भारत में 2025 की Drone Insurance Subsidies से जुड़ी सभी सरकारी योजनाएँ, SMAM सहायता, DGCA नियम, राज्य सब्सिडी और किसानों व स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध लाभ की विस्तृत जानकारी हम इस पोस्ट के माध्यम से देने जा रहे हैं।
भारत का ड्रोन सेक्टर 2025 में तेज़ी से बढ़ रहा है। कृषि, लॉजिस्टिक्स, निगरानी, आपदा प्रबंधन और इंफ्रास्ट्ट्रक्चर निरीक्षण जैसे क्षेत्रों में ड्रोन का उपयोग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। 2025 में भारत का ड्रोन बाज़ार $4.2 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है और 2030 तक यह $23 बिलियन से आगे निकल सकता है। यह वृद्धि सरकार की प्रगतिशील नीतियों, तकनीकी नवाचारों और विभिन्न वित्तीय प्रोत्साहनों के कारण संभव हो रही है।
हालांकि ड्रोन संचालन से दुर्घटनाएं, चोरी, तकनीकी खराबी और तृतीय-पक्ष क्षति जैसी जोखिम जुड़े होते हैं, लेकिन सरकार के सब्सिडी कार्यक्रम और प्रोत्साहन ड्रोन खरीद को सस्ता बनाते हैं। इससे ऑपरेटर आसानी से ड्रोन इंश्योरेंस ले सकते हैं और जोखिमों से सुरक्षित रह सकते हैं।
भारत का उभरता ड्रोन उद्योग

2025 के मध्य तक भारत का ड्रोन बाजार ₹15,000 करोड़ (लगभग $1.8 बिलियन) से अधिक का हो चुका है, और वार्षिक वृद्धि दर 10–12% के आसपास बनी हुई है।
Drone Rules 2021 और उनके सिविल ड्रोन बिल 2025 अपडेट ने रजिस्ट्रेशन, उड़ान अनुमति और सुरक्षा आवश्यकताओं को सरल व आधुनिक बनाया है।
- कृषि में ड्रोन अब 1 करोड़ हेक्टेयर से अधिक भूमि पर स्प्रेइंग और मॉनिटरिंग के लिए उपयोग किए जा रहे हैं।
- ई-कॉमर्स कंपनियां बड़े पैमाने पर ड्रोन डिलीवरी के पायलट प्रोजेक्ट चला रही हैं।
- इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों ने ड्रोन की मदद से निरीक्षण लागत में 40% तक की कमी दर्ज की है।
जुलाई 2025 में केंद्र सरकार ने ₹2,000 करोड़ का नया प्रोत्साहन पैकेज लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करना है। इससे ड्रोन की कीमतें कम हुई हैं और इंश्योरेंस पर खर्च करना ऑपरेटरों के लिए आसान हो गया है।
भारत में ड्रोन इंश्योरेंस: नियम, कवरेज और आवश्यकता
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने सभी कमर्शियल ड्रोन के लिए थर्ड-पार्टी लाइबिलिटी इंश्योरेंस अनिवार्य किया है (सिवाय 250 ग्राम से कम वाले नॉन-कमर्शियल नैनो ड्रोन के)।
यह सत्यापन डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाता है।
ड्रोन इंश्योरेंस के प्रमुख प्रकार और प्रीमियम (2025)
| कवरेज प्रकार | इसमें क्या कवर होता है | सामान्य प्रीमियम (₹/वर्ष) | उपयुक्त उपयोगकर्ता |
|---|---|---|---|
| हल इंश्योरेंस | ड्रोन के बॉडी/फ्रेम को होने वाला नुकसान | 5,000 – 20,000 | सभी कमर्शियल ऑपरेटर |
| थर्ड-पार्टी लाइबिलिटी | दूसरों को हुई क्षति/चोट | 3,000 – 15,000 | DGCA अनुपालन हेतु अनिवार्य |
| पेलोड इंश्योरेंस | कैमरा, स्प्रे टैंक जैसे उपकरण | 2,000 – 10,000 | कृषि, फोटोग्राफी, सर्वेक्षण |
