तेज़ी से आगे बढ़ती तकनीक के इस दौर में, भारत के रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर (Drone Insurance for Real Estate and Construction in India) में काम करने वाले प्रोफेशनल्स के लिए ड्रोन इंश्योरेंस अब अनिवार्य बन चुका है। साइट इंस्पेक्शन, एरियल मैपिंग और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग में ड्रोन जिस तरह क्रांति ला रहे हैं, उसी तरह जोखिम भी बढ़ा रहे हैं। ऐसे में भारत में कंस्ट्रक्शन ड्रोन इंश्योरेंस न केवल आपके ऑपरेशन को सुरक्षित रखता है, बल्कि बदलते नियमों के बीच निरंतरता भी सुनिश्चित करता है।
भारत के रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में ड्रोन की परिवर्तनकारी भूमिका
भारत का रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और 2025 में यह देश के GDP का लगभग 8% योगदान दे रहा है। अनुमान है कि 2030 तक यह बाजार 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का हो जाएगा। इस विकास यात्रा में ड्रोन (UAVs) एक गेम-चेंजर साबित हुए हैं।
टोपोग्राफिक सर्वे से लेकर प्रोग्रेस ट्रैकिंग तक, ड्रोन वह सटीकता, गति और लागत-कम करने की क्षमता प्रदान करते हैं जो पारंपरिक तरीकों से संभव नहीं है।
2025 में:
- भारत का ड्रोन मार्केट लगभग USD 0.47 बिलियन का है
- 2030 तक इसके USD 1.39 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है
- कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट इस वृद्धि के मुख्य चालक हैं
वैश्विक स्तर पर, कंस्ट्रक्शन ड्रोन बाजार 2025 में USD 4.6 बिलियन है, जो 2035 तक बढ़कर USD 10.3 बिलियन हो जाएगा। भारत में अभी केवल 30% कंस्ट्रक्शन कंपनियां ड्रोन का उपयोग कर रही हैं, जो बीमा कंपनियों और टेक इनोवेटर्स दोनों के लिए बड़ा अवसर है।
ड्रोन से मिलने वाले प्रमुख लाभ:
- प्रॉपर्टी लिस्टिंग के लिए हाई-रिज़ॉल्यूशन एरियल फोटोग्राफी
- वर्चुअल टूर और अर्बन प्लानिंग विज़ुअल्स
- 3D मॉडलिंग और वॉल्यूमेट्रिक डेटा
- साइट मैपिंग का समय हफ्तों से घटकर कुछ घंटों में
एक ड्रोन सर्वे लागत को 50% तक कम कर सकता है और मानवीय त्रुटियों को न्यूनतम करता है।
हालांकि, शहरी घनत्व, मौसम और एयरस्पेस नियम जैसी चुनौतियां भी हैं। यहीं पर ड्रोन इंश्योरेंस महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है — यह केवल सुरक्षा नहीं, बल्कि भरोसा भी बनाता है।
भारत में कंस्ट्रक्शन ड्रोन नियम (2025 अपडेट)
भारत में ड्रोन संचालन और उससे जुड़े नियमों की निगरानी Directorate General of Civil Aviation (DGCA) द्वारा की जाती है। DGCA नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है और देश में ड्रोन इकोसिस्टम को सुरक्षित, नियंत्रित और सुव्यवस्थित बनाने की जिम्मेदारी निभाता है। ड्रोन के बढ़ते व्यावसायिक उपयोग को देखते हुए सरकार ने Drone Rules 2021 लागू किए, जिससे पहले मौजूद जटिल और प्रतिबंधात्मक नियमों को सरल बनाया जा सके।
