ड्रोन इंश्योरेंस क्लेम कैसे करें: समझिये Drone Insurance Claim Process की पूरी प्रक्रिया- 2025

Drone Insurance Claim Process

ड्रोन(UAVs) अब सिर्फ एक तकनीकी खिलौना नहीं रहे — ये आज के समय में कृषि, फिल्म निर्माण, सर्वेक्षण, लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में बेहद जरूरी उपकरण बन चुके हैं। लेकिन जितना ड्रोन का उपयोग बढ़ा है, उतना ही दुर्घटनाओं, चोरी या नुकसान के मामले भी सामने आए हैं। ऐसे में ड्रोन इंश्योरेंस और विशेष रूप से ड्रोन इंश्योरेंस क्लेम प्रक्रिया(Drone Insurance Claim Process) को समझना हर ड्रोन ऑपरेटर के लिए बेहद ज़रूरी हो गया है।

भारत में DGCA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) ने 250 ग्राम से अधिक वजन वाले ड्रोन के लिए थर्ड पार्टी लाइबिलिटी इंश्योरेंस को अनिवार्य कर दिया है। यानी अगर आपका ड्रोन किसी तीसरे व्यक्ति या संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है, तो आपके पास बीमा होना चाहिए। इस लेख में हम आपको बताएँगे कि ड्रोन बीमा क्लेम कैसे करें (How to claim drone insurance) , किन दस्तावेजों की जरूरत होती है, और किन गलतियों से बचना चाहिए ताकि आपका क्लेम अस्वीकृत न हो।

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ड्रोन इंश्योरेंस क्लेम प्रक्रिया (Drone Insurance Claim Process) को समझें

ड्रोन इंश्योरेंस क्लेम प्रक्रिया (Drone Insurance Claim Process) एक ऐसी कानूनी और वित्तीय प्रक्रिया है जिसके माध्यम से ड्रोन ऑपरेटर किसी भी दुर्घटना, चोरी, या तीसरे पक्ष को हुए नुकसान की भरपाई के लिए बीमा कंपनी से मुआवज़ा प्राप्त कर सकते हैं। भारत में DGCA (Directorate General of Civil Aviation) ने ड्रोन नियम 2021 के तहत यह अनिवार्य किया है कि 250 ग्राम से अधिक वजन वाले ड्रोन के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस होना चाहिए।

क्लेम प्रक्रिया की शुरुआत घटना के 24 घंटे के भीतर होती है, जिसे “24-घंटे का क्लेम रिचुअल” कहा जाता है। इसमें तीन अहम कदम शामिल हैं — FIR दर्ज कराना, DGCA को Digital Sky Platform पर सूचित करना, और सभी साक्ष्य जैसे तस्वीरें, वीडियो व फ्लाइट लॉग्स को सुरक्षित रखना। इसके बाद बीमा कंपनी को सूचित कर आवश्यक दस्तावेज़ जैसे खरीद इनवॉइस, DGCA UIN, फ्लाइट लॉग, और FIR कॉपी जमा करनी होती है।

यदि सभी दस्तावेज़ सही हैं और नियमों का पालन किया गया है, तो सर्वेयर ड्रोन का निरीक्षण करता है और बीमा कंपनी मुआवज़ा स्वीकृत करती है। यह प्रक्रिया ड्रोन ऑपरेटर्स को वित्तीय सुरक्षा देती है और उनकी जिम्मेदार उड़ान संस्कृति को बढ़ावा देती है।

Drone Insurance Claim Process1

ड्रोन क्लेम प्रक्रिया कई चरणों में होती है — घटना की रिपोर्ट करने से लेकर सेटलमेंट मिलने तक। यह प्रक्रिया नियमबद्ध है और समय पर कदम उठाना बेहद महत्वपूर्ण है।

स्टेप 1- 24 घंटे का क्लेम रिचुअल

घटना के पहले 24 घंटे सबसे अहम होते हैं। इसे ही “24 घंटे का क्लेम रिचुअल” कहा जाता है। इस दौरान तीन प्रमुख कदम उठाने जरूरी हैं — FIR दर्ज कराना, DGCA को सूचित करना और सबूत सुरक्षित रखना

1. एफआईआर दर्ज कराना

अगर ड्रोन किसी की संपत्ति को नुकसान पहुंचाए, किसी को चोट लग जाए या चोरी हो जाए, तो 24 घंटे के अंदर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करें।
एफआईआर में घटना का समय, स्थान, ड्रोन का यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UIN), मॉडल और ऑपरेशन का उद्देश्य (व्यावसायिक या शौकिया) लिखें।
एफआईआर की मुहर लगी कॉपी लें — यह क्लेम प्रक्रिया में अनिवार्य दस्तावेज है।