| चोरी/गुमशुदगी | ड्रोन चोरी या खो जाना | 1,500 – 8,000 | उच्च जोखिम वाले क्षेत्र |
| फ्लीट इंश्योरेंस | कई ड्रोन का कवरेज | 10,000+ (फ्लीट पर निर्भर) | बड़े व्यवसाय, स्टार्टअप |
भारत में ड्रोन इंश्योरेंस सब्सिडी और सरकारी प्रोत्साहन (Drone Insurance Subsidies)
हालांकि सीधी ड्रोन इंश्योरेंस सब्सिडी सीमित है, लेकिन केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाएँ ड्रोन लागत कम करके इंश्योरेंस लेना आसान करती हैं।
केंद्र सरकार की पहलें
1. NAMO Drone Didi Scheme (नमो ड्रोन दीदी योजना)
- 15,000 महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को ड्रोन प्रशिक्षण और सब्सिडी।
- 2025 में 80% तक सब्सिडी (अधिकतम ₹8 लाख)।
- अब तक 5,000+ SHGs लाभान्वित, जिनमें से 60% ने इंश्योरेंस खरीदा।
2. SMAM – Sub-Mission on Agricultural Mechanization
- कृषि ड्रोन पर 40–50% सब्सिडी, अधिकतम ₹4 लाख।
- 2025 में लगभग ₹120 करोड़ आवंटित।
ये दोनों योजनाएँ ड्रोन खरीद सस्ती बनाती हैं और बची राशि ऑपरेटर इंश्योरेंस पर खर्च कर पाते हैं।
राज्य सरकारों द्वारा ड्रोन इंश्योरेंस और सब्सिडी सहायता
2025 में कई राज्यों ने अपने स्तर पर अतिरिक्त प्रोत्साहन दिए हैं — जैसे टॉप-अप सब्सिडी, प्रशिक्षण, स्टार्टअप ग्रांट, और विशेष योजनाएँ। इससे ड्रोन अपनाने और इंश्योरेंस खरीदने दोनों में तेजी आई है।
नीचे प्रमुख राज्यों का सार शामिल है:
1. महाराष्ट्र – अग्रणी राज्य, ऊँची सब्सिडी और FPO सहायता
महाराष्ट्र, जो गन्ना, कपास और सोयाबीन जैसी विविध फसलों वाला एक प्रमुख कृषि राज्य है, खेती में ड्रोन के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ावा दे रहा है। वर्ष 2025 में राज्य सरकार कृषि और आपदा प्रबंधन में उपयोग होने वाले ड्रोन पर 50% तक की सब्सिडी (अधिकतम ₹5 लाख) प्रदान कर रही है। यह सब्सिडी अक्सर केंद्र सरकार की SMAM योजना के साथ मिलकर लागू होती है, जिससे कुल वित्तीय राहत काफी बढ़ जाती है। उदाहरण के लिए, NAMO Drone Didi योजना के तहत महाराष्ट्र की महिला स्वयं-सहायता समूहों (SHGs) को अतिरिक्त राज्य अनुदान मिलता है, जिससे कई मामलों में कुल प्रभावी सब्सिडी 85% से भी अधिक हो जाती है।
एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि किसान उत्पादक संगठन (FPOs) द्वारा ड्रोन खरीदने पर अतिरिक्त ₹1 लाख की सब्सिडी दी जाती है। यह प्रोत्साहन सामूहिक खेती करने वाले समूहों को बड़े पैमाने पर उपयोग के लिए हाई-कैपेसिटी स्प्रेइंग ड्रोन खरीदने में मदद करता है। 2025 में लगभग 2,000 किसान और FPOs इन योजनाओं से लाभान्वित हुए हैं, जिनमें से कई ने बचत को ड्रोन बीमा पर खर्च किया है।
उदाहरण के तौर पर, पुणे स्थित एक FPO ने ₹10 लाख के ड्रोन पर ₹4.5 लाख की बचत की और हर साल ₹12,000 का बीमा प्रीमियम भरकर हुल डैमेज और केमिकल लाइबिलिटी कवर प्राप्त किया—जो कि आर्द्र क्षेत्रों में उपकरण क्षरण और कीटनाशक छिड़काव से जुड़े जोखिमों के लिए आवश्यक है।