Drone Rules 2021 के तहत ड्रोन को वजन और उपयोग के आधार पर पांच श्रेणियों में बांटा गया है — Nano, Micro, Small, Medium और Large। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ड्रोन के आकार और जोखिम स्तर के अनुसार नियम लागू किए जा सकें। उदाहरण के लिए, नॉन-कमर्शियल Nano ड्रोन (250 ग्राम से कम) को कई अनुमतियों से छूट दी गई है, जबकि कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट जैसे कमर्शियल उपयोग वाले ड्रोन के लिए रजिस्ट्रेशन, Remote Pilot Certificate (RPC) और ऑपरेशनल मंजूरी अनिवार्य है।
2025 में पेश किया गया Draft Civil Drones Bill 2025 ड्रोन रेगुलेशन को एक नए स्तर पर ले जाता है। इस बिल का मुख्य उद्देश्य बढ़ती ड्रोन गतिविधियों के साथ-साथ सुरक्षा, प्राइवेसी और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है। अब 250 ग्राम से अधिक वजन वाले सभी ड्रोन का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन, DigitalSky प्लेटफॉर्म पर रियल-टाइम ट्रैकिंग, और जियो-फेंसिंग तकनीक का उपयोग जरूरी कर दिया गया है।
इसके अलावा, नियमों के उल्लंघन पर अब केवल जुर्माना ही नहीं, बल्कि गंभीर मामलों में 3 साल तक की सजा का भी प्रावधान रखा गया है। निर्माण स्थलों और शहरी क्षेत्रों में ड्रोन उड़ाने के लिए बीमा, थर्ड-पार्टी लायबिलिटी कवर और फ्लाइट लॉग्स का रिकॉर्ड रखना भी अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।
इस प्रकार, Drone Rules 2021 ने जहां नींव रखी, वहीं Draft Civil Drones Bill 2025 भारत में ड्रोन ऑपरेशंस को ज्यादा जवाबदेह, सुरक्षित और भविष्य के लिए तैयार बनाता है।
2025 के प्रमुख बदलाव:
- 250 ग्राम से अधिक सभी ड्रोन का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन
- BVLOS (Beyond Visual Line of Sight) ऑपरेशन की अनुमति
- DigitalSky प्लेटफॉर्म से रियल-टाइम ट्रैकिंग
- नियम उल्लंघन पर ₹50,000 जुर्माना और 3 साल तक की सज़ा
DGCA ड्रोन श्रेणियाँ (2025)
| DGCA Drone Category (2025) | Weight Range | RPC Required? | Construction/Real Estate Use |
|---|---|---|---|
| Nano | Up to 250g | No (non-commercial) | छोटे साइट्स की फोटोग्राफी |
| Micro | 250g–2kg | Yes (commercial) | साइट इंस्पेक्शन |
| Small | 2–25kg | Yes | वॉल्यूमेट्रिक सर्वे |
| Medium / Large | 25kg+ | Yes | BVLOS, मेगा प्रोजेक्ट्स |
बीमा अब अप्रत्यक्ष रूप से अनिवार्य है:
- प्रॉपर्टी डैमेज: ₹7.5 लाख (न्यूनतम)
- बॉडिली इंजरी/डेथ: अनलिमिटेड
रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन के लिए ड्रोन इंश्योरेंस क्यों जरूरी है ?

आज के समय में रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में ड्रोन का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। साइट सर्वे, प्रोग्रेस मॉनिटरिंग, एरियल फोटोग्राफी, 3D मैपिंग और वॉल्यूमेट्रिक एनालिसिस जैसे कार्य ड्रोन के बिना अधूरे से लगते हैं। हालांकि, जितने अधिक फायदे ड्रोन प्रदान करते हैं, उतने ही गंभीर जोखिम भी इनके साथ जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि ड्रोन इंश्योरेंस अब एक विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुका है।
सबसे बड़ा जोखिम इमारत से टकराने का होता है, विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में जहां ऊंची इमारतें, क्रेन, बिजली की लाइनें और अन्य संरचनाएं मौजूद होती हैं। हल्की सी तकनीकी खराबी या पायलट की गलती ड्रोन को क्षतिग्रस्त कर सकती है या आसपास की संपत्ति को नुकसान पहुंचा सकती है। इसके अलावा बैटरी फेल्योर एक आम समस्या है, खासकर लंबे सर्वे या कंस्ट्रक्शन साइट पर भारी पेलोड के साथ उड़ान के दौरान, जिससे ड्रोन अचानक गिर सकता है।
