भारत में ड्रोन बीमा(Drone Insurance in India): उपयोगकर्ताओं के लिए सम्पूर्ण गाइड (2025)

सभी ड्रोन ऑपरेटरों का इस पोस्ट में स्वागत है! इस गाइड के माध्यम से हम आपको 2025 में भारत में ड्रोन बीमा (Drone Beema / Drone Insurance in India) के बारे में पूरी जानकारी सरल भाषा में देने की कोशिश करेंगे।
आज के समय में ड्रोन सिर्फ़ हवाई खिलौने नहीं रहे — वे हमारे जीवन और उद्योगों का अहम हिस्सा बन चुके हैं। खेती-बाड़ी में ड्रोन का उपयोग फसलों की निगरानी और स्प्रे करने में हो रहा है, तो वहीं फिल्ममेकिंग, रियल एस्टेट, सर्वे, निर्माण कार्य (construction) और लॉजिस्टिक्स में भी इनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण बन गई है।
कई अस्पताल और सरकारी एजेंसियाँ तो अब ड्रोन के ज़रिए दवाइयाँ और मेडिकल किट तक पहुँचाने लगी हैं।

लेकिन जैसे-जैसे ड्रोन का उपयोग बढ़ रहा है, वैसे-वैसे जोखिम और जिम्मेदारियाँ भी बढ़ी हैं।
ड्रोन किसी कारण से क्रैश हो जाए, किसी की संपत्ति को नुकसान पहुँचा दे, किसी व्यक्ति को चोट लग जाए या उसका कैमरा-पेलोड टूट जाए — इन सभी स्थितियों में ड्रोन ऑपरेटर को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ऐसे में ड्रोन बीमा (Drone Beema) एक मजबूत सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। यह आपको उन वित्तीय जोखिमों से बचाता है जो किसी दुर्घटना, चोरी, तकनीकी खराबी या कानूनी दावों के कारण हो सकते हैं।

भारत सरकार के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय DGCA के Drone Rules 2025 के तहत अब 250 ग्राम से अधिक वज़न वाले सभी ड्रोन के लिए थर्ड-पार्टी देयता बीमा (Third-Party Liability Insurance) अनिवार्य कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि अगर आपका ड्रोन किसी तीसरे व्यक्ति को चोट पहुँचा देता है या उसकी संपत्ति को नुकसान करता है, तो बीमा कंपनी वह खर्च वहन करती है — जिससे आपको जेब से भुगतान नहीं करना पड़ता।

इसलिए, चाहे आप एक हॉबी यूज़र (Hobbyist) हों या कमर्शियल ऑपरेटर,
ड्रोन बीमा लेना अब सिर्फ़ एक विकल्प नहीं, बल्कि कानूनी और आर्थिक रूप से आवश्यक कदम बन गया है।
सही बीमा न केवल आपको मानसिक शांति देता है, बल्कि यह आपके पेशेवरपन (Professionalism) को भी दर्शाता है।
आख़िरकार, 2025 का दौर “Smart Flying, Safe Flying” का है — और स्मार्ट उड़ान वही है जो सुरक्षित और बीमाकृत (Insured) हो।

संक्षेप में : 2025 में भारत का ड्रोन मार्केट तेजी से बढ़ रहा है — इसलिए बीमा ना केवल सुरक्षा है, बल्कि कानूनी ज़रूरत भी बन चुका है।


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केस-विशिष्ट बीमा क्यों ज़रूरी है (Why Use Case-Specific Drone Beema Matters)

2025 के नियम और कानूनी परिदृश्य (DGCA और Digital Sky)

Drone Insurance in India1

ड्रोन उड़ाने से पहले नियम समझ लें — यह बीमा चुनने में मदद करता है।

ड्रोन श्रेणियाँ (Weight Categories) और ज़रूरी बातें

  • Nano (≤ 250 ग्राम): पंजीकरण और बीमा से अक्सर छूट मिलती है; सीमित ऊँचाई पर उड़ान।
  • Micro (>250g ≤ 2kg): पंजीकरण ज़रूरी, थर्ड-पार्टी बीमा लग सकता है (नॉन-कॉमर्शियल पर कुछ छूट)।
  • Small (>2kg ≤ 25kg): पंजीकरण, पायलट सर्टिफिकेट और बीमा अनिवार्य।
  • Medium (>25kg ≤ 150kg) और Large (>150kg): कड़े नियम और व्यापक बीमा जरूरी।
Category (श्रेणी)Weight Range (वजन सीमा)Registration Required (पंजीकरण जरूरी?)Pilot License Required (पायलट लाइसेंस जरूरी?)Insurance Required (बीमा जरूरी?)Notes (टिप्पणी)
Nano Drone (नैनो ड्रोन)≤ 250 grams❌ No❌ No❌ NoUncontrolled airspace में 50 ft (15m) तक उड़ाया जा सकता है। Controlled area में अनुमति (permit) जरूरी होती है।
Micro Drone (माइक्रो ड्रोन)> 250g ≤ 2kg✅ Yes✅ Yes (सिर्फ commercial use के लिए)✅ Yes (Nano को छोड़कर)Recreational use के लिए permit नहीं चाहिए, लेकिन commercial use के लिए जरूरी है।
Small Drone (स्मॉल ड्रोन)> 2kg ≤ 25kg✅ Yes✅ Yes✅ Yesहर प्रकार के उपयोग (recreational या commercial) के लिए registration और license अनिवार्य है।
Medium Drone (मीडियम ड्रोन)> 25kg ≤ 150kg✅ Yes✅ Yes✅ Yesसभी प्रकार के उपयोग के लिए registration, license और insurance जरूरी है।
Large Drone (लार्ज ड्रोन)> 150kg✅ Yes✅ Yes✅ Yesसभी उपयोगों के लिए registration, license और insurance अनिवार्य है।

महत्वपूर्ण: DGCA के नियमों के अनुसार 250 ग्राम से अधिक वाले ड्रोन के लिए थर्ड-पार्टी देयता बीमा (Third-Party Liability) अनिवार्य है — इसका उद्देश्य तीसरे पक्ष की संपत्ति या व्यक्ति को हुए नुकसान का भुगतान सुनिश्चित करना है। सामान्य रेंज में प्रॉपर्टी के नुकसान के लिए ₹7.5 लाख तक की कवर राशि बताई जाती है और शारीरिक चोट के लिए अधिक विकल्प दिए जा सकते हैं।

Digital Sky प्लेटफ़ॉर्म

Digital Sky प्लेटफ़ॉर्म भारत सरकार के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा बनाया गया एक ऑनलाइन सिस्टम है, जिसका उद्देश्य देश में सभी ड्रोन संचालन को सुरक्षित, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप बनाना है।
यह प्लेटफ़ॉर्म ड्रोन उपयोगकर्ताओं, ऑपरेटरों, और निर्माताओं के लिए एक एकीकृत डिजिटल हब (Unified Digital Hub) की तरह काम करता है, जहाँ से ड्रोन से संबंधित सभी अनुमतियाँ, पंजीकरण और बीमा जानकारी प्रबंधित की जाती है।

जब कोई व्यक्ति या कंपनी भारत में ड्रोन उड़ाना चाहती है, तो उसे पहले Digital Sky पर पंजीकरण कराना होता है।
पंजीकरण के बाद प्रत्येक ड्रोन को एक UIN (Unique Identification Number) दिया जाता है — यह नंबर आपके ड्रोन की पहचान का आधिकारिक प्रमाण होता है, जैसे किसी वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर।
इसके साथ ही, ड्रोन की बीमा पॉलिसी (Drone Beema Policy) भी इसी प्लेटफ़ॉर्म से लिंक की जाती है।
इससे बीमा कंपनियाँ, DGCA और ऑपरेटर — सभी को एक केंद्रीकृत रिकॉर्ड मिलता है, जिससे किसी दुर्घटना, नुकसान या दावे (claim) के समय प्रक्रिया तेज़ और पारदर्शी होती है।

2025 के अपडेट के अनुसार, बिना Digital Sky पर पंजीकृत ड्रोन उड़ाना ग़ैर-क़ानूनी है।
इसलिए हर ऑपरेटर को सलाह दी जाती है कि वे अपना ड्रोन, पायलट आईडी, और बीमा दस्तावेज़ Digital Sky में अवश्य लिंक करें।
इससे आप न केवल DGCA नियमों का पालन (Compliance) सुनिश्चित करते हैं, बल्कि अपने ड्रोन संचालन को भी सुरक्षित और प्रमाणिक बनाते हैं।


ड्रोन बीमा के मुख्य प्रकार (Types Of Drone Insurance)

2025 में भारत में उपलब्ध ड्रोन बीमा (Drone Beema) के कई प्रकार हैं, जो अलग-अलग जरूरतों और उपयोगकर्ताओं के लिए बनाए गए हैं। हर कवरेज का उद्देश्य अलग है — कोई तीसरे पक्ष के नुकसान से सुरक्षा देता है, तो कोई ड्रोन या उसके उपकरणों की मरम्मत/बदलाव का खर्च कवर करता है।
आइए, इन प्रमुख बीमा प्रकारों को आसान भाषा में समझते हैं 👇


1️⃣ थर्ड-पार्टी देयता बीमा (Third-Party Liability Insurance)

यह बीमा कानूनी रूप से अनिवार्य है अगर आपका ड्रोन 250 ग्राम से अधिक वजन का है।
अगर आपका ड्रोन उड़ान के दौरान गलती से किसी की संपत्ति को नुकसान पहुँचा देता है (जैसे कार, छत, खिड़की आदि) या किसी व्यक्ति को चोट लगती है, तो यह बीमा नुकसान की भरपाई करता है।
इसका कवरेज प्रायः ₹7.5 लाख तक के प्रॉपर्टी डैमेज और शारीरिक चोट या मृत्यु के मामलों में असीमित दावे (Unlimited Compensation) तक होता है।
यह हर ड्रोन मालिक के लिए सबसे जरूरी बीमा है क्योंकि इसके बिना DGCA नियमों के अनुसार आप ड्रोन नहीं उड़ा सकते।


2️⃣ हल कवरेज (Hull Coverage)

यह बीमा आपके ड्रोन की खुद की सुरक्षा करता है।
यदि आपका ड्रोन किसी दुर्घटना, क्रैश, या तकनीकी खराबी के कारण टूट-फूट का शिकार हो जाता है, तो यह कवरेज मरम्मत या बदलने की लागत को कवर करता है।
महंगे ड्रोन जैसे DJI Mavic 3, Phantom 4 Pro, Inspire 2 या कस्टम RPAS ऑपरेट करने वालों के लिए यह बेहद उपयोगी है।
इसकी वार्षिक प्रीमियम राशि ₹5,000 से ₹30,000 के बीच हो सकती है, जो ड्रोन के मूल्य और उपयोग पर निर्भर करती है।


3️⃣ पेलोड कवरेज (Payload Coverage)

ड्रोन पर लगे उपकरण जैसे कैमरा, सेंसर, LiDAR, स्प्रेयर या मेडिकल किट अक्सर काफी महंगे होते हैं।
अगर ये उपकरण दुर्घटना, पानी, गिरने या शॉर्ट-सर्किट की वजह से क्षतिग्रस्त हो जाएँ, तो पेलोड कवरेज आपको आर्थिक नुकसान से बचाता है।
यह कवरेज विशेष रूप से फिल्ममेकिंग, कृषि, सर्वे और मेडिकल डिलीवरी ऑपरेटरों के लिए महत्वपूर्ण है।
इसकी वार्षिक लागत ₹5,000–₹15,000 के बीच होती है।