महाराष्ट्र महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ जैसी कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से प्रशिक्षण पर भी जोर दे रहा है। ये क्षेत्रीय कार्यक्रम बीमा जागरूकता मॉड्यूल शामिल करते हैं, जिनमें ऑपरेटरों को DGCA के ड्रोन बीमा मानकों, जैसे थर्ड-पार्टी लाइबिलिटी, की जानकारी दी जाती है ताकि वे नियमों का पालन करते हुए लागत लाभ प्राप्त कर सकें। राज्य के नासिक और सोलापुर जैसे जिलों में सफल ड्रोन किराया मॉडल छोटे किसानों को स्वामित्व की जरूरत के बिना तकनीक तक पहुंच प्रदान करते हैं। इससे व्यक्तिगत बीमा की आवश्यकता कम होती है, लेकिन समूह बीमा पॉलिसियों को बढ़ावा मिलता है।
कुल मिलाकर, महाराष्ट्र की इन प्रोत्साहन योजनाओं ने प्रवेश बाधा को काफी कम कर दिया है, जिससे वर्ष 2025 में 1,500 से अधिक नए ऑपरेटरों के लिए वाणिज्यिक ड्रोन बीमा अधिक व्यवहार्य हो गया है।
- कृषि और आपदा प्रबंधन ड्रोन पर 50% सब्सिडी (₹5 लाख तक)।
- NAMO Drone Didi के तहत अतिरिक्त राज्य सहायता — प्रभावी सब्सिडी 85% से अधिक।
- FPOs को अतिरिक्त ₹1 लाख।
- 2025 में 2,000+ किसान/FPOs लाभान्वित।
- कई FPOs ने बचत से ₹10–15 हजार वार्षिक इंश्योरेंस कराया।
कर्नाटक, जिसे भारत की सिलिकॉन वैली के रूप में जाना जाता है, तकनीक और कृषि को जोड़ते हुए ड्रोन उपयोग को विशेष प्रोत्साहन देता है। वर्ष 2025 में राज्य सरकार ड्रोन समाधान विकसित करने वाले स्टार्टअप्स को ₹3 लाख तक के अनुदान प्रदान कर रही है, खासकर उन कंपनियों को जो एग्री-टेक और प्रिसिजन फार्मिंग पर काम कर रही हैं। कर्नाटक स्टार्टअप पॉलिसी के तहत दिया जाने वाला यह अनुदान R&D और प्रोटोटाइप लागत को कवर करता है, जिससे स्टार्टअप्स के लिए मजबूत बीमा पॉलिसियों में निवेश करना आसान हो जाता है।
कृषि उपयोगकर्ताओं के लिए कर्नाटक SMAM योजना के साथ तालमेल रखते हुए ऑर्गेनिक किसानों को अतिरिक्त सहायता देता है, जिसके तहत टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए ड्रोन पर 60% तक की सब्सिडी उपलब्ध है। बेंगलुरु ग्रामीण और मैसूरु जैसे जिलों में, जहां कॉफी और मसाले की खेती प्रमुख है, इन प्रोत्साहनों से लगभग 1,200 किसान लाभान्वित हुए हैं। इन किसानों द्वारा की गई बचत का एक बड़ा हिस्सा अक्सर पेलोड बीमा में लगाया जाता है, जिससे क्रॉप मॉनिटरिंग में इस्तेमाल होने वाले सेंसरों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
उदाहरण के तौर पर, बेंगलुरु की एक स्टार्टअप कंपनी ने मैपिंग ड्रोन विकसित करने के लिए ₹3 लाख का अनुदान प्राप्त किया, जिससे उसके पास फ्लीट इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए ₹15,000 की राशि उपलब्ध हो गई, जो शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों में चोरी के जोखिम से कई ड्रोन को सुरक्षित करती है।