एक और गंभीर खतरा है डेटा चोरी और साइबर अटैक। रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन ड्रोन अक्सर संवेदनशील डेटा जैसे साइट प्लान, लेआउट, ब्लूप्रिंट और प्रोजेक्ट प्रगति की जानकारी रिकॉर्ड करते हैं। यदि यह डेटा गलत हाथों में चला जाए, तो कंपनी को आर्थिक और कानूनी दोनों तरह के नुकसान उठाने पड़ सकते हैं। इसके साथ ही, प्राइवेसी उल्लंघन का जोखिम भी बढ़ गया है, खासकर रिहायशी इलाकों में ड्रोन शूटिंग के दौरान, जहां थर्ड पार्टी द्वारा कानूनी शिकायत दर्ज की जा सकती है।
आंकड़े इस जरूरत को और स्पष्ट करते हैं। 2024 में वैश्विक स्तर पर ड्रोन दुर्घटनाओं में 15% की वृद्धि दर्ज की गई है। भारत जैसे घनी आबादी वाले देशों में यह जोखिम और भी अधिक है, जहां एक छोटी दुर्घटना भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।
यदि ड्रोन इंश्योरेंस न हो, तो संभावित नुकसान काफी बड़ा हो सकता है। एक प्रोफेशनल ड्रोन को बदलने में ₹2 से ₹5 लाख तक का खर्च आ सकता है। यदि ड्रोन खराब हो जाए और प्रोजेक्ट रुक जाए, तो ₹50,000 प्रति दिन या उससे अधिक का नुकसान केवल देरी की वजह से हो सकता है। इसके अलावा, थर्ड पार्टी लीगल क्लेम्स और DGCA द्वारा लगाए गए जुर्माने या पेनल्टी अलग से पड़ते हैं।
यही कारण है कि ड्रोन इंश्योरेंस बेहद महत्वपूर्ण है। यह न केवल फाइनेंशियल सुरक्षा देता है, बल्कि क्लाइंट के सामने आपकी विश्वसनीयता भी बढ़ाता है। बीमित ड्रोन ऑपरेशन DGCA नियमों के अनुरूप होते हैं, जिससे कानूनी जोखिम कम होता है और सबसे अहम बात—आपका बिज़नेस बिना रुकावट चलता रहता है। ड्रोन इंश्योरेंस वास्तव में रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच है।
आवश्यक ड्रोन इंश्योरेंस कवरेज (Site Mapping सहित)
| Coverage Type | Key Benefits | Best Use Case |
|---|---|---|
| Hull Insurance | ड्रोन रिपेयर/रिप्लेसमेंट | खराब मौसम में उड़ान |
| Third-Party Liability | प्रॉपर्टी/पब्लिक डैमेज | शहरी रियल एस्टेट शूट |
| Payload Coverage | सेंसर व कैमरा सुरक्षा | LiDAR/RTK मैपिंग |
| Cyber Liability | डेटा चोरी से सुरक्षा | साइट प्लान ट्रांसमिशन |
Site Mapping के लिए Geospatial Data Endorsement और BVLOS Rider बहुत जरूरी हैं।
भारत में कंस्ट्रक्शन ड्रोन इंश्योरेंस (विस्तृत जानकारी)

कंस्ट्रक्शन साइट्स ड्रोन के लिए स्वर्ग भी हैं और समस्या भी। ऊंचे क्रेन, लगातार चलती भारी मशीनरी और दूर-दराज़ या असमान ज़मीन ड्रोन ऑपरेशन को बेहद जोखिमभरा बना देती है। यही कारण है कि भारत में कंस्ट्रक्शन के लिए मजबूत और विशेष ड्रोन इंश्योरेंस की आवश्यकता होती है। 2025 में, दिल्ली–मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स में UAVs का उपयोग प्रोजेक्ट प्रोग्रेस ट्रैकिंग को लगभग 40% तक तेज़ बना रहा है, जिसके चलते कस्टमाइज़्ड ड्रोन इंश्योरेंस पॉलिसियों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