4️⃣ BVLOS ऐड-ऑन (Beyond Visual Line of Sight)

जब आपका ड्रोन आपकी आँखों की सीधी नजर (Visual Line) से बाहर उड़ता है, तो इसे BVLOS ऑपरेशन कहा जाता है।
ऐसी उड़ानों में जोखिम ज्यादा होता है — जैसे लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स डिलीवरी, या बड़े सर्वे प्रोजेक्ट्स में।
इस कवरेज से आप उन संभावित हादसों से सुरक्षित रहते हैं जो दूरस्थ उड़ानों में हो सकते हैं।
BVLOS कवरेज का प्रीमियम ₹5,000–₹15,000 तक जा सकता है।


5️⃣ नाइट फ्लाइंग ऐड-ऑन (Night Flying Add-on)

अगर आप रात में ड्रोन उड़ाते हैं — जैसे इवेंट शूटिंग, सुरक्षा निगरानी या नाइट सर्वे के दौरान — तो यह ऐड-ऑन आपकी सुरक्षा को बढ़ाता है।
कम दृश्यता के कारण रात की उड़ानों में हादसे की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए यह बीमा अत्यंत उपयोगी है।
इसका प्रीमियम ₹3,000–₹8,000 के बीच होता है।


6️⃣ ट्रांज़िट कवरेज (Transit Coverage)

जब ड्रोन को एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता है, जैसे कार, वैन या कूरियर से, तो रास्ते में क्षति या चोरी हो सकती है।
ऐसे मामलों में ट्रांज़िट कवरेज आपका सहायक होता है।
यह बीमा पेशेवर फोटोग्राफर्स, फ़िल्ममेकर्स और सर्वे कंपनियों के लिए खास तौर पर उपयोगी है।


7️⃣ पर्सनल एक्सीडेंट कवर (Personal Accident Cover)

यह कवरेज ड्रोन ऑपरेटर या पायलट की शारीरिक चोट, विकलांगता या मृत्यु की स्थिति में वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
कई सरकारी और निजी अनुबंधों में इसे अनिवार्य भी किया जाता है, ताकि पायलटों को व्यक्तिगत सुरक्षा मिले।
इसका प्रीमियम ₹500 से ₹2,000 प्रति वर्ष तक हो सकता है।

2025 में ड्रोन बीमा औसत प्रीमियम रेंज (Drone Beema Premium in India in 2025)

2025 में भारत में ड्रोन बीमा (Drone Beema) की कीमतें अब धीरे-धीरे स्थिर हो चुकी हैं। पहले बीमा कंपनियाँ बहुत कम पॉलिसी देती थीं, लेकिन अब अधिकांश प्रमुख बीमा प्रदाता — जैसे HDFC ERGO, ICICI Lombard, Bajaj Allianz, Tata AIG आदि — ड्रोन ऑपरेटरों के लिए अलग-अलग कवरेज पैकेज पेश कर रहे हैं।

नीचे दी गई तालिका भारत में औसत वार्षिक प्रीमियम रेंज (2025 के अनुसार) दिखाती है 👇

Coverage Type (कवरेज प्रकार)Premium Range (वार्षिक प्रीमियम)Notes (टिप्पणी)
Third-Party Liability (तीसरे पक्ष की ज़िम्मेदारी)₹4,000 – ₹20,000250g से ज़्यादा वाले ड्रोन के लिए अनिवार्य। लगभग ₹7.5 लाख तक प्रॉपर्टी या व्यक्ति के नुकसान को कवर करता है।
Hull Coverage (हुल कवरेज)₹5,000 – ₹30,000ड्रोन की वैल्यू पर निर्भर। खासकर कमर्शियल ड्रोन के लिए अनुशंसित।
Payload Coverage (पेलोड कवरेज)₹5,000 – ₹15,000कैमरा, सेंसर, LiDAR, स्प्रेयर आदि को कवर करता है। फिल्ममेकिंग या कृषि उपयोग के लिए ज़रूरी।
BVLOS Add-On (Beyond Visual Line of Sight)₹5,000 – ₹15,000लॉजिस्टिक्स, डिलीवरी या बड़े सर्वे ऑपरेशन्स के लिए आवश्यक ऐड-ऑन।
Night Flying Add-On (नाइट फ्लाइंग)₹3,000 – ₹8,000रात में उड़ान (इवेंट शूट, सिक्योरिटी सर्विलांस) के लिए कवर देता है।
Comprehensive (All-In Plan)₹10,000 – ₹50,000+इसमें थर्ड-पार्टी, हुल, पेलोड और सभी ऐड-ऑन शामिल हैं। एंटरप्राइज़ और बड़े ऑपरेटर्स के लिए उपयुक्त।

नोट: ये सभी कीमतें औसत रेंज हैं।
अंतिम प्रीमियम कई बातों पर निर्भर करता है —
जैसे आपके ड्रोन का मूल्य (Market Value), उसका इस्तेमाल कितनी बार होता है (रोज़ाना या कभी-कभार), आप कौन-से क्षेत्र में उड़ान भरते हैं (Controlled Zone, Green Zone, या BVLOS), और आपने कौन-कौन से ऐड-ऑन कवरेज चुने हैं।

उदाहरण के लिए — अगर आपका ड्रोन ₹1 लाख से ऊपर का है और आप उसे व्यावसायिक शूटिंग में उपयोग करते हैं, तो आपका कम्प्रीहेन्सिव बीमा प्रीमियम ₹25,000–₹40,000 तक हो सकता है।
वहीं अगर आप केवल हॉबी फ्लाइंग करते हैं, तो बेसिक थर्ड-पार्टी कवर ₹4,000–₹5,000 में मिल सकता है।

2025 में ड्रोन बीमा की कीमतें पहले की तुलना में काफी सुलभ और प्रतिस्पर्धी हो गई हैं, जिससे अब हर उपयोगकर्ता अपने बजट के अनुसार सुरक्षित उड़ान (Safe Flying) सुनिश्चित कर सकता है।


प्रीमियम पर असर डालने वाले मुख्य फैक्टर्स (Main Factors Affecting Drone Beema Premium)

ड्रोन बीमा (Drone Beema) की प्रीमियम राशि हर व्यक्ति या कंपनी के लिए अलग-अलग हो सकती है। इसका कारण यह है कि बीमा कंपनियाँ कई बातों को ध्यान में रखकर प्रीमियम तय करती हैं। नीचे वे प्रमुख फैक्टर्स दिए गए हैं जो आपके बीमा की कीमत पर सीधा असर डालते हैं 👇

1️⃣ ड्रोन का वजन और प्रकार:
जितना भारी और महँगा ड्रोन होगा, उसका प्रीमियम उतना अधिक होगा। उदाहरण के लिए, एक प्रोफेशनल कैमरा ड्रोन या इंडस्ट्रियल ड्रोन का बीमा एक छोटे खिलौना ड्रोन की तुलना में महँगा होगा।

2️⃣ उपयोग (Usage):
अगर ड्रोन केवल मनोरंजन (Recreational) के लिए उपयोग होता है, तो जोखिम कम माना जाता है। लेकिन कमर्शियल यूज़, जैसे फिल्मिंग, सर्वे या डिलीवरी में, दुर्घटना की संभावना अधिक होती है — इसलिए प्रीमियम भी बढ़ जाता है।

3️⃣ फ्लाइट जोन (Flight Zone):
भारत में DGCA द्वारा क्षेत्र तीन जोन में बाँटे गए हैं — Green, Yellow और Red Zone। रेड जोन में उड़ान भरने की अनुमति सीमित होती है, और अगर अनुमति मिल भी जाए, तो वहाँ का जोखिम अधिक होने के कारण बीमा प्रीमियम भी ऊँचा होता है।

4️⃣ ऐड-ऑन कवरेज:
अगर आप BVLOS, Night Flying या Payload जैसे अतिरिक्त कवरेज जोड़ते हैं, तो सुरक्षा तो बढ़ती है, पर प्रीमियम भी उसी अनुपात में बढ़ता है।

5️⃣ ऑपरेटर का अनुभव और प्रमाणपत्र:
अगर पायलट DGCA-सर्टिफाइड है या किसी RPTO (Remote Pilot Training Organisation) से प्रशिक्षित है, तो बीमा कंपनी अक्सर छूट (Discount) देती है।

6️⃣ पिछला क्लेम रिकॉर्ड:
जिन ऑपरेटरों का क्लेम इतिहास साफ़ होता है (No Claim History), उन्हें नो-क्लेम बोनस (NCB) के रूप में रिन्यूअल पर छूट दी जाती है।

👉 ड्रोन बीमा का प्रीमियम केवल ड्रोन की कीमत पर नहीं, बल्कि उपयोग, अनुभव और सुरक्षा प्रथाओं पर भी निर्भर करता है।


प्रमुख बीमा प्रदाता और उनकी खासियतें (2025 में)

भारत में पहले जहाँ कुछ ही बीमा कंपनियाँ ड्रोन को कवर करती थीं, अब कई बड़े बीमाकर्ता और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म ड्रोन ऑपरेटरों के लिए विशेष योजनाएँ पेश कर रहे हैं।
2025 में भारत में उपलब्ध कुछ प्रमुख बीमा प्रदाता और उनकी खासियतें नीचे विस्तार से दी गई हैं 👇


1️⃣ TropoGo – स्मार्ट और “Pay-as-you-fly” मॉडल वाला प्लेटफ़ॉर्म

Tropogo logo

TropoGo भारत का एक प्रमुख डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है जो ड्रोन पायलटों और ऑपरेटरों के लिए ऑन-डिमांड बीमा (On-Demand Drone Insurance) उपलब्ध कराता है।
इसका सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि यहाँ Pay-as-you-fly मॉडल है — यानी आप जितनी देर ड्रोन उड़ाएँगे, उतने समय का ही बीमा ले सकते हैं।
अगर आप केवल कुछ घंटे या दिनभर के लिए शूट या सर्वे कर रहे हैं, तो TropoGo से मोबाइल ऐप के ज़रिए तुरंत पॉलिसी जारी कर सकते हैं।
यह विकल्प फ्रीलांसर, छोटे ड्रोन मालिकों और हौबीस्ट यूज़र्स के लिए बहुत किफायती है।
साथ ही, TropoGo का प्लेटफ़ॉर्म Digital Sky के साथ लिंक होता है, जिससे पंजीकरण और अनुपालन (Compliance) आसान बन जाता है।


2️⃣ HDFC ERGO – भरोसेमंद और तेज़ क्लेम प्रक्रिया

hdfc ergo logo

HDFC ERGO बीमा क्षेत्र में पहले से ही एक बड़ा नाम है, और अब यह ड्रोन बीमा में भी मजबूत उपस्थिति बना चुका है।
इसकी पॉलिसियाँ खासकर उन ऑपरेटरों के लिए उपयोगी हैं जो थर्ड-पार्टी देयता, हल कवरेज और पेलोड प्रोटेक्शन एक साथ लेना चाहते हैं।
कंपनी की खासियत है इसका भरोसेमंद क्लेम सेट्लमेंट प्रोसेस, जिसमें दस्तावेज़ीकरण कम और प्रक्रिया तेज़ होती है।
इसके साथ 24×7 ग्राहक सहायता और डिजिटल क्लेम ट्रैकिंग सुविधा भी उपलब्ध है।
अगर आप एक प्रोफेशनल सर्वे कंपनी या RPTO (Remote Pilot Training Organisation) हैं, तो HDFC ERGO आपके लिए एक विश्वसनीय विकल्प है।


