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण और आय प्रमाणपत्र आवश्यक है।
प्र.10. पात्रता शर्तें क्या हैं?
उत्तर:
- महिला की उम्र 18 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
- न्यूनतम शिक्षा कक्षा 10वीं पास होना आवश्यक है।
- महिला किसी पंजीकृत SHG (DAY-NRLM) की सदस्य होनी चाहिए।
- शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हो।
प्र.11. ड्रोन से कृषि को क्या लाभ होगा?
उत्तर: ड्रोन से खेती अधिक सटीक और प्रभावी होती है। यह खाद और कीटनाशक का समान वितरण करता है, समय बचाता है, फसल की सेहत पर निगरानी रखता है और उत्पादन में 10-15% तक की वृद्धि करता है।
प्र.12. इस योजना से महिलाओं को क्या लाभ होगा?
उत्तर: महिलाओं को तकनीकी ज्ञान, स्थायी आय, रोजगार के अवसर और ग्रामीण समाज में नेतृत्व की नई पहचान मिलती है। वे “ड्रोन दीदी” के रूप में अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं।
प्र.13. क्या इस योजना में निजी कंपनियाँ भी शामिल हैं?
उत्तर: हाँ, कई निजी कंपनियाँ जैसे गरुड़ एयरोस्पेस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, और mPower इस योजना में ड्रोन सप्लाई, प्रशिक्षण और रखरखाव के लिए सरकार के साथ साझेदारी कर रही हैं।
प्र.14. योजना का अब तक क्या प्रभाव देखने को मिला है?
उत्तर: 2025 तक देशभर में 1,000 से अधिक ड्रोन वितरित किए जा चुके हैं। उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और हिमाचल जैसे राज्यों में महिलाओं ने ड्रोन से ₹1 लाख तक की वार्षिक आय अर्जित की है और फसलों की उत्पादकता में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।
प्र. 15. इस योजना का भविष्य क्या है?
उत्तर: सरकार का लक्ष्य 2026 तक सभी 15,000 SHGs को ड्रोन उपलब्ध कराना है। भविष्य में इसमें AI-आधारित ड्रोन एनालिटिक्स, राष्ट्रीय महिला एग्रीटेक सम्मेलन, और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसी पहलें भी शामिल की जाएँगी।
इस पोस्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए क्लिक करें – NaMo Drone Didi Scheme: Empowering Rural Women Through Drone Technology