सामान्य कंस्ट्रक्शन ड्रोन इंश्योरेंस केवल बेसिक कवरेज तक सीमित नहीं रहता। इसमें नॉन-ओन्ड ड्रोन कवरेज (किराए पर लिए गए ड्रोन के लिए) और बिज़नेस इंटरप्शन क्लॉज भी शामिल होते हैं, जो ड्रोन क्षतिग्रस्त होने पर प्रोजेक्ट में आई देरी से होने वाले नुकसान की भरपाई करते हैं। प्रीमियम की गणना कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे उड़ान के घंटे—यदि किसी ड्रोन की सालाना उड़ान 200 घंटे से अधिक है, तो प्रीमियम लगभग 20% तक बढ़ सकता है। वहीं, जोखिम वाले क्षेत्रों जैसे तटीय इलाकों में तेज़ हवाओं के कारण प्रीमियम और अधिक होता है।
सही कवरेज चुनते समय ड्रोन की तकनीकी क्षमता और उपयोग को समझना जरूरी है। उदाहरण के लिए, DJI Matrice 300 RTK जैसे हेवी-ड्यूटी मैपिंग ड्रोन के लिए सालाना ₹20,000 से ₹30,000 तक का हुल इंश्योरेंस आवश्यक होता है, जबकि हल्के ड्रोन के लिए यह लागत लगभग ₹8,000 हो सकती है। Tata AIG जैसे इंश्योरर मॉड्यूलर प्लान ऑफर करते हैं, जिनमें कंपनियों को वाइब्रेशन-प्रोन ऑपरेशंस के लिए इक्विपमेंट ब्रेकडाउन कवरेज भी जोड़ने की सुविधा मिलती है।
वास्तविक उदाहरण के तौर पर, हैदराबाद में एक टाउनशिप प्रोजेक्ट में ड्रोन की मदद से सर्वे लागत 60% तक कम हो गई। हालांकि, एक मिड-एयर कोलिज़न के कारण संभावित ₹3 लाख के नुकसान से ड्रोन इंश्योरेंस ने प्रोजेक्ट को बचा लिया। जैसे-जैसे भारत में कंस्ट्रक्शन ड्रोन नियम सख्त होते जा रहे हैं, वैसे-वैसे बीमित ड्रोन फ्लीट कंपनियों को DGCA अनुपालन में बढ़त दिला रही है और संचालन पर रोक या सस्पेंशन के जोखिम से बचा रही है।
2025 में रियल एस्टेट ड्रोन इंश्योरेंस: नए ट्रेंड
- वर्चुअल स्टेजिंग से बिक्री 20% बढ़ी
- DPDP Act 2023 के तहत Privacy Riders
- AI-बेस्ड Dynamic Premiums (10–15% तक सस्ते)
- PropTech प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन
प्रीमियम:
- छोटे रियल एस्टेट एजेंट: ₹4,000–₹10,000
- प्रोफेशनल फ्लीट: ₹30,000+
भारत के टॉप ड्रोन इंश्योरेंस प्रोवाइडर्स (2025)
| Provider | Starting Premium (₹/Year) | Key Strength | Best For |
|---|---|---|---|
| Tata AIG | 8,000 | BVLOS व एड-ऑन | बड़े कंस्ट्रक्शन |
| ICICI Lombard | 5,000 | साइबर/प्राइवेसी | रियल एस्टेट |
| HDFC ERGO | 10,000 | फ्लीट डिस्काउंट | बिल्डर्स |
| Bajaj Allianz | 6,000 | Pay-per-flight | फ्रीलांसर |
| New India Assurance | 12,000 | सरकारी भरोसा | इंफ्रास्ट्रक्चर |
ड्रोन इंश्योरेंस प्रीमियम: लागत विवरण (2025)
| Drone Value (₹) | Basic Coverage | Advanced Coverage | Risk Factors |
|---|---|---|---|
| 1–2 लाख | 4,000–8,000 | 10,000–20,000 | कम ऊंचाई |
| 2–5 लाख | 5,000–15,000 | 25,000–40,000 | शहरी उड़ान |
| 5 लाख+ | 15,000–30,000 | 40,000–60,000 | BVLOS |
✅ Multi-year policy = 15% सस्ता
✅ Telematics = Safe flying discount
ड्रोन इंश्योरेंस क्लेम कैसे करें (2025) – विस्तृत जानकारी
2025 में ड्रोन इंश्योरेंस क्लेम प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक डिजिटल, तेज़ और पारदर्शी बना दिया गया है। DGCA के सख्त नियमों और इंश्योरेंस कंपनियों की ऑनलाइन सिस्टम के कारण यदि सही प्रक्रिया का पालन किया जाए, तो क्लेम सेटलमेंट बिना किसी अनावश्यक परेशानी के हो सकता है। नीचे दिए गए प्रत्येक चरण को विस्तार से समझना जरूरी है।