3️⃣ TATA AIG – कमर्शियल और एंटरप्राइज़ ड्रोन के लिए मजबूत विकल्प

TATA AIG बीमा कंपनी विशेष रूप से कमर्शियल और एंटरप्राइज़ लेवल ड्रोन ऑपरेशन्स के लिए व्यापक योजनाएँ पेश करती है।
यह बीमा संस्थाएँ, प्रशिक्षण अकादमियाँ और बड़े सर्वे प्रोजेक्ट्स को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है।
कंपनी का कवरेज क्षेत्र विस्तृत है — इसमें BVLOS, Night Flying और Payload Protection जैसे ऐड-ऑन भी शामिल किए जा सकते हैं।
TATA AIG अपने कॉरपोरेट क्लाइंट्स को कस्टम पॉलिसी ऑफर करती है, जहाँ आप अपने ऑपरेशन की जरूरतों के अनुसार प्रीमियम और कवरेज दोनों तय कर सकते हैं।


4️⃣ ICICI Lombard – व्यापक नेटवर्क और 24×7 सपोर्ट

ICICI Lombard भारत की अग्रणी बीमा कंपनियों में से एक है, और अब ड्रोन सेक्टर में भी अपनी पहुँच बना रही है।
इसकी खासियत है इसका विस्तृत सर्विस नेटवर्क, जिससे क्लेम प्रक्रिया देश के किसी भी हिस्से में आसान बन जाती है।
कंपनी थर्ड-पार्टी, हल और पेलोड कवरेज के साथ-साथ ऑनलाइन रिन्यूअल और त्वरित कोटेशन सेवा भी देती है।
अगर आप नियमित रूप से ड्रोन उड़ाते हैं और तेज़ सपोर्ट चाहते हैं, तो ICICI Lombard एक भरोसेमंद विकल्प है।


5️⃣ Bajaj Allianz – हौबीस्ट और छोटे ऑपरेटरों के लिए किफायती विकल्प

Bajaj Allianz logo

Bajaj Allianz ने कम प्रीमियम और सरल प्रक्रिया के चलते हॉबी फ्लायर्स और छोटे कमर्शियल ऑपरेटरों में अच्छी पहचान बनाई है।
यह कंपनी बेसिक से लेकर कम्प्रीहेन्सिव प्लान तक कई किफायती पैकेज देती है।
इसकी ऑनलाइन पॉलिसी इश्यू प्रक्रिया बहुत सरल है — और यह हौबी ड्रोन उपयोगकर्ताओं के लिए सबसे आसान और बजट-फ्रेंडली विकल्पों में से एक मानी जाती है।


6️⃣ Policybazaar – तुलना और क्वोटेशन के लिए बेहतरीन प्लेटफ़ॉर्म

Policybazaar स्वयं बीमा कंपनी नहीं है, बल्कि एक तुलना और खरीद प्लेटफ़ॉर्म है।
अगर आप अलग-अलग कंपनियों की योजनाओं, प्रीमियम और फीचर्स की तुलना करना चाहते हैं, तो Policybazaar इस काम के लिए बहुत उपयोगी है।
यहाँ आप सिर्फ कुछ मिनटों में 2–3 कंपनियों के कोटेशन देख सकते हैं और अपनी जरूरत के अनुसार पॉलिसी चुन सकते हैं।


सभी कंपनियों की तुलनात्मक तालिका (Comparision Table)

Insurer (बीमा प्रदाता)Premium Range (वार्षिक प्रीमियम)Third-Party Liability (तीसरे पक्ष की ज़िम्मेदारी)Hull Coverage (ड्रोन का खुद का नुकसान)BVLOS Add-On (दूर उड़ान कवर)Payload Cover (कैमरा/स्प्रेयर आदि)Claim Settlement Ratio (क्लेम सेटलमेंट अनुपात)Best For (किसके लिए बेहतर)
TropoGo₹4,000 – ₹50,000₹7.5 लाख तक✅ Yes✅ Yes✅ Yes96%Commercial, Enterprise Users
HDFC ERGO₹4,000 – ₹30,000₹7.5 लाख तक✅ Yes✅ Yes✅ Yes96%Commercial, Recreational Users
TATA AIG₹8,000 – ₹60,000₹7.5 लाख तक✅ Yes✅ Yes✅ Yes98.4%Commercial, Training Institutes
ICICI Lombard₹5,000 – ₹35,000₹7.5 लाख तक✅ Yes✅ Yes✅ Yes96%Commercial, Hobbyists
Bajaj Allianz₹4,000 – ₹25,000₹7.5 लाख तक✅ Yes✅ Yes✅ Yes96%Hobbyists, Small Businesses

💡 महत्वपूर्ण सलाह: बीमा खरीदने से पहले सिर्फ एक कंपनी पर भरोसा न करें।
कम-से-कम 2–3 बीमा प्रदाताओं से कोटेशन (Quotation) लेकर तुलना करें — जैसे कवरेज लिमिट, एक्सक्लूज़न (Exclusion), और क्लेम प्रोसेस की समीक्षा करें।
साथ ही, बीमा कंपनी का क्लेम सेटलमेंट रेश्यो (Claim Settlement Ratio) और ग्राहक समीक्षा (Customer Feedback) ज़रूर देखें। इस तरह आप न सिर्फ़ पैसे की बचत कर सकते हैं, बल्कि अपने ड्रोन संचालन को एक भरोसेमंद सुरक्षा कवच भी दे सकते हैं।


कैसे चुनें सही ड्रोन बीमा पॉलिसी — स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

ड्रोन बीमा (Drone Beema) लेना आज के समय में केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक आवश्यक सुरक्षा कदम (Essential Safety Step) है।
2025 में भारत में ड्रोन उद्योग तेज़ी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ ही बीमा नियम (Drone Rules 2025) और अनुपालन की ज़रूरत भी बढ़ी है।
अगर आप पहली बार ड्रोन बीमा खरीद रहे हैं, तो नीचे दिए गए आसान स्टेप्स आपकी मदद करेंगे सही पॉलिसी चुनने में — ताकि न तो आप ज़रूरत से ज़्यादा खर्च करें, और न ही किसी जोखिम में पड़ें।

1️⃣ अपनी ज़रूरतें समझें (Understand Your Requirements)

सबसे पहले यह तय करें कि आपका ड्रोन किस काम के लिए उपयोग किया जा रहा है।
क्या आप सिर्फ़ शौकिया (Recreational) उड़ान भरते हैं या कमर्शियल (Commercial) कार्य करते हैं — जैसे सर्वे, कृषि, फिल्म शूटिंग, या डिलीवरी?
साथ ही ड्रोन का मॉडल, वजन और वैल्यू भी जान लें — क्योंकि बीमा का प्रीमियम इन्हीं कारकों पर निर्भर करता है।

उदाहरण के लिए:

  • ₹80,000 का DJI Mini 4 Pro (Micro Drone) और ₹5 लाख का औद्योगिक सर्वे ड्रोन — दोनों के प्रीमियम और कवरेज में बड़ा अंतर होगा।
    इसलिए पहले अपनी ज़रूरतों का आकलन करना सबसे ज़रूरी कदम है।

2️⃣ आवश्यक कवरेज तय करें (Choose the Right Coverage Types)

भारत में 250 ग्राम से भारी हर ड्रोन के लिए थर्ड-पार्टी देयता बीमा (Third-Party Liability Insurance) अनिवार्य (Mandatory) है।
यह बीमा आपको तब बचाता है जब आपके ड्रोन से किसी की संपत्ति या व्यक्ति को नुकसान पहुँचे।

इसके अलावा, अगर आपका ड्रोन महँगा है या उससे कमर्शियल कार्य किया जा रहा है, तो आपको हल कवरेज (Hull Coverage) और पेलोड कवरेज (Payload Coverage) भी लेना चाहिए।
हल कवरेज ड्रोन के क्रैश या क्षति को कवर करता है, जबकि पेलोड कवरेज कैमरा, LiDAR, सेंसर या अन्य उपकरणों की रक्षा करता है।

3️⃣ ऐड-ऑन विकल्प देखें (Check Useful Add-ons)

कई बीमा कंपनियाँ ड्रोन बीमा के साथ अतिरिक्त ऐड-ऑन (Add-ons) भी देती हैं, जो आपके ऑपरेशन को और सुरक्षित बनाते हैं:

  • BVLOS (Beyond Visual Line of Sight): जब आपका ड्रोन आपकी सीधी नज़र से बाहर उड़ता है। यह डिलीवरी और सर्वे प्रोजेक्ट्स के लिए ज़रूरी है।
  • Night Flying Cover: अगर आप रात में शूटिंग, सुरक्षा निगरानी या इवेंट कवर करते हैं, तो यह उपयोगी है।
  • Transit Cover: ड्रोन को यात्रा या शिपिंग के दौरान नुकसान से बचाता है।

लेकिन ध्यान रहे — जितने अधिक ऐड-ऑन जोड़ेंगे, प्रीमियम उतना बढ़ेगा। इसलिए केवल वही कवरेज लें जो वास्तव में आपके काम के लिए आवश्यक हो।

4️⃣ कोटेशन तुलना करें (Compare Quotes Before Buying)

कभी भी पहली दिखी पॉलिसी तुरंत न खरीदें।
आप Policybazaar, TropoGo, या सीधे ICICI Lombard, TATA AIG, Bajaj Allianz, HDFC ERGO जैसी कंपनियों की वेबसाइट पर जाकर कोटेशन (Quotation) निकालें।

सभी बीमा कंपनियों के प्रीमियम, कवरेज सीमा (Coverage Limit), और क्लेम प्रक्रिया (Claim Process) अलग-अलग होती है।
इनकी तुलना करने से आप एक ऐसी पॉलिसी चुन पाएँगे जो आपके बजट और ज़रूरत दोनों के अनुरूप हो।

5️⃣ ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स तैयार रखें (Prepare the Required Documents)

बीमा लेने से पहले आपको कुछ दस्तावेज़ तैयार रखने होंगे:

  • UIN (Unique Identification Number) — जो Digital Sky प्लेटफ़ॉर्म से मिलता है।
  • Drone खरीद इनवॉयस (Purchase Invoice)
  • DGCA Remote Pilot Certificate — अगर आप कमर्शियल ऑपरेशन कर रहे हैं।
    इन दस्तावेज़ों से पॉलिसी प्रोसेस आसान और तेज़ हो जाता है।

6️⃣ ऑनलाइन खरीद प्रक्रिया (Online Purchase Process)

आज अधिकांश बीमा प्रदाता ऑनलाइन बीमा खरीद सुविधा देते हैं।
आप बस 5–15 मिनट में UPI, कार्ड या नेट बैंकिंग से पेमेंट करके पॉलिसी डाउनलोड कर सकते हैं।
कई प्लेटफ़ॉर्म (जैसे TropoGo या Policybazaar) तुरंत ई-पॉलिसी जारी कर देते हैं, जिसे आप Digital Sky में अपलोड कर सकते हैं।

7️⃣ Digital Sky पर पॉलिसी लिंक करें (Link Your Policy for Compliance)