राज्य हब्बाली और बेलगावी में स्थापित ड्रोन सेवा केंद्रों (DaaS मॉडल) के माध्यम से प्रशिक्षण को भी बढ़ावा देता है, जहां बीमा से संबंधित बुनियादी जानकारी भी शामिल की जाती है। 2025 में 800 से अधिक पायलटों को प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें से कई NAMO Drone Didi योजना के तहत महिला स्वयं-सहायता समूहों से आते हैं। इससे व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा की मांग बढ़ी है। कर्नाटक का नवाचार-केंद्रित दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करता है कि भारत में वाणिज्यिक ड्रोन ऑपरेटरों के लिए ड्रोन बीमा एक मानक प्रथा बन जाए, और HDFC ERGO जैसे बीमा प्रदाताओं के साथ बल्क डील के माध्यम से प्रीमियम और भी किफायती हो गए हैं।
- ड्रोन टेक स्टार्टअप्स के लिए ₹3 लाख अनुदान।
- ऑर्गेनिक किसानों के लिए 60% सब्सिडी।
- 2025 में 800 से अधिक RPAS पायलट प्रशिक्षित, प्रशिक्षण में इंश्योरेंस मॉड्यूल भी शामिल।
- स्टार्टअप्स फ्लीट इंश्योरेंस को प्राथमिकता दे रहे हैं।
3. पंजाब – सहकारी समितियों के लिए सबसे ऊँची सब्सिडी
पंजाब, जिसे भारत का अन्न भंडार कहा जाता है, सहकारी समितियों के माध्यम से सामूहिक खेती को बढ़ावा देने के लिए ड्रोन सब्सिडी पर विशेष जोर देता है। वर्ष 2025 में राज्य सरकार इन समितियों को ड्रोन लागत का 60% सब्सिडी के रूप में प्रदान कर रही है, जिसमें कुल वितरण ₹50 करोड़ से अधिक हो चुका है। यह उच्च सब्सिडी दर, केंद्र सरकार की योजनाओं के साथ मिलकर, कई समितियों के लिए ड्रोन को लगभग निशुल्क बना देती है, जिससे वे बीमा को प्राथमिकता दे पाते हैं।
अमृतसर और लुधियाना जैसे जिलों में गेहूं और धान के किसानों के लिए ड्रोन जलभराव और कीट समस्याओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उदाहरण के तौर पर, जालंधर की एक सहकारी समिति ने ₹10 लाख के ड्रोन बेड़े पर ₹6 लाख की बचत की और ₹20,000 का निवेश कर एक व्यापक बीमा पॉलिसी ली, जिसमें पर्यावरणीय क्षति देयता भी शामिल थी—जो रासायनिक-आधारित खेती के लिए अत्यंत आवश्यक है। 1,500 से अधिक समितियाँ इन योजनाओं का लाभ उठा चुकी हैं, जिनमें से कई अपनी बचत का 10–15% हिस्सा बीमा में लगाकर DGCA के नियमों का पालन सुनिश्चित कर रही हैं।
पंजाब बागवानी क्षेत्र में उपयोग होने वाले ड्रोन के लिए भी प्रोत्साहन प्रदान करता है, खासकर उन मॉडलों के लिए जो सेंसर से लैस हों। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के माध्यम से संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में जोखिम प्रबंधन से जुड़े मॉड्यूल शामिल हैं, जो सीमा क्षेत्रों में चोरी की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए चोरी और नुकसान कवरेज को बढ़ावा देते हैं। इस समग्र दृष्टिकोण के चलते 2025 में पंजाब के 3,000 से अधिक ड्रोन ऑपरेटरों के लिए ड्रोन व्यावसायिक बीमा एक महत्वपूर्ण साधन बन गया है।
- कोऑपरेटिव सोसायटीज़ के लिए 60% सब्सिडी।
- 2025 में ₹50 करोड़ से अधिक वितरित।
- 3,000+ ऑपरेटर ड्रोन इंश्योरेंस खरीद रहे हैं।
4. मध्य प्रदेश – 2025 की सबसे व्यापक ड्रोन नीति
मध्य प्रदेश ने वर्ष 2025 में अपनी ड्रोन प्रोमोशन एंड यूज़ पॉलिसी शुरू