1. 24 घंटे के भीतर सूचना देना
ड्रोन से जुड़ी किसी भी दुर्घटना, क्रैश, थर्ड-पार्टी डैमेज या डेटा ब्रीच की स्थिति में सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है 24 घंटे के भीतर अपने इंश्योरेंस प्रोवाइडर को सूचना देना। यह सूचना आमतौर पर इंश्योरर के मोबाइल ऐप, वेबसाइट, हेल्पलाइन नंबर या ईमेल के माध्यम से दी जा सकती है।
देरी होने की स्थिति में क्लेम अस्वीकार भी किया जा सकता है, इसलिए समय-सीमा का विशेष ध्यान रखें। साथ ही, गंभीर घटनाओं में DGCA को भी सूचना देना अनिवार्य हो सकता है।
2. फोटो, वीडियो और DGCA रिपोर्ट जमा करना
सूचना देने के बाद अगला चरण है डॉक्यूमेंटेशन। इसमें निम्नलिखित दस्तावेज़ जमा करने होते हैं:
- दुर्घटना के स्थान की साफ फोटो और वीडियो
- क्षतिग्रस्त ड्रोन और पेलोड (कैमरा, सेंसर) की तस्वीरें
- फ्लाइट लॉग और कंट्रोल ऐप की रिकॉर्डिंग
- थर्ड पार्टी डैमेज के मामले में संबंधित व्यक्ति या संपत्ति का विवरण
- आवश्यक होने पर DGCA की घटना रिपोर्ट या नंबर
इन डॉक्यूमेंट्स से इंश्योरर यह सुनिश्चित करता है कि घटना वास्तविक है और पॉलिसी शर्तों के अंतर्गत आती है। जितनी स्पष्ट और विस्तृत जानकारी दी जाएगी, उतनी ही तेजी से क्लेम आगे बढ़ेगा।
3. सर्वेयर द्वारा मूल्यांकन
डॉक्यूमेंट सबमिट होने के बाद इंश्योरेंस कंपनी अधिकृत सर्वेयर नियुक्त करती है। सर्वेयर ड्रोन के नुकसान, दुर्घटना के कारण और जिम्मेदारी का आकलन करता है।
2025 में कई इंश्योरर छोटे नुकसान के मामलों में वर्चुअल सर्वे (वीडियो कॉल के माध्यम से) भी स्वीकार कर रहे हैं, जिससे प्रक्रिया और तेज़ हो जाती है। सामान्यतः यह मूल्यांकन 2–3 कार्य दिवसों में पूरा हो जाता है।
4. 7–14 दिनों में क्लेम सेटलमेंट
सर्वे और अनुमोदन के बाद क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया शुरू होती है।
- हल या पेलोड डैमेज क्लेम आमतौर पर 7–14 दिनों के भीतर सेटल हो जाते हैं।
- थर्ड पार्टी या लीगल क्लेम में थोड़ा अधिक समय लग सकता है क्योंकि इसमें जांच और कानूनी प्रक्रिया शामिल होती है।
क्लेम की राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है या रिपेयर/रिप्लेसमेंट के रूप में दी जाती है।
यदि ड्रोन इंश्योरेंस क्लेम सही समय पर और सही दस्तावेजों के साथ किया जाए, तो 2025 में यह एक सरल और तेज़ प्रक्रिया बन चुकी है। 24 घंटे की रिपोर्टिंग, स्पष्ट सबूत, और सर्वेयर सहयोग—इन चारों बातों पर ध्यान देने से आपका क्लेम बिना रुकावट के मंजूर हो सकता है और आपका व्यवसाय जल्दी फिर से ऑपरेशन में लौट सकता है।
वास्तविक ड्रोन इंश्योरेंस- केस स्टडी
ड्रोन इंश्योरेंस की वास्तविक उपयोगिता तब सामने आती है जब किसी अनपेक्षित घटना में यह बड़े नुकसान को रोकने में मदद करता है। नीचे दिए गए तीन केस स्टडी भारत के अलग–अलग शहरों से लिए गए उदाहरण हैं, जो दिखाते हैं कि रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में ड्रोन इंश्योरेंस किस तरह एक मजबूत सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।
केस स्टडी 1: बेंगलुरु (रियल एस्टेट प्रोजेक्ट)