2. DGCA को सूचित करना

DGCA के ड्रोन नियम 2021 के अनुसार, हर घटना की जानकारी 24 घंटे के भीतर डिजिटल स्काई पोर्टल पर देना आवश्यक है।
रिपोर्ट में ड्रोन का UIN, घटना का विवरण, समय और स्थान दें। साथ में फोटो, वीडियो या फ्लाइट लॉग्स भी जोड़ें।
यदि घटना किसी रेड जोन या प्रतिबंधित क्षेत्र में हुई है, तो DGCA जांच कर सकती है और नियम उल्लंघन होने पर क्लेम अस्वीकृत हो सकता है।

3. सबूत सुरक्षित रखना

सभी दृश्य और डिजिटल सबूत सुरक्षित रखें —

  • ड्रोन, दुर्घटनास्थल और हुई क्षति की हाई-रेज़ॉल्यूशन तस्वीरें और वीडियो लें।
  • कंट्रोलर या ऐप से फ्लाइट लॉग्स डाउनलोड करें।
  • गवाहों के बयान या संपर्क विवरण रखें।
  • इंश्योरर या सर्वेयर के निरीक्षण से पहले ड्रोन में कोई मरम्मत न करें।

इन तीनों कार्यों को पहले 24 घंटे में पूरा कर लेना क्लेम प्रक्रिया की सफलता की नींव रखता है।

स्टेप 2- इंश्योरेंस कंपनी को सूचना देना

24 घंटे के अंदर की औपचारिकताओं के बाद, तुरंत अपनी इंश्योरेंस कंपनी से संपर्क करें।
अधिकांश कंपनियाँ 48 से 72 घंटे के भीतर रिपोर्ट मांगती हैं।

  • कंपनी की क्लेम हेल्पलाइन या ईमेल पर संपर्क करें।
  • क्लेम फॉर्म भरें — इसमें FIR नंबर, DGCA रिपोर्ट और घटना का विवरण शामिल करें।
  • FIR, DGCA नोटिफिकेशन और तस्वीरों जैसी प्रारंभिक दस्तावेज़ जमा करें।

भारत में प्रमुख ड्रोन इंश्योरेंस कंपनियाँ जैसे ICICI Lombard, TATA AIG और TropoGo (HDFC ERGO के साथ साझेदारी में) डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आसान क्लेम सबमिशन और ट्रैकिंग की सुविधा देती हैं।

स्टेप 3- जरूरी दस्तावेज़ (Drone Damage Documents)

क्लेम के सफल होने के लिए दस्तावेज़ों की सटीकता और पूर्णता सबसे अहम है। नीचे दिए गए दस्तावेज़ अवश्य तैयार रखें:

दस्तावेज़उद्देश्य
DGCA UINड्रोन का रजिस्ट्रेशन और वैधता सिद्ध करता है
ड्रोन की खरीद रसीदड्रोन की कीमत और स्वामित्व का प्रमाण
फ्लाइट लॉग्सउड़ान की पूरी जानकारी — ऊँचाई, पथ, बैटरी स्थिति आदि
मरम्मत रसीदेंसर्वेयर की स्वीकृति के बाद रिपेयर की लागत
FIR की कॉपीघटना का आधिकारिक रिकॉर्ड
फोटो/वीडियोदृश्य सबूत
पायलट लाइसेंस या सर्टिफिकेटव्यावसायिक ऑपरेशन के लिए आवश्यक
बीमा पॉलिसी डॉक्यूमेंटकवरेज और नियमों का प्रमाण

इन सभी दस्तावेज़ों को डिजिटल रूप में संगठित रखें ताकि क्लेम सबमिशन और फॉलो-अप में समय बच सके।

स्टेप 4- सर्वेयर निरीक्षण और क्लेम प्रोसेसिंग

दस्तावेज़ जमा करने के बाद इंश्योरेंस कंपनी एक सर्वेयर भेजेगी जो नुकसान का निरीक्षण करेगा।
वह ड्रोन, फ्लाइट लॉग्स, दुर्घटना स्थल और तीसरे पक्ष को हुए नुकसान का आकलन करेगा।
रिपोर्ट तैयार होने के बाद इंश्योरर इसी आधार पर क्लेम को मंजूरी या अस्वीकृति देता है।
आमतौर पर यह प्रक्रिया 7 से 10 दिन में पूरी हो जाती है।

स्टेप 5- क्लेम स्वीकृति या अस्वीकृति

सर्वेयर की रिपोर्ट के आधार पर इंश्योरर निर्णय लेता है:

  • स्वीकृत क्लेम: इंश्योरर रिपेयर का भुगतान करता है या ड्रोन को बदलने की राशि देता है।
  • अस्वीकृत क्लेम: यदि ड्रोन बिना अनुमति वाले क्षेत्र (रेड जोन) में उड़ा, दस्तावेज अधूरे हैं, या DGCA नियमों का उल्लंघन हुआ है।

यदि क्लेम अस्वीकृत हो जाए, तो आप पुनरीक्षण या विवाद निपटान प्रक्रिया के तहत पुनः आवेदन कर सकते हैं।

स्टेप 6- क्लेम सेटलमेंट और पॉलिसी समीक्षा

क्लेम स्वीकृति के बाद इंश्योरर भुगतान जारी करता है:

  • रिपेयर रिइम्बर्समेंट — मरम्मत का खर्चा।
  • ड्रोन रिप्लेसमेंट — यदि ड्रोन पूरी तरह नष्ट हो गया हो।
  • थर्ड पार्टी क्षति भुगतान — यदि किसी तीसरे पक्ष को नुकसान पहुँचा हो।

सेटलमेंट के बाद अपनी पॉलिसी की समीक्षा करें और देखें कि आपको BVLOS (Beyond Visual Line of Sight), नाइट फ्लाइंग या पेलोड कवर जैसे ऐड-ऑन कवरेज की जरूरत है या नहीं।

क्लेम अस्वीकृति से बचने के उपाय

Avoid Claim Rejection

कई बार छोटी गलतियाँ भी क्लेम अस्वीकृति का कारण बन जाती हैं। इन गलतियों से बचें:

1. रेड जोन में उड़ान न करें

रेड जोन यानी हवाई अड्डों, सैन्य क्षेत्रों या घनी आबादी वाले इलाकों में ड्रोन उड़ाना सख्त मना है। यहां उड़ान भरने पर न केवल DGCA कार्रवाई कर सकता है, बल्कि इंश्योरर भी क्लेम को अस्वीकार कर सकता है।

2. DGCA नियमों का पालन करें

आपका ड्रोन UIN से पंजीकृत होना चाहिए, और ऑपरेटर के पास रिमोट पायलट लाइसेंस (RPL) या आवश्यक परमिट होना चाहिए। उड़ान हमेशा 400 फीट के भीतर और विजुअल लाइन ऑफ साइट (VLOS) में होनी चाहिए, जब तक कि BVLOS कवरेज न लिया गया हो।

3. दस्तावेज़ समय पर जमा करें

FIR, DGCA रिपोर्ट, फ्लाइट लॉग्स और फोटो जैसी फाइलें समय पर दें। देरी से क्लेम प्रक्रिया में रुकावट आती है।

4. लापरवाही या जानबूझकर गलती से बचें

खराब मौसम में उड़ान, बैटरी मेंटेनेंस न करना, या ड्रोन को अनुचित तरीके से उड़ाना — यह सब इंश्योरेंस क्लेम को अमान्य कर सकता है।

5. ओवर इंश्योरेंस से बचें

ड्रोन का मूल्य वास्तविक रखें। ज्यादा मूल्य दिखाने से क्लेम प्रक्रिया में विवाद हो सकता है।

6. पॉलिसी की शर्तें पढ़ें

कई बार इंश्योरेंस में wear and tear, cosmetic damage, या अवैध उड़ान कवर नहीं होती। पॉलिसी खरीदने से पहले इन्हें समझें।

ड्रोन इंश्योरेंस का महत्व

भारत में ड्रोन इंश्योरेंस दो मुख्य प्रकार का होता है:

  1. थर्ड पार्टी लाइबिलिटी कवर — यह दूसरों की संपत्ति या चोट के लिए मुआवजा देता है।
  2. हल (Hull) कवर या कॉम्प्रिहेन्सिव इंश्योरेंस — ड्रोन खुद के नुकसान, चोरी या दुर्घटना से सुरक्षा देता है।

ड्रोन महंगे होते हैं — उदाहरण के लिए DJI Mavic 3 की कीमत ₹2 लाख से अधिक है, और एक बार के क्रैश में मरम्मत का खर्च ₹50,000 से भी ज्यादा हो सकता है। ऐसे में ड्रोन बीमा वित्तीय सुरक्षा के लिए अत्यंत जरूरी है।

सही इंश्योरेंस प्रदाता कैसे चुनें

Drone Insurance Providers in India

ड्रोन बीमा लेते समय इन बातों का ध्यान रखें:

  • विश्वसनीयता और अनुभव — ऐसे इंश्योरर चुनें जिनका ड्रोन क्षेत्र में अनुभव हो।
  • कवरेज विकल्प — थर्ड पार्टी और हुल कवर दोनों शामिल हों।
  • क्लेम प्रोसेस की सरलता — डिजिटल सबमिशन और ट्रैकिंग सुविधा उपलब्ध हो।
  • ग्राहक सहायता — 24×7 सपोर्ट बेहतर माना जाता है।
  • लागत और प्रीमियम — ड्रोन के मूल्य और उपयोग के अनुसार प्रीमियम तय करें।