बीमा लेने के बाद उसे Digital Sky प्लेटफ़ॉर्म पर लिंक करना बहुत ज़रूरी है।
यह न केवल आपकी कानूनी अनुपालना (Compliance) सुनिश्चित करता है बल्कि किसी दुर्घटना की स्थिति में क्लेम प्रोसेस को सरल और तेज़ बनाता है।
2025 के नियमों के अनुसार, जो ड्रोन Digital Sky में रजिस्टर्ड और बीमित (Insured) नहीं हैं, वे ग़ैर-क़ानूनी उड़ान (Illegal Flight) माने जाएंगे।

सुझाव (Tips):

  • बीमा खरीदने से पहले 2–3 कोटेशन अवश्य तुलना करें।
  • DGCA प्रमाणित पायलट होने पर अक्सर डिस्काउंट मिलता है।
  • अगर आप ड्रोन कम उड़ाते हैं, तो Pay-as-you-fly मॉडल अपनाएँ।
  • और हमेशा Digital Sky में पॉलिसी लिंक करें ताकि नियमों का पूर्ण पालन हो सके।

ड्रोन बीमा क्लेम कैसे करें (Drone Beema Claim Process)

ड्रोन बीमा (Drone Beema) का सबसे बड़ा लाभ यह है कि किसी दुर्घटना, नुकसान या चोरी के समय आप पर भारी आर्थिक बोझ नहीं पड़ता।
लेकिन बीमा से वास्तविक फायदा तभी मिलेगा जब आप सही तरीके से और समय पर क्लेम प्रक्रिया (Claim Process) पूरी करें।
बहुत से नए ड्रोन ऑपरेटर इस प्रक्रिया को लेकर असमंजस में रहते हैं — कब सूचित करें, कौन से दस्तावेज़ लगते हैं, और सेटलमेंट में कितना समय लगता है।
आइए जानते हैं स्टेप-बाय-स्टेप कि 2025 में ड्रोन बीमा क्लेम कैसे करें 👇

1️⃣ बीमा कंपनी को तुरंत सूचित करें (Notify Your Insurer Immediately)

जैसे ही कोई दुर्घटना, क्रैश, चोरी या तीसरे पक्ष का नुकसान होता है — 24 घंटे के भीतर बीमा कंपनी को सूचना देना बेहद ज़रूरी है।
आप यह काम फोन, ईमेल या बीमा कंपनी के मोबाइल ऐप के ज़रिए कर सकते हैं।

उदाहरण:
अगर आपके ड्रोन से किसी वाहन को नुकसान हुआ है या वह पानी में गिर गया है, तो तुरंत फोटो या वीडियो लेकर बीमाकर्ता (Insurer) को सूचित करें।
अक्सर कंपनियाँ Claim Intimation Number जारी करती हैं — इसे सुरक्षित रखें क्योंकि आगे की प्रक्रिया इसी नंबर से ट्रैक होगी।

2️⃣ सबूत इकट्ठा करें (Collect Proper Evidence)

क्लेम को मंजूरी दिलाने के लिए सबूत (Evidence) बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।
इसमें शामिल हो सकते हैं:

  • घटना की फोटो और वीडियो फुटेज
  • गवाहों के बयान (Witness Statements), अगर कोई मौजूद हो
  • ड्रोन की क्षतिग्रस्त पार्ट्स की तस्वीरें
  • घटना स्थल का विवरण (Date, Time, Location)

इन सबूतों से यह साबित होता है कि नुकसान वास्तविक है और किसी प्रकार की लापरवाही नहीं की गई थी।
क्लेम में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए यह कदम सबसे अहम है।

3️⃣ सर्वेयर की विज़िट (Surveyor Inspection)

बीमा कंपनी आपकी सूचना मिलने के बाद एक सर्वेयर (Insurance Surveyor) भेजती है।
यह व्यक्ति बीमा कंपनी का प्रतिनिधि होता है जो साइट या ड्रोन की स्थिति का निरीक्षण करता है।
वह नुकसान का अनुमान लगाता है, मरम्मत की संभावनाएँ जांचता है और एक रिपोर्ट तैयार करता है।
यह रिपोर्ट क्लेम सेटलमेंट के लिए आधार बनती है।

ध्यान रखें — सर्वेयर के आने से पहले ड्रोन को ज्यादा छेड़छाड़ न करें, ताकि स्थिति वास्तविक रूप में दिखे।

4️⃣ दस्तावेज़ जमा करें (Submit the Required Documents)

क्लेम प्रोसेस में कुछ आवश्यक दस्तावेज़ जमा करने होते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • बीमा पॉलिसी की कॉपी
  • UIN (Unique Identification Number) — जो Digital Sky प्लेटफ़ॉर्म से मिला हो
  • ड्रोन की खरीद इनवॉयस (Purchase Invoice)
  • FIR या पुलिस रिपोर्ट — अगर मामला चोरी या तीसरे पक्ष के नुकसान का है
  • घटना की फोटो और वीडियो
  • DGCA पायलट सर्टिफिकेट (अगर कमर्शियल ऑपरेशन था)

ये दस्तावेज़ पूरी तरह और समय पर जमा करने से क्लेम प्रोसेस तेज़ी से आगे बढ़ता है।

5️⃣ सेटलमेंट और भुगतान प्रक्रिया (Claim Settlement & Payment)

सर्वेयर की रिपोर्ट और दस्तावेज़ों की जांच के बाद बीमा कंपनी तय करती है कि कितनी राशि का भुगतान या रिपेयर अनुमोदन किया जाए।
आमतौर पर पूरी प्रक्रिया 7 से 15 कार्यदिवसों (Working Days) के भीतर पूरी हो जाती है, बशर्ते सब दस्तावेज़ सही हों।
अगर मामला जटिल है (जैसे तीसरे पक्ष के कानूनी दावे), तो यह प्रक्रिया थोड़ी लंबी हो सकती है।

कंपनी भुगतान सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर करती है या अधिकृत रिपेयर सेंटर में ड्रोन की मरम्मत करवाती है।


6️⃣ बेस्ट प्रैक्टिसेज़ (Best Practices for a Smooth Claim)

  • घटना तुरंत रिकॉर्ड करें: मौके पर ही फोटो और वीडियो लें।
  • डिजिटल कॉपी रखें: सभी दस्तावेज़ स्कैन करके क्लाउड या ईमेल में सेव रखें।
  • रूल्स का पालन करें: DGCA और Digital Sky के नियमों का पालन करने वाले ऑपरेटरों के क्लेम जल्दी पास होते हैं।
  • ड्रोन को छेड़ें नहीं: सर्वेयर आने से पहले स्थिति को ज्यों-का-त्यों रखें।
  • क्लेम स्टेटस ट्रैक करें: कंपनी की वेबसाइट या ऐप पर Claim Number डालकर स्टेटस देखें।

निष्कर्ष (Conclusion)

ड्रोन बीमा क्लेम का प्रोसेस मुश्किल नहीं है, बशर्ते आप समय पर सूचना दें और सभी दस्तावेज़ सही रखें।
चोरी, क्रैश या तीसरे पक्ष के नुकसान जैसी घटनाएँ किसी के साथ भी हो सकती हैं — लेकिन सही बीमा और साफ़ प्रक्रिया से नुकसान की भरपाई पाना आसान हो जाता है।

याद रखें — ड्रोन बीमा क्लेम हमेशा समय पर एक्शन लेने और सही डॉक्यूमेंटेशन पर निर्भर करता है.


केस-विशिष्ट बीमा क्यों ज़रूरी है (Why Use Case-Specific Drone Beema Matters)

हर ड्रोन का उपयोग अलग उद्देश्य के लिए किया जाता है — और हर उपयोग के साथ जुड़े जोखिम भी अलग होते हैं।
इसी वजह से केस-विशिष्ट बीमा (Use Case-Specific Beema) चुनना बेहद ज़रूरी हो जाता है।

उदाहरण के लिए —

  • कृषि (Agriculture) ड्रोन में स्प्रेयर और केमिकल्स का उपयोग होता है, इसलिए इनके लिए केमिकल देयता कवरेज (Chemical Liability Coverage) जरूरी है। यह कवरेज खेतों, फसलों या आसपास के पर्यावरण को होने वाले नुकसान की भरपाई में मदद करता है।
  • वहीं, डिलीवरी ड्रोन (Delivery Drones) अक्सर BVLOS (Beyond Visual Line of Sight) मोड में उड़ते हैं, यानी पायलट की नज़र से बाहर। इस स्थिति में दुर्घटना या तीसरे पक्ष को नुकसान का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए BVLOS कवरेज आवश्यक होता है।

अगर आप एक सर्वे, फिल्मिंग, सिक्योरिटी या हेल्थ डिलीवरी ड्रोन ऑपरेटर हैं, तो आपकी ज़रूरतें अलग होंगी। इसलिए एक ही तरह की बीमा पॉलिसी सबके लिए उपयुक्त नहीं हो सकती।

सही बीमा का चयन करने का मतलब है —

  • आपके काम के अनुसार कवरेज पूरी तरह से अनुकूल (Customized) हो।
  • DGCA (Directorate General of Civil Aviation) के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित हो।
  • और आपकी पॉलिसी Digital Sky प्लेटफ़ॉर्म पर सही तरीके से रजिस्टर्ड हो, जिससे कानूनी अनुपालन (Compliance) आसान बने।

संक्षेप में कहा जाए तो केस-विशिष्ट ड्रोन बीमा न केवल जोखिमों को कम करता है, बल्कि यह यह भी सुनिश्चित करता है कि आपका व्यवसाय सुरक्षित, वैध और दीर्घकालिक रूप से स्थिर बना रहे।

कृषि ड्रोन बीमा (Krishi Drone Beema)— किसानों और एग्री-टेक कंपनियों के लिए जरूरी सुरक्षा

Krishi Drone Beema

भारत में खेती तेजी से स्मार्ट एग्रीकल्चर (Smart Agriculture) की दिशा में बढ़ रही है, और इसमें किसान ड्रोन (Kisan Drones) अहम भूमिका निभा रहे हैं।
आज ये ड्रोन सिर्फ़ फोटोग्राफी तक सीमित नहीं हैं — बल्कि अब ये फसल स्प्रेइंग (Crop Spraying), कीटनाशक छिड़काव, मॉनिटरिंग और उपज विश्लेषण जैसे कामों के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं।
लेकिन इन फायदों के साथ कुछ खास जोखिम (Specific Risks) भी आते हैं, जिन्हें समझना और कवर करना बेहद ज़रूरी है।

मुख्य जोखिम (Key Risks for Kisan Drones):

कृषि ड्रोन मुख्य रूप से खेतों में उड़ते हैं जहाँ कई अनियंत्रित कारक (जैसे हवा, नमी, पेड़ या बिजली की तारें) मौजूद रहते हैं।
1️⃣ पेस्टिसाइड ड्रिफ्ट (Pesticide Drift): जब ड्रोन हवा की दिशा में कीटनाशक उड़ेलता है, तो दवा दूसरी फसलों या गाँव के आसपास जा सकती है, जिससे नुकसान हो सकता है।
2️⃣ क्रैश या तकनीकी खराबी: खेतों में उड़ान के दौरान क्रैश हो जाना, फसल को नुकसान पहुँचाना या उपकरण टूट जाना आम समस्या है।
3️⃣ BVLOS ऑपरेशन: कई बार ड्रोन खेत के बड़े हिस्से में उड़ते हैं, जहाँ पायलट की सीधी नज़र नहीं होती। ऐसे मामलों में BVLOS कवरेज की आवश्यकता होती है ताकि दुर्घटना की स्थिति में बीमा सुरक्षा बनी रहे।