बेंगलुरु में एक प्रीमियम रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के लिए ड्रोन का उपयोग एरियल फोटोग्राफी और वर्चुअल टूर बनाने के लिए किया जा रहा था। उड़ान के दौरान अचानक तेज़ हवा चलने से ड्रोन का नियंत्रण बिगड़ गया और वह पास लगे एक कमर्शियल होर्डिंग (बिलबोर्ड) से टकरा गया। इस टक्कर से थर्ड पार्टी संपत्ति को लगभग ₹2 लाख का नुकसान हुआ।
ड्रोन ऑपरेटर के पास ICICI Lombard की थर्ड-पार्टी लायबिलिटी इंश्योरेंस पॉलिसी थी। घटना की रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर की गई, आवश्यक फोटो, वीडियो और फ्लाइट लॉग सबमिट किए गए। इंश्योरर ने त्वरित जांच के बाद मात्र 48 घंटे के भीतर पूरा क्लेम सेटल कर दिया। यदि इंश्योरेंस न होता, तो ऑपरेटर को यह राशि अपनी जेब से चुकानी पड़ती, साथ ही कानूनी विवाद का जोखिम भी बना रहता।
केस स्टडी 2: गुजरात (कंस्ट्रक्शन साइट)
गुजरात में एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर ड्रोन का उपयोग साइट मैपिंग और प्रोग्रेस मॉनिटरिंग के लिए हो रहा था। उड़ान के दौरान ड्रोन की बैटरी अचानक फेल हो गई, जिससे ड्रोन सीधे कंस्ट्रक्शन साइट पर गिर गया और पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस दुर्घटना में ड्रोन और उसके सेंसर का कुल मूल्य लगभग ₹4 लाख था।
कंपनी ने HDFC ERGO की हल और पेलोड इंश्योरेंस पॉलिसी ली हुई थी। सर्वेयर जांच के बाद यह पुष्टि हुई कि दुर्घटना तकनीकी खराबी के कारण हुई थी। इंश्योरर ने ड्रोन की कुल लागत का 95% भुगतान किया, जिससे कंपनी को नया ड्रोन जल्दी खरीदने और प्रोजेक्ट को बिना ज्यादा देरी के दोबारा शुरू करने में मदद मिली। बीमा न होने पर यह नुकसान सीधे प्रोजेक्ट बजट पर भारी पड़ सकता था।
केस स्टडी 3: मुंबई (डेटा ब्रीच और साइबर जोखिम)
मुंबई में एक हाई-वैल्यू रियल एस्टेट साइट के लिए ड्रोन से विस्तृत एरियल सर्वे और 3D मॉडल तैयार किया जा रहा था। दुर्भाग्यवश, ड्रोन डेटा को ट्रांसफर करते समय साइबर ब्रीच हुआ और संवेदनशील साइट प्लान तथा ब्लूप्रिंट लीक हो गए। इस घटना के बाद प्रोजेक्ट डेवलपर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई, जिसमें ₹5 लाख तक के लीगल खर्च आने की आशंका थी।
यह ड्रोन ऑपरेशन Bajaj Allianz के साइबर लायबिलिटी राइडर के तहत कवर था। इंश्योरर ने कानूनी खर्च और डेटा ब्रीच से जुड़े दावों को कवर किया, जिससे कंपनी को बड़े वित्तीय और प्रतिष्ठात्मक नुकसान से बचाया जा सका।
इन तीनों उदाहरणों से यह साफ होता है कि ड्रोन इंश्योरेंस केवल ड्रोन टूटने तक सीमित नहीं है। यह थर्ड पार्टी डैमेज, तकनीकी फेल्योर और साइबर रिस्क जैसे खतरों से भी सुरक्षा देता है। रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में, जहां एक छोटी घटना भी लाखों के नुकसान में बदल सकती है, ड्रोन इंश्योरेंस बिज़नेस को सुरक्षित रखने का एक अनिवार्य साधन बन चुका है।
भारत में रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन के लिए ड्रोन इंश्योरेंस से जुड़े प्रश्न (FAQs On Drone Insurance for Real Estate and Construction)
Q1: भारत में रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन के लिए ड्रोन इंश्योरेंस क्या है?