ड्रोन इंश्योरेंस क्लेम प्रक्रिया (Drone Insurance Claim Process) से सम्बंधित सामान्य प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: भारत में ड्रोन इंश्योरेंस क्लेम की पहली प्रक्रिया क्या है?
उत्तर: पहले 24 घंटे में FIR दर्ज करें, DGCA को सूचित करें और सबूत सुरक्षित रखें।

प्रश्न 2: क्लेम के लिए किन दस्तावेज़ों की जरूरत होती है?
उत्तर: DGCA UIN, खरीद रसीद, फ्लाइट लॉग्स, FIR कॉपी, फोटो/वीडियो, पायलट लाइसेंस और बीमा पॉलिसी दस्तावेज़।

प्रश्न 3: क्या रेड जोन में उड़ान भरने पर क्लेम किया जा सकता है?
उत्तर: नहीं, रेड जोन में उड़ान DGCA नियमों का उल्लंघन है और क्लेम अस्वीकार किया जा सकता है।

प्रश्न 4: क्लेम प्रक्रिया में कितना समय लगता है?
उत्तर: आमतौर पर 7 से 30 दिन लगते हैं, जो इंश्योरर की टर्नअराउंड टाइम (TAT) पर निर्भर करता है।

प्रश्न 5: अगर क्लेम अस्वीकृत हो जाए तो क्या करें?
उत्तर: इंश्योरर के साथ अपील या विवाद समाधान प्रक्रिया शुरू करें और अतिरिक्त साक्ष्य प्रस्तुत करें।

प्रश्न 6: क्या भारत में ड्रोन इंश्योरेंस अनिवार्य है?
उत्तर: हाँ, 250 ग्राम से अधिक वजन वाले और व्यावसायिक रूप से उपयोग किए जाने वाले ड्रोन के लिए थर्ड पार्टी बीमा अनिवार्य है।

निष्कर्ष

ड्रोन इंश्योरेंस क्लेम प्रक्रिया (Drone Insurance claim process) सुनने में भले ही जटिल लगे, लेकिन सही योजना, समय पर कार्रवाई और आवश्यक दस्तावेज़ों की तैयारी के साथ यह एक सरल और प्रभावी प्रक्रिया बन सकती है। जब भी कोई ड्रोन हादसा होता है — चाहे वह क्रैश, चोरी या तीसरे पक्ष की संपत्ति को नुकसान हो — तो शुरुआती 24 घंटे बेहद अहम होते हैं। इस अवधि में तीन सबसे महत्वपूर्ण कदम हैं: FIR दर्ज करना, DGCA को सूचित करना, और सभी साक्ष्य सुरक्षित रखना। FIR आपके क्लेम का आधिकारिक आधार बनती है, जबकि DGCA नोटिफिकेशन नियामक अनुपालन सुनिश्चित करता है। इसके अलावा, दुर्घटना स्थल की तस्वीरें, वीडियो और फ्लाइट लॉग्स जैसे साक्ष्य आपके क्लेम को मजबूत बनाते हैं।

ध्यान रहे कि ड्रोन ऑपरेटर्स को हमेशा DGCA के नियमों का पालन करना चाहिए, जैसे कि केवल ग्रीन ज़ोन में उड़ान भरना, आवश्यक लाइसेंस रखना और ड्रोन का नियमित रखरखाव करना। रेड जोन में उड़ान भरना, अधूरे या गलत दस्तावेज़ जमा करना, या रिपोर्टिंग में देरी करना क्लेम रिजेक्शन के मुख्य कारण हैं।

इसलिए, एक ज़िम्मेदार ऑपरेटर के रूप में, आपको न केवल अपने ड्रोन का ध्यान रखना है बल्कि बीमा प्रक्रिया को भी गंभीरता से लेना है। सही दस्तावेज़, पारदर्शिता और समयबद्ध कार्रवाई से न केवल आपका क्लेम स्वीकृत होगा बल्कि भविष्य में बीमा प्रीमियम और प्रोसेस भी सहज बनेंगे। इस तरह, ड्रोन इंश्योरेंस क्लेम प्रक्रिया आपके व्यवसायिक या रचनात्मक कार्यों के लिए सुरक्षा कवच की तरह कार्य करती है।

ड्रोन बीमा लें, DGCA नियमों का पालन करें और उड़ान भरें आत्मविश्वास के साथ — क्योंकि सुरक्षा ही सफलता की असली उड़ान है।


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