कवरेज (Recommended Coverage):

कृषि ड्रोन के लिए उचित बीमा में निम्नलिखित कवरेज शामिल होना चाहिए —

  • पेलोड कवरेज (Payload Coverage): इसमें ड्रोन पर लगे स्प्रेयर, टैंक और सेंसर उपकरण को नुकसान से सुरक्षा मिलती है।
  • केमिकल लाइबिलिटी (Chemical Liability): अगर ड्रोन से छिड़का गया कीटनाशक किसी दूसरे खेत, व्यक्ति या पशु को नुकसान पहुँचाता है, तो यह कवरेज मुआवज़ा देने में मदद करता है।
  • BVLOS कवरेज: बड़े खेतों में लंबी दूरी की उड़ान के लिए यह कवरेज जरूरी है ताकि कानूनी और आर्थिक सुरक्षा बनी रहे।

किफायती विकल्प (Affordable Options):

2025 में भारत में TropoGo और TATA AIG जैसे बीमा प्रदाता कृषि ड्रोन के लिए विशेष कम्प्रीहेन्सिव प्लान दे रहे हैं।
इन योजनाओं में “Pay-as-you-fly” मॉडल या “Annual Comprehensive Protection” दोनों विकल्प मिलते हैं — जिससे किसान या एग्री-टेक कंपनी अपनी ज़रूरत और बजट के अनुसार बीमा चुन सकती है।

कृषि ड्रोन बीमा (Kisan Drone Beema) सिर्फ़ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक जरूरी निवेश है जो किसानों और एग्री-टेक कंपनियों को आर्थिक सुरक्षा, कानूनी अनुपालन और मानसिक शांति देता है।

डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स ड्रोन बीमा (Delivery & Logistics Drone Beema)

भारत में अब डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में ड्रोन का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है — खासकर मेडिकल डिलीवरी, फूड और ई-कॉमर्स पार्सल ट्रांसपोर्ट में।
ड्रोन से डिलीवरी का फायदा यह है कि यह ट्रैफ़िक से बचकर कम समय में सामान पहुँचाते हैं।
हालाँकि, इस क्षेत्र में जोखिम भी काफी अधिक है, क्योंकि ये ड्रोन अक्सर BVLOS (Beyond Visual Line of Sight) मोड में उड़ते हैं — यानी पायलट की सीधी निगरानी से बाहर।

मुख्य जोखिम (Key Risks):

1️⃣ BVLOS ऑपरेशन: लंबी दूरी पर उड़ान के दौरान सिग्नल लॉस, GPS गड़बड़ी या कंट्रोल सिस्टम फेल होने का खतरा।
2️⃣ पेलोड नुकसान: पार्सल, मेडिकल किट या अन्य वस्तु का गिरना या चोरी होना।
3️⃣ तीसरे पक्ष को नुकसान: अगर ड्रोन किसी व्यक्ति, वाहन या संपत्ति से टकरा जाए।
4️⃣ मौसमी और ट्रांज़िट जोखिम: बारिश या धूलभरी हवा के कारण हार्डवेयर को नुकसान।

कवरेज (Recommended Coverage):

डिलीवरी ड्रोन के लिए निम्न कवरेज महत्वपूर्ण है —

  • थर्ड-पार्टी देयता बीमा: किसी व्यक्ति या संपत्ति को नुकसान की स्थिति में सुरक्षा।
  • BVLOS कवरेज: दृश्य सीमा से बाहर उड़ान के जोखिमों से बचाव।
  • पेलोड कवरेज: सामान या मेडिकल किट के नुकसान की स्थिति में मुआवज़ा।
  • ट्रांज़िट कवरेज: डिलीवरी रूट या स्टोरेज के दौरान ड्रोन को सुरक्षा।
  • हुल कवरेज: ड्रोन बॉडी, मोटर या इलेक्ट्रॉनिक्स की मरम्मत का खर्च।

प्रमुख बीमा प्रदाता:

ICICI Lombard और TATA AIG ने विशेष रूप से डिलीवरी एवं लॉजिस्टिक्स के लिए प्लान बनाए हैं जिनमें BVLOS ऐड-ऑन और ऑपरेशनल कवरेज शामिल है।
वहीं TropoGo प्लेटफ़ॉर्म छोटे स्टार्टअप्स और ट्रायल डिलीवरी ऑपरेटरों के लिए “Pay-as-you-fly” सुविधा भी देता है।

कृषि ड्रोन बीमा प्रदाताओं की तुलना तालिका (Agricultural Drone Insurance Providers Comparison Table

Provider (बीमा प्रदाता)Third-Party Liability (तीसरे पक्ष की ज़िम्मेदारी)Hull Coverage (ड्रोन का खुद का नुकसान)Payload Coverage (स्प्रेयर/कैमरा आदि)BVLOS Add-On (दूर उड़ान कवर)Chemical Liability (रसायन जिम्मेदारी)Starting Price (शुरुआती कीमत ₹)
TropoGo✅ Yes (₹7.5 लाख तक)✅ Yes✅ Yes✅ Yes✅ Yes₹4,000
TATA AIG✅ Yes (₹7.5 लाख तक)✅ Yes✅ Yes✅ Yes✅ Yes₹8,000
ICICI Lombard✅ Yes (₹7.5 लाख तक)✅ Yes✅ Yes✅ Yes✅ Yes₹5,000
Bajaj Allianz✅ Yes (₹7.5 लाख तक)✅ Yes✅ Yes✅ Yes✅ Yes₹4,000

डिलीवरी ड्रोन बीमा हर उस कंपनी के लिए जरूरी है जो ड्रोन का इस्तेमाल वस्तुएँ या सेवाएँ पहुँचाने के लिए करती है।
यह न केवल उपकरण और सामान की सुरक्षा देता है, बल्कि DGCA नियमों के तहत कानूनी अनुपालन भी सुनिश्चित करता है।

फिल्मिंग और मीडिया ड्रोन बीमा (Filmmaking & Media Drone Beema)

ड्रोन ने फिल्म और मीडिया इंडस्ट्री में क्रांति ला दी है। आज कोई भी शादी, मूवी शूट, म्यूज़िक वीडियो या वेब सीरीज़ की शूटिंग ड्रोन कैमरे के बिना अधूरी लगती है।
ड्रोन की मदद से अब हवाई शॉट्स, 360° व्यू और कठिन लोकेशनों के विजुअल्स बड़ी आसानी से लिए जा सकते हैं। लेकिन इन शानदार विजुअल्स के पीछे कई जोखिम भी छिपे होते हैं, जिन्हें नज़रअंदाज़ करना सही नहीं है।

मुख्य जोखिम (Key Risks for Media Drones):

1️⃣ तकनीकी खराबी या क्रैश: शूटिंग के दौरान ड्रोन के गिरने या तकनीकी गड़बड़ी से न सिर्फ़ उपकरण टूट सकता है, बल्कि महँगा कैमरा भी खराब हो सकता है।
2️⃣ भीड़ वाले इलाक़े में दुर्घटना: इवेंट्स, शादी या आउटडोर शूट के दौरान अगर ड्रोन किसी व्यक्ति या संपत्ति से टकरा जाए, तो थर्ड-पार्टी नुकसान (Third-Party Damage) का खतरा बढ़ जाता है।
3️⃣ मौसम संबंधी जोखिम: हवा, बारिश या धूलभरे वातावरण में शूटिंग के दौरान ड्रोन के नियंत्रण खोने की संभावना रहती है।

कवरेज (Recommended Coverage):

फिल्मिंग या मीडिया ड्रोन के लिए बीमा लेते समय निम्नलिखित कवरेज ज़रूर शामिल करें —

  • हल कवरेज (Hull Coverage): ड्रोन बॉडी और उसकी मरम्मत/रिप्लेसमेंट की सुरक्षा।
  • पेलोड कवरेज (Payload Coverage): कैमरा, गिंबल और सेंसर उपकरणों को नुकसान से सुरक्षा।
  • थर्ड-पार्टी देयता (Third-Party Liability): किसी व्यक्ति या प्रॉपर्टी को नुकसान की स्थिति में मुआवज़ा।
  • नाईट फ्लाइंग ऐड-ऑन: यदि शूटिंग रात में या कम रोशनी में होती है।
  • ट्रांज़िट कवरेज: शूटिंग लोकेशन तक ड्रोन को ले जाते समय होने वाले नुकसान से सुरक्षा।

प्रमुख बीमा प्रदाता:

TATA AIG, HDFC ERGO और Bajaj Allianz जैसी कंपनियाँ मीडिया ड्रोन के लिए कस्टमाइज्ड कवरेज देती हैं।
वहीं TropoGo प्लेटफ़ॉर्म पर आप “Pay-per-Fly” पॉलिसी भी चुन सकते हैं — यानी जितना उड़ाएँ, उतना भुगतान करें।
यह फ्रीलांसर या छोटे प्रोडक्शन हाउस के लिए एक किफायती और लचीला विकल्प है।

फिल्मिंग और मीडिया ड्रोन बीमा प्रदाताओं की तुलना तालिका (Filmmaking & Media Drone Insurance Providers Comparison Table)

Provider (बीमा प्रदाता)Third-Party Liability (तीसरे पक्ष की ज़िम्मेदारी)Hull Coverage (ड्रोन का खुद का नुकसान)Payload Coverage (कैमरा/सेंसर आदि)Privacy Invasion (गोपनीयता उल्लंघन)Night Flying (रात की उड़ान)Starting Price (शुरुआती कीमत ₹)
Policybazaar✅ Yes (₹7.5 लाख तक)✅ Yes✅ Yes✅ Yes✅ Yes₹8,000
TropoGo✅ Yes (₹7.5 लाख तक)✅ Yes✅ Yes❌ No✅ Yes₹4,000
ICICI Lombard✅ Yes (₹7.5 लाख तक)✅ Yes✅ Yes✅ Yes✅ Yes₹5,000
Bajaj Allianz✅ Yes (₹7.5 लाख तक)✅ Yes✅ Yes❌ No✅ Yes₹4,000

फिल्मिंग ड्रोन बीमा न सिर्फ़ आपके उपकरण की सुरक्षा करता है बल्कि शूटिंग के दौरान होने वाले कानूनी या वित्तीय जोखिमों से भी बचाता है।
अगर आप प्रोफेशनल ड्रोन वीडियोग्राफर हैं, तो बीमा को अपने प्रोडक्शन बजट का अनिवार्य हिस्सा मानिए — यह लंबे समय में आपको बहुत बड़े नुकसान से बचा सकता है।

सर्वे और मैपिंग ड्रोन बीमा (Survey & Mapping Drone Beema)

सर्वे और मैपिंग ड्रोन का उपयोग भूमि माप, खनन, निर्माण, स्मार्ट सिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में बड़े पैमाने पर होता है।
इन ड्रोन में हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरे, LiDAR और सेंसर लगे होते हैं — जिनकी कीमत लाखों रुपये तक पहुँच सकती है।

मुख्य जोखिम:

1️⃣ सेंसर या LiDAR डिवाइस का नुकसान: अत्यधिक महँगा उपकरण गिरने या टकराने से टूट सकता है।
2️⃣ डेटा लॉस या करप्शन: मैपिंग डेटा खो जाने पर पूरे प्रोजेक्ट पर असर पड़ सकता है।
3️⃣ BVLOS और ऊँचाई संबंधी खतरे: सर्वे अक्सर पहाड़ी या दूरस्थ इलाकों में होते हैं जहाँ नियंत्रण मुश्किल होता है।