उत्तर: भारत में रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन के लिए ड्रोन इंश्योरेंस एक विशेष बीमा पॉलिसी है, जो साइट मैपिंग, एरियल फोटोग्राफी, प्रोग्रेस मॉनिटरिंग जैसे कार्यों में उपयोग होने वाले ड्रोन को कवर करती है। यह ड्रोन के क्षतिग्रस्त होने, थर्ड पार्टी लायबिलिटी, पेलोड (कैमरा/सेंसर) के नुकसान और 2025 के DGCA नियमों के तहत लगने वाले दंड से सुरक्षा प्रदान करती है।
Q2: 2025 में भारत में कंस्ट्रक्शन के लिए ड्रोन इंश्योरेंस जरूरी क्यों है?
उत्तर: 2025 में भारत में ड्रोन का व्यावसायिक उपयोग तेजी से बढ़ा है और DGCA के नियम भी सख्त हो गए हैं। कंस्ट्रक्शन ड्रोन इंश्योरेंस टक्कर, बैटरी फेल्योर, डेटा ब्रीच और थर्ड पार्टी क्लेम जैसे जोखिमों से सुरक्षा देता है। औसतन एक दुर्घटना में ₹2–5 लाख तक का नुकसान हो सकता है, जिससे बचाव के लिए बीमा आवश्यक है।
Q3: 2025 में रियल एस्टेट ड्रोन इंश्योरेंस क्या-क्या कवर करता है?
उत्तर: 2025 में रियल एस्टेट ड्रोन इंश्योरेंस में ड्रोन का हुल डैमेज, थर्ड पार्टी लायबिलिटी (प्रॉपर्टी डैमेज के लिए ₹7.5 लाख तक), कैमरा व सेंसर के लिए पेलोड कवरेज, DPDP एक्ट के तहत प्राइवेसी उल्लंघन और एरियल शूट के दौरान होने वाले साइबर अटैक शामिल होते हैं।
Q4: भारत में कंस्ट्रक्शन ड्रोन नियम 2025 में इंश्योरेंस को कैसे प्रभावित करते हैं?
उत्तर: Draft Civil Drones Bill 2025 के तहत ड्रोन रजिस्ट्रेशन, कमर्शियल ड्रोन के लिए RPC और DigitalSky के जरिए रियल-टाइम ट्रैकिंग अनिवार्य है। इसके अनुरूप ड्रोन इंश्योरेंस में न्यूनतम लायबिलिटी कवरेज (₹7.5 लाख प्रॉपर्टी डैमेज और अनलिमिटेड बॉडिली इंजरी) जरूरी हो गया है, ताकि ₹50,000 तक के जुर्माने और कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।
Q5: भारत में साइट मैपिंग के लिए ड्रोन कवरेज क्या होता है?
उत्तर: साइट मैपिंग के लिए ड्रोन इंश्योरेंस में ड्रोन क्षति के लिए हुल इंश्योरेंस, LiDAR/RTK सेंसर जैसे उपकरणों के लिए पेलोड कवरेज और थर्ड पार्टी नुकसान के लिए लायबिलिटी शामिल होती है। यह 3D मॉडलिंग और वॉल्यूमेट्रिक एनालिसिस के दौरान जियोस्पेशियल डेटा के नुकसान से भी सुरक्षा देता है।
Q6: 2025 में भारत में कंस्ट्रक्शन ड्रोन इंश्योरेंस की लागत कितनी होती है?
उत्तर: 2025 में कंस्ट्रक्शन ड्रोन इंश्योरेंस का खर्च बेसिक हल और लायबिलिटी कवरेज के लिए ₹4,000 से ₹30,000 प्रतिवर्ष होता है। वहीं, पेलोड और साइबर कवरेज वाले एडवांस प्लान की लागत ₹10,000 से ₹60,000 तक हो सकती है, जो ड्रोन की कीमत और उड़ान घंटों पर निर्भर करती है।
Q7: 2025 में भारत के टॉप ड्रोन इंश्योरेंस प्रोवाइडर कौन से हैं?