कवरेज:

  • पेलोड कवरेज: LiDAR, कैमरा और सेंसर के नुकसान से सुरक्षा।
  • हुल कवरेज: ड्रोन के बॉडी और हार्डवेयर की मरम्मत/रिप्लेसमेंट।
  • थर्ड-पार्टी कवरेज: साइट पर अन्य उपकरण या व्यक्ति को नुकसान।
  • डेटा प्रोटेक्शन ऐड-ऑन: कुछ कंपनियाँ अब डेटा लॉस या सॉफ्टवेयर गड़बड़ी को भी कवर करती हैं।

प्रमुख बीमा प्रदाता:

HDFC ERGO और Bajaj Allianz सर्वे ड्रोन ऑपरेटरों के लिए अच्छे कम्प्रीहेन्सिव प्लान देते हैं।
TropoGo की “Survey Safe Plan” अल्पकालिक प्रोजेक्ट्स के लिए लोकप्रिय विकल्प है।

सर्वे और मैपिंग ड्रोन बीमा प्रदाताओं की तुलना तालिका (Survey & Mapping Drone Insurance Providers Comparison Table)

Provider (बीमा प्रदाता)Third-Party Liability (तीसरे पक्ष की ज़िम्मेदारी)Hull Coverage (ड्रोन का खुद का नुकसान)Payload Coverage (कैमरा/सेंसर आदि)BVLOS Add-On (दृष्टि सीमा से बाहर उड़ान)Starting Price (शुरुआती कीमत ₹)
TropoGo✅ Yes (₹7.5 लाख तक)✅ Yes✅ Yes✅ Yes₹10,000
TATA AIG✅ Yes (₹7.5 लाख तक)✅ Yes✅ Yes✅ Yes₹8,000
ICICI Lombard✅ Yes (₹7.5 लाख तक)✅ Yes✅ Yes✅ Yes₹5,000

अगर आप सर्वे, GIS, LiDAR या कंस्ट्रक्शन में काम करते हैं, तो यह बीमा आपके निवेश और डेटा दोनों की सुरक्षा करता है।

हेल्थ और मेडिकल ड्रोन बीमा (Healthcare & Medical Drone Beema)

भारत में हेल्थ सेक्टर में ड्रोन का उपयोग अब तेजी से बढ़ रहा है — खासकर रक्त नमूने, वैक्सीन, दवाइयाँ और मेडिकल किट डिलीवरी के लिए।
यह पहल दूरदराज़ के गाँवों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने में अहम भूमिका निभा रही है।

मुख्य जोखिम:

1️⃣ BVLOS उड़ानें: ये ड्रोन अक्सर लंबी दूरी तक उड़ते हैं, जिससे नियंत्रण और मौसम दोनों का खतरा बढ़ जाता है।
2️⃣ संवेदनशील पेलोड: मेडिकल उत्पाद नाजुक और तापमान-संवेदनशील होते हैं।
3️⃣ समयबद्ध डिलीवरी: विलंब या तकनीकी खराबी से बड़ा नुकसान हो सकता है।

कवरेज:

  • BVLOS ऐड-ऑन कवरेज: दूरस्थ उड़ानों के दौरान जोखिम से सुरक्षा।
  • पेलोड कवरेज: दवाइयों, सैंपल्स या वैक्सीन के नुकसान की भरपाई।
  • थर्ड-पार्टी देयता: किसी दुर्घटना में व्यक्ति या संपत्ति को नुकसान की स्थिति में सुरक्षा।
  • ट्रांज़िट कवरेज: परिवहन के दौरान ड्रोन या पेलोड को सुरक्षा।

प्रमुख बीमा प्रदाता:

TropoGo, TATA AIG और ICICI Lombard ने हेल्थ ड्रोन के लिए विशेष नीतियाँ विकसित की हैं।
ये कंपनियाँ “Emergency Response Drone Cover” भी प्रदान करती हैं, जिसमें त्वरित क्लेम प्रोसेस शामिल है।

हेल्थ और मेडिकल ड्रोन बीमा प्रदाताओं की तुलना तालिका (Healthcare & Medical Drone Insurance Providers Comparison Table)

Provider (बीमा प्रदाता)Third-Party Liability (तीसरे पक्ष की ज़िम्मेदारी)Hull Coverage (ड्रोन का खुद का नुकसान)Payload Coverage (कैमरा/सेंसर आदि)BVLOS Add-On (दृष्टि सीमा से बाहर उड़ान)Starting Price (शुरुआती कीमत ₹)
TropoGo✅ Yes (₹7.5 लाख तक)✅ Yes✅ Yes✅ Yes₹15,000
TATA AIG✅ Yes (₹7.5 लाख तक)✅ Yes✅ Yes✅ Yes₹20,000
ICICI Lombard✅ Yes (₹7.5 लाख तक)✅ Yes✅ Yes✅ Yes₹18,000

हेल्थकेयर ड्रोन बीमा जीवनरक्षक सेवाओं को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाता है, ताकि ऑपरेटर निश्चिंत होकर सामाजिक उपयोग में योगदान दे सकें।

सुरक्षा और निगरानी ड्रोन बीमा (Security & Surveillance Drone Beema)

सुरक्षा एजेंसियाँ, पुलिस विभाग, और प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनियाँ अब ड्रोन आधारित निगरानी (Aerial Surveillance) का उपयोग बड़े पैमाने पर कर रही हैं।
ये ड्रोन भीड़ नियंत्रण, बॉर्डर पेट्रोल, स्टेडियम सिक्योरिटी, और आपातकालीन स्थिति की मॉनिटरिंग में बेहद उपयोगी हैं।

मुख्य जोखिम:

1️⃣ रात में उड़ान (Night Flying): दृश्यता कम होने से क्रैश का खतरा बढ़ता है।
2️⃣ डेटा चोरी या हैकिंग: कैमरा फीड का दुरुपयोग हो सकता है।
3️⃣ थर्ड-पार्टी नुकसान: भीड़ में उड़ान के दौरान चोट या संपत्ति क्षति।

कवरेज:

  • नाईट फ्लाइंग ऐड-ऑन: रात में निगरानी मिशन के दौरान कवरेज।
  • हुल कवरेज: ड्रोन और कैमरा उपकरण की मरम्मत।
  • थर्ड-पार्टी देयता: पब्लिक या प्रॉपर्टी नुकसान की स्थिति में सुरक्षा।
  • डेटा और साइबर कवरेज (Optional): वीडियो या सर्विलांस डेटा को अनधिकृत एक्सेस से बचाने के लिए।

प्रमुख बीमा प्रदाता:

TATA AIG और ICICI Lombard सुरक्षा ड्रोन ऑपरेटरों को विशेष “Public Safety Drone Cover” प्रदान करते हैं।
यह प्लान सरकारी और प्राइवेट एजेंसियों दोनों के लिए उपयुक्त है।

सुरक्षा और निगरानी ड्रोन बीमा प्रदाताओं की तुलना तालिका (Security & Surveillance Drone Insurance Providers Comparison Table)

Provider (बीमा प्रदाता)Third-Party Liability (तीसरे पक्ष की ज़िम्मेदारी)Hull Coverage (ड्रोन का खुद का नुकसान)Payload Coverage (कैमरा/सेंसर आदि)Privacy Invasion (गोपनीयता उल्लंघन कवर)Starting Price (शुरुआती कीमत ₹)
TropoGo✅ Yes (₹7.5 लाख तक)✅ Yes✅ Yes❌ No₹12,000
ICICI Lombard✅ Yes (₹7.5 लाख तक)✅ Yes✅ Yes✅ Yes₹10,000
HDFC ERGO✅ Yes (₹7.5 लाख तक)✅ Yes✅ Yes❌ No₹15,000

सुरक्षा ड्रोन बीमा किसी भी एजेंसी के लिए जरूरी है जो सार्वजनिक क्षेत्रों में ऑपरेट करती है। यह बीमा दुर्घटनाओं, डेटा लीक और कानूनी जोखिमों से सुरक्षा देता है।

हॉबीस्ट ड्रोन बीमा (Hobbyist Drone Beema)

भारत में अब ड्रोन सिर्फ़ प्रोफेशनल काम के लिए नहीं, बल्कि मनोरंजन, फोटोग्राफी, और कंटेंट क्रिएशन के लिए भी खूब इस्तेमाल हो रहे हैं।
कई लोग अब DJI Mini, Avata, Air 3 या Skydio जैसे हल्के ड्रोन का इस्तेमाल घूमने-फिरने या सोशल मीडिया कंटेंट बनाने के लिए करते हैं।
लेकिन चाहे आप सिर्फ़ हौबी के तौर पर ड्रोन उड़ा रहे हों, बीमा लेना उतना ही जरूरी है जितना किसी प्रोफेशनल ऑपरेटर के लिए।

क्यों जरूरी है (Why Insurance Matters for Hobbyists):

भले ही आपका ड्रोन Nano या Micro कैटेगरी (<250g या <2kg) में आता हो, फिर भी उड़ान के दौरान जोखिम बने रहते हैं —

  • क्रैश या गुम होना: हल्के ड्रोन हवा के झोंके या सिग्नल लॉस में गिर सकते हैं।
  • तीसरे पक्ष को नुकसान: गलती से किसी व्यक्ति, वाहन या संपत्ति को चोट/नुकसान हो सकता है।
  • कानूनी सुरक्षा: कई सार्वजनिक जगहों (जैसे पर्यटन स्थल, इवेंट्स) में उड़ान के लिए बीमा का प्रमाण मांगा जाता है।

कवरेज विकल्प (Recommended Coverage):

1️⃣ थर्ड-पार्टी देयता बीमा: कानूनी रूप से ज़रूरी (250g से ऊपर के ड्रोन के लिए)। यह किसी व्यक्ति या संपत्ति को नुकसान की स्थिति में मुआवज़ा देता है।
2️⃣ हुल कवरेज: ड्रोन के खुद के नुकसान (क्रैश, टूट-फूट, गुम होना) पर मरम्मत या रिप्लेसमेंट का खर्च कवर करता है।
3️⃣ पेलोड कवरेज: यदि आपके ड्रोन पर कैमरा या ऐक्सेसरी लगी है, तो उसके लिए अतिरिक्त सुरक्षा ली जा सकती है।

प्रमुख बीमा प्रदाता:

2025 में हॉबीस्ट ड्रोन बीमा का औसत खर्च ₹4,000 से ₹10,000 प्रति वर्ष के बीच रहता है।
Bajaj Allianz, TropoGo, और HDFC ERGO ऐसे प्लान देते हैं जो हौबी यूज़र्स के लिए सरल और बजट-फ्रेंडली हैं।

हॉबीस्ट ड्रोन बीमा प्रदाताओं की तुलना तालिका (Hobbyist Drone Insurance Providers Comparison Table)

Provider (बीमा प्रदाता)Third-Party Liability (तीसरे पक्ष की ज़िम्मेदारी)Hull Coverage (ड्रोन का खुद का नुकसान)Starting Price (शुरुआती कीमत ₹)
TropoGo✅ Yes (₹7.5 लाख तक)✅ Yes₹4,000
ICICI Lombard✅ Yes (₹7.5 लाख तक)✅ Yes₹5,000
HDFC ERGO✅ Yes (₹7.5 लाख तक)✅ Yes₹4,000

चाहे आप सिर्फ़ मज़े के लिए ड्रोन उड़ा रहे हों, एक छोटा बीमा निवेश आपको बड़ी परेशानी से बचा सकता है।
थोड़ी सी तैयारी और सही पॉलिसी से आप निश्चिंत होकर अपने शौक को सुरक्षित बना सकते हैं।

RPTOs और ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट ड्रोन बीमा (RPTO & Training Institute Drone Beema)

भारत में DGCA द्वारा मान्यता प्राप्त RPTOs (Remote Pilot Training Organisations) देशभर में बढ़ रहे हैं।
ये संस्थान ड्रोन पायलटों को ट्रेनिंग देते हैं — यानी इनके पास दर्जनों ड्रोन होते हैं और हर दिन कई फ्लाइट्स होती हैं।
इसलिए इनके लिए ड्रोन बीमा एक अनिवार्य आवश्यकता (Mandatory Requirement) बन जाती है।

मुख्य जोखिम (Key Risks for Training Institutes):

1️⃣ छात्र द्वारा की गई गलती (Student Error): प्रशिक्षण के दौरान नए पायलट से ड्रोन क्रैश होने का खतरा रहता है।
2️⃣ उच्च उड़ान आवृत्ति: रोज़ाना दर्जनों फ्लाइट्स से हार्डवेयर और बैटरी पर असर पड़ता है।
3️⃣ फ्लेट नुकसान: एक ही RPTO के पास अक्सर 10–50 ड्रोन होते हैं, जिससे समूह स्तर पर जोखिम बढ़ जाता है।
4️⃣ तीसरे पक्ष को नुकसान: ट्रेनिंग क्षेत्र में किसी व्यक्ति या संपत्ति को चोट या क्षति हो सकती है।

कवरेज विकल्प (Recommended Coverage):

  • फ्लेट बीमा (Fleet Policy): एक पॉलिसी जो एक साथ कई ड्रोन को कवर करती है। यह किफायती और प्रबंधन में आसान होती है।
  • ट्रेनिंग कवरेज: छात्र द्वारा की गई गलती या ट्रेनिंग फ्लाइट के दौरान नुकसान पर सुरक्षा देती है।
  • थर्ड-पार्टी कवरेज: कानूनी आवश्यकताओं को पूरा करता है और RPTO को दावों से सुरक्षा देता है।
  • हुल कवरेज: ड्रोन के खुद के नुकसान को कवर करता है।

प्रमुख बीमा प्रदाता:

TATA AIG और ICICI Lombard RPTOs के लिए विशेष पॉलिसी प्रदान करते हैं जिनमें छात्र त्रुटि (Student Error) और मल्टी-ड्रोन कवरेज शामिल है।
TropoGo भी “Academy Protect Plan” नाम से ट्रेनिंग संस्थानों के लिए बीमा उपलब्ध कराता है।

लाभ:

RPTOs के लिए बीमा सिर्फ़ सुरक्षा नहीं, बल्कि एक प्रोफेशनल क्रेडिबिलिटी (Professional Credibility) भी बढ़ाता है।
DGCA द्वारा मान्यता प्राप्त ट्रेनिंग सेंटरों को अब बीमा प्रमाणपत्र (Insurance Certificate) रखना अनिवार्य किया गया है, ताकि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में छात्र, संस्था और उपकरण — तीनों सुरक्षित रहें।

RPTOs और ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट ड्रोन बीमा प्रदाताओं की तुलना तालिका (RPTO & Training Institute Drone Insurance Providers Comparison Table)

Provider (बीमा प्रदाता)Third-Party Liability (तीसरे पक्ष की ज़िम्मेदारी)Hull Coverage (ड्रोन का खुद का नुकसान)Training Cover (ट्रेनिंग कवरेज)Starting Price (शुरुआती कीमत ₹)
TropoGo✅ Yes (₹7.5 लाख तक)✅ Yes✅ Yes₹10,000
TATA AIG✅ Yes (₹7.5 लाख तक)✅ Yes✅ Yes₹12,000
ICICI Lombard✅ Yes (₹7.5 लाख तक)✅ Yes✅ Yes₹10,000

ट्रेनिंग संस्थानों का बीमा लेना केवल सुरक्षा नहीं बल्कि एक कानूनी और पेशेवर आवश्यकता है।
यह संस्था को भरोसेमंद बनाता है और छात्रों को सुरक्षित प्रशिक्षण माहौल प्रदान करता है।


ड्रोन बीमा प्रीमियम पर पैसे बचाने के प्रभावी उपाय (Smart Ways to Save on Drone Beema Premium)

Money Saving on Drone Insurance

ड्रोन बीमा लेते समय हर उपयोगकर्ता की एक सामान्य चिंता होती है — “प्रीमियम इतना ज्यादा क्यों है?”
वास्तव में बीमा का खर्च ड्रोन की वैल्यू, उपयोग, जोन, और ऐड-ऑन कवरेज पर निर्भर करता है।
लेकिन अगर आप कुछ स्मार्ट रणनीतियाँ (Smart Strategies) अपनाते हैं, तो आप सालाना सैकड़ों या हज़ारों रुपए तक बचा सकते हैं —
बिना कवरेज से समझौता किए।
आइए जानते हैं ऐसे 5 असरदार और व्यावहारिक तरीके जो 2025 में हर ड्रोन यूज़र के लिए फायदेमंद हैं।

1️⃣ Pay-As-You-Fly मॉडल अपनाएँ — जितना उड़ाएँ, उतना ही भुगतान करें

अगर आप रोज़ाना उड़ान नहीं भरते, तो यह मॉडल आपके लिए सबसे फायदेमंद है।
TropoGo, Digit, और कुछ नई बीमा कंपनियाँ अब “Pay-as-you-fly” या “Usage-Based Insurance” दे रही हैं।
इसमें आप पूरे साल का एकमुश्त प्रीमियम नहीं देते, बल्कि उड़ान के घंटे या दिनों के हिसाब से भुगतान करते हैं।

उदाहरण के लिए, अगर आप केवल शूटिंग प्रोजेक्ट्स या सर्वे के लिए महीने में 3–4 दिन ड्रोन उड़ाते हैं,
तो सालाना ₹15,000–₹20,000 देने की बजाय ₹4,000–₹6,000 में ही कवरेज पा सकते हैं।
यह खासकर फ्रीलांसर पायलट, फिल्म क्रू, और कृषि सर्वे ड्रोन ऑपरेटरों के लिए बेहद लाभकारी है।

2️⃣ कई बीमा कंपनियों से कोटेशन लेकर तुलना करें

बहुत से लोग पहली ही कंपनी से पॉलिसी ले लेते हैं, लेकिन यही सबसे आम गलती होती है।
हर बीमा कंपनी का प्रीमियम स्ट्रक्चर, क्लेम सेट्लमेंट अनुपात और ऐड-ऑन प्राइस अलग होता है।
इसलिए हमेशा कम से कम 3–4 कंपनियों से कोटेशन लें — जैसे HDFC ERGO, Bajaj Allianz, TATA AIG और TropoGo।

इसके लिए Policybazaar, Coverfox या TropoGo App जैसे प्लेटफ़ॉर्म बहुत उपयोगी हैं।
तुलना करने से आप न केवल कम प्रीमियम पा सकते हैं, बल्कि बेहतर सर्विस और तेज़ क्लेम प्रोसेस भी चुन सकते हैं।

3️⃣ Comprehensive पॉलिसी लें — कई ऐड-ऑन को एक साथ कवर करें

कई बार लोग हर ऐड-ऑन (जैसे BVLOS, Night Flying, Payload) अलग-अलग लेते हैं,
जिससे कुल खर्च बढ़ जाता है।
Comprehensive Policy लेने पर ये सभी कवर एक ही प्लान में शामिल हो जाते हैं —
जिससे कुल प्रीमियम 15–25% तक सस्ता पड़ता है।

उदाहरण:
अगर आप BVLOS + Hull + Third-Party अलग-अलग खरीदेंगे, तो खर्च लगभग ₹30,000 तक होगा,
लेकिन वही कवरेज एक Comprehensive प्लान में ₹22,000–₹24,000 में मिल सकता है।

4️⃣ DGCA सर्टिफाइड पायलट बनें — सर्टिफिकेशन पर डिस्काउंट मिलता है

DGCA (Directorate General of Civil Aviation) द्वारा मान्यता प्राप्त Remote Pilot Certificate (RPC) रखने वाले पायलटों को
कई बीमा कंपनियाँ 10–20% तक छूट देती हैं।
क्योंकि सर्टिफाइड पायलट का जोखिम स्तर कम माना जाता है —
उनकी उड़ान सुरक्षित होती है, और क्लेम की संभावना घट जाती है।

यह न सिर्फ़ कानूनी रूप से आवश्यक योग्यता है,
बल्कि एक आर्थिक रूप से फायदेमंद निवेश भी है जो लंबे समय में आपका प्रीमियम घटा सकता है।

5️⃣ सुरक्षित उड़ान रिकॉर्ड रखें और क्लेम से बचें

बीमा कंपनियाँ “No Claim Bonus (NCB)” देती हैं —
अगर आपने पिछले साल कोई क्लेम नहीं किया, तो अगली बार प्रीमियम पर 10–25% तक छूट मिल सकती है।

इसके लिए कुछ सावधानियाँ अपनाएँ:

  • हर उड़ान से पहले pre-flight checklist पूरी करें।
  • Digital Sky ऐप पर सभी उड़ानें कानूनी रूप से लॉग करें।
  • सार्वजनिक जगहों या रेड जोन में उड़ान से बचें।
  • ड्रोन के फर्मवेयर और GPS हमेशा अपडेट रखें।

सुरक्षित उड़ानें न सिर्फ़ दुर्घटनाओं से बचाती हैं,
बल्कि आपकी “बीमा क्रेडिट हिस्ट्री” भी मजबूत बनाती हैं —
जिससे भविष्य में और भी सस्ते रिन्यूअल ऑफ़र मिलते हैं।

ड्रोन बीमा पर पैसे बचाना कोई जादू नहीं, बल्कि समझदारी भरा निर्णय है।
अगर आप अपनी उड़ान की आदत, जरूरत और बजट के अनुसार पॉलिसी चुनते हैं —
तो आप सुरक्षा और बचत दोनों हासिल कर सकते हैं।
थोड़ी रिसर्च, कुछ तुलना और सुरक्षित उड़ान की आदत से,
आपका ड्रोन भी रहेगा सुरक्षित और आपका बजट भी संतुलित।


ड्रोन बीमा लेते समय सामान्य गलतियाँ जिनसे बचें (Common Mistakes to Avoid While Buying Drone Beema)

ड्रोन बीमा लेते समय कई लोग जल्दबाज़ी या जानकारी की कमी के कारण ऐसी गलतियाँ कर बैठते हैं,
जो बाद में उन्हें क्लेम रिजेक्शन, जुर्माना या कानूनी परेशानी में डाल देती हैं।
अगर आप इन कुछ आम भूलों से बचते हैं, तो आपका बीमा न केवल सुरक्षित रहेगा,
बल्कि क्लेम प्रक्रिया भी आसान होगी।

1️⃣ DGCA अनुपालन का उल्लंघन करना

भारत में DGCA (Directorate General of Civil Aviation) के नियमों का पालन करना हर ड्रोन ऑपरेटर की जिम्मेदारी है।
बहुत से लोग बिना रजिस्ट्रेशन (UIN) या Digital Sky में लिंक किए ड्रोन उड़ाते हैं —
ऐसे में बीमा कंपनी अक्सर क्लेम रिजेक्ट कर देती है।
इसलिए हमेशा DGCA-अनुपालन (Compliance) पूरा करें और ड्रोन को Digital Sky प्लेटफ़ॉर्म पर पंजीकृत रखें।