उत्तर: 2025 में प्रमुख ड्रोन इंश्योरेंस प्रोवाइडर्स में Tata AIG (व्यापक एड-ऑन), ICICI Lombard (साइबर कवरेज), HDFC ERGO (फ्लीट डिस्काउंट), Bajaj Allianz (पे-पर-फ्लाइट मॉडल) और New India Assurance (DGCA अनुपालन पर केंद्रित) शामिल हैं।
Q8: रियल एस्टेट के लिए ड्रोन इंश्योरेंस के प्रमुख कवरेज कौन से हैं?
उत्तर: 2025 में रियल एस्टेट ड्रोन इंश्योरेंस में हुल इंश्योरेंस, थर्ड पार्टी लायबिलिटी, कैमरा/सेंसर के लिए पेलोड कवरेज, साइबर लायबिलिटी और DPDP एक्ट के तहत प्राइवेसी राइडर शामिल होते हैं।
Q9: 2025 में भारत में ड्रोन इंश्योरेंस क्लेम कैसे करें?
उत्तर: ड्रोन दुर्घटना होने पर 24 घंटे के भीतर इंश्योरर के ऐप या पोर्टल के माध्यम से रिपोर्ट करें। इसके बाद फ्लाइट लॉग, फोटो, वीडियो और DGCA रिपोर्ट जमा करनी होती है। सर्वे के बाद हुल क्लेम आमतौर पर 7–14 दिनों में सेटल हो जाता है।
Q10: 2025 में भारत में ड्रोन इंश्योरेंस के नए ट्रेंड क्या हैं?
उत्तर: 2025 में ड्रोन इंश्योरेंस में AI-आधारित डायनामिक प्रीमियम, सुरक्षित क्लेम के लिए ब्लॉकचेन तकनीक, सस्टेनेबल ड्रोन उपयोग पर ईको-डिस्काउंट और UTM सिस्टम के साथ इंटीग्रेटेड कंप्लायंस जैसे ट्रेंड उभर रहे हैं, जिससे प्रीमियम 10% तक कम हो सकता है।
Q11: 2025 में ड्रोन इंश्योरेंस किन जोखिमों को कवर करता है?
उत्तर: 2025 में ड्रोन इंश्योरेंस ड्रोन क्रैश, थर्ड पार्टी प्रॉपर्टी डैमेज, बॉडिली इंजरी, LiDAR जैसे पेलोड का नुकसान, डेटा ब्रीच और DGCA द्वारा लगाए गए जुर्मानों जैसे जोखिमों को कवर करता है, जहां औसतन ₹2–5 लाख तक का नुकसान हो सकता है।
Q12: साइट मैपिंग के लिए ड्रोन कवरेज भारत में कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स को कैसे फायदा देता है?
उत्तर: ड्रोन कवरेज ड्रोन क्षति, सेंसर लॉस और डेटा करप्शन से सुरक्षा देता है, जिससे 3D मॉडलिंग और वॉल्यूमेट्रिक एनालिसिस बिना रुकावट जारी रहती है। इससे 2025 में सर्वे का समय 60% तक कम हो जाता है।
Q13: क्या 2025 में भारत में ड्रोन इंश्योरेंस पर कोई छूट मिलती है?
उत्तर: हां, 2025 में भारत में ड्रोन इंश्योरेंस पर कई छूट उपलब्ध हैं, जैसे मल्टी-ईयर पॉलिसी पर 15% तक की बचत, टेलीमैटिक्स का उपयोग करने वाले सुरक्षित पायलट्स के लिए 10–15% की छूट और ग्रीन/सस्टेनेबल प्रोजेक्ट्स के लिए ईको-डिस्काउंट।
निष्कर्ष
भारत में रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन का भविष्य ड्रोन के साथ जुड़ा है। लेकिन बिना सुरक्षा यह भविष्य जोखिमों से भरा है। Drone Insurance for Real Estate and Construction sector केवल एक खर्च नहीं, बल्कि 2025 में एक स्मार्ट निवेश है।
✅ नियमों का पालन
✅ नुकसान से सुरक्षा
✅ क्लाइंट का विश्वास
✅ बिज़नेस ग्रोथ
आसमान में उड़ान भरने से पहले यह सुनिश्चित करें कि आपका ड्रोन पूरी तरह इंश्योर्ड हो। 🚀