2️⃣ सिर्फ सस्ती पॉलिसी देखकर खरीद लेना

कई उपयोगकर्ता केवल कम प्रीमियम देखकर पॉलिसी खरीद लेते हैं,
पर बाद में पता चलता है कि उसमें हुल या पेलोड कवरेज शामिल ही नहीं था।
इसलिए खरीदने से पहले हमेशा कवरेज, एक्सक्लूज़न और क्लेम लिमिट्स को ध्यान से पढ़ें।

3️⃣ क्लेम प्रोसेस को न समझना

हर कंपनी की क्लेम प्रक्रिया अलग होती है।
अगर प्रोसेस लंबी या पेचीदा है, तो क्लेम के समय परेशानी बढ़ सकती है।
बीमा लेने से पहले यह जांच लें कि कंपनी की कस्टमर सपोर्ट और सर्वे सिस्टम कितना तेज़ और पारदर्शी है।

4️⃣ पॉलिसी रिन्यू न कराना

बीमा तभी तक वैध है जब तक वह एक्टिव है।
अगर पॉलिसी एक्सपायर हो जाए तो किसी भी दुर्घटना की स्थिति में आपको कोई मुआवज़ा नहीं मिलेगा।
इसलिए हमेशा समय पर रिन्यूअल करें और रिमाइंडर सेट रखें।

सही कवरेज, कानूनी अनुपालन और अपडेटेड पॉलिसी रखने से आप न केवल बीमा का पूरा लाभ पा सकते हैं,
बल्कि किसी भी क्लेम या दुर्घटना की स्थिति में निश्चिंत रह सकते हैं।


ड्रोन बाज़ार का भविष्य (Market Outlook)

भारत में ड्रोन सेक्टर अब एक तेज़ी से उभरता हुआ उद्योग (Emerging Industry) बन चुका है।
सरकार के “Make in India” और “Drone Shakti Mission” जैसे अभियानों के चलते
2025 तक भारत का ड्रोन बाज़ार लगभग $4.2 बिलियन (लगभग ₹35,000 करोड़) तक पहुँचने का अनुमान है।
यही नहीं — विशेषज्ञों के अनुसार, 2030 तक यह आंकड़ा $23 बिलियन (₹1.9 लाख करोड़ से अधिक) तक जा सकता है।

इस वृद्धि के पीछे मुख्य कारण हैं —

  • कृषि, सर्वेक्षण, डिलीवरी और सुरक्षा क्षेत्रों में ड्रोन का बढ़ता उपयोग,
  • DGCA की नई नीतियाँ, जिन्होंने रजिस्ट्रेशन और उड़ान को आसान बनाया है,
  • और स्टार्टअप्स तथा MSMEs द्वारा किए जा रहे नवाचार (Innovation)।

जैसे-जैसे यह इंडस्ट्री विस्तृत हो रही है,
ड्रोन बीमा (Drone Beema) का महत्व भी उसी रफ्तार से बढ़ रहा है।
जहाँ पहले सिर्फ़ थर्ड-पार्टी कवरेज लोकप्रिय था,
अब कंपनियाँ BVLOS, Payload, Night Flying, और Medical Delivery जैसे
स्पेशल कवरेज पर फोकस कर रही हैं।

भविष्य में बीमा कंपनियाँ और अधिक कस्टमाइज़्ड (Tailor-made) पॉलिसियाँ लाने जा रही हैं,
जिनमें फ्लाइट डेटा, डिजिटल स्काई इंटीग्रेशन और AI-आधारित रिस्क असेसमेंट शामिल होगा।

भारत में ड्रोन उद्योग का भविष्य उज्ज्वल है,
और इसके साथ ड्रोन बीमा भी एक जरूरी और लगातार विकसित होती सुरक्षा कवच बनता जा रहा है।


निष्कर्ष

भारत में अब ड्रोन बीमा (Drone Beema) कोई विकल्प नहीं रहा, बल्कि हर जिम्मेदार ड्रोन ऑपरेटर के लिए यह एक जरूरी सुरक्षा कवच बन चुका है। जैसे-जैसे ड्रोन का इस्तेमाल खेती, फिल्म निर्माण, सर्वेक्षण, और डिलीवरी जैसी सेवाओं में बढ़ रहा है, वैसे-वैसे उनसे जुड़े जोखिम भी बढ़ रहे हैं — जैसे कि दुर्घटना, तकनीकी खराबी, पेलोड (Payload) का नुकसान या तीसरे पक्ष को हानि पहुँच जाना।

कम से कम थर्ड-पार्टी बीमा (Third-Party Liability) तो हर उस ड्रोन के लिए अनिवार्य है जिसका वजन 250 ग्राम से ज़्यादा है। यह न केवल कानूनी आवश्यकता है बल्कि यह किसी भी संभावित नुकसान या विवाद की स्थिति में आपको भारी आर्थिक बोझ से बचाता है।

अगर आप अपने ड्रोन का इस्तेमाल कमर्शियल (Commercial) उद्देश्यों के लिए करते हैं, तो हुल कवरेज (Hull Coverage) और पेलोड कवरेज (Payload Coverage) लेना बहुत जरूरी है — ताकि किसी भी क्रैश या उपकरण नुकसान की भरपाई हो सके।

हमेशा यह ध्यान रखें कि पॉलिसी खरीदने से पहले विभिन्न कंपनियों के कोटेशन (Quotation) ज़रूर तुलना करें। पॉलिसी की टर्म्स एंड कंडीशन्स (Terms & Conditions) ध्यान से पढ़ें और सुनिश्चित करें कि कवरेज आपकी ज़रूरत के अनुसार है।

सही ड्रोन बीमा न केवल कानूनी अनुपालन सुनिश्चित करता है बल्कि आपको मानसिक शांति, आर्थिक सुरक्षा और एक जिम्मेदार ऑपरेटर की पहचान भी देता है।


भारत में ड्रोन बीमा से सम्बंधित सामान्य प्रश्न (FAQs)

प्र:1. ड्रोन बीमा (Drone Beema) क्या होता है?
उ: ड्रोन बीमा एक ऐसी पॉलिसी होती है जो आपके ड्रोन से जुड़ी दुर्घटनाओं, नुकसान या तीसरे पक्ष के दावों से आर्थिक सुरक्षा देती है।

प्र:2. क्या भारत में ड्रोन बीमा अनिवार्य है?
उ: हाँ, भारत में 250 ग्राम से अधिक वजन वाले सभी ड्रोन के लिए थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य है।

प्र:3. 2025 में ड्रोन बीमा की औसत कीमत कितनी है?
उ: सामान्यतः ₹4,000 से ₹50,000 प्रति वर्ष तक, यह ड्रोन की वैल्यू और कवरेज पर निर्भर करता है।

प्र:4. थर्ड-पार्टी बीमा क्या कवर करता है?
उ: यह बीमा किसी तीसरे व्यक्ति या उनकी संपत्ति को हुए नुकसान या चोट की भरपाई करता है।

प्र:5. हुल कवरेज (Hull Coverage) क्या है?
उ: यह बीमा ड्रोन के खुद के नुकसान, जैसे क्रैश या टूट-फूट, की मरम्मत या बदलने का खर्च कवर करता है।

प्र:6. पेलोड कवरेज (Payload Coverage) कब जरूरी होता है?
उ: जब ड्रोन पर महँगे उपकरण जैसे कैमरा, सेंसर या स्प्रेयर लगे हों, तब यह कवरेज जरूरी होता है।

प्र:7. BVLOS कवरेज क्या है?
उ: जब ड्रोन पायलट की सीधी नजर से बाहर उड़ता है (Beyond Visual Line of Sight), उस स्थिति के लिए यह कवरेज होता है।

प्र:8. नाईट फ्लाइंग ऐड-ऑन क्यों लें?
उ: यदि आप रात में ड्रोन उड़ाते हैं, जैसे इवेंट शूटिंग या सुरक्षा निगरानी के लिए, तो यह ऐड-ऑन जरूरी है।

प्र:9. ट्रांज़िट कवरेज किस काम आता है?
उ: यह कवरेज ड्रोन को एक जगह से दूसरी जगह ले जाते समय होने वाले नुकसान से सुरक्षा देता है।

प्र:10. कौन-कौन सी कंपनियाँ भारत में ड्रोन बीमा देती हैं?
उ: प्रमुख कंपनियाँ हैं — TropoGo, HDFC ERGO, ICICI Lombard, TATA AIG और Bajaj Allianz।

प्र:11. ड्रोन बीमा लेने के लिए किन दस्तावेज़ों की जरूरत होती है?
उ: आमतौर पर UIN (Digital Sky), ड्रोन की खरीद इनवॉयस, और DGCA पायलट सर्टिफिकेट (कमर्शियल के लिए) की आवश्यकता होती है।

प्र:12. डिजिटल स्काई प्लेटफ़ॉर्म का बीमा में क्या रोल है?
उ: डिजिटल स्काई पर ड्रोन रजिस्ट्रेशन और बीमा लिंक करने से नियामक अनुपालन आसान होता है।

प्र:13. अगर ड्रोन क्रैश हो जाए तो क्लेम कैसे करें?
उ: 24 घंटे में बीमा कंपनी को सूचित करें, फोटो/वीडियो सबूत जमा करें, सर्वेयर निरीक्षण करेगा और फिर सेटलमेंट होता है।

प्र:14. क्या हॉबीस्ट (Hobbyists) को भी बीमा लेना चाहिए?
उ: हाँ, भले ही ड्रोन छोटा हो, थर्ड-पार्टी और हुल कवरेज लेना समझदारी है ताकि नुकसान की भरपाई हो सके।

प्र:15. कृषि (Kisan Drones) के लिए कौन सा बीमा बेहतर है?
उ: कृषि ड्रोन के लिए पेलोड + केमिकल लाइबिलिटी + BVLOS कवरेज वाला कम्प्रीहेन्सिव बीमा उपयुक्त है।

प्र:16. क्या DGCA सर्टिफाइड पायलट को बीमा में छूट मिलती है?
उ: हाँ, कई बीमा कंपनियाँ DGCA-सर्टिफाइड पायलटों को कम प्रीमियम देती हैं क्योंकि उनका रिस्क कम होता है।

प्र:17. ड्रोन बीमा की वैधता अवधि कितनी होती है?
उ: सामान्यतः एक वर्ष के लिए होती है, जिसके बाद इसे रिन्यू करना जरूरी है।

प्र:18. ड्रोन बीमा प्रीमियम बचाने के कुछ तरीके क्या हैं?
उ: Pay-As-You-Fly प्लान चुनें, कई कोटेशन तुलना करें, DGCA सर्टिफिकेशन लें और सुरक्षित उड़ान रिकॉर्ड बनाए रखें।

प्र:19. ड्रोन बीमा क्लेम रिजेक्ट होने के मुख्य कारण क्या हैं?
उ: देर से सूचना देना, गलत जानकारी देना या DGCA नियमों का उल्लंघन करना क्लेम रिजेक्शन के आम कारण हैं।

प्र:20. ड्रोन बीमा क्यों जरूरी है?
उ: क्योंकि यह कानूनी सुरक्षा के साथ-साथ वित्तीय नुकसान से बचाता है और आपको जिम्मेदार ऑपरेटर बनाता है।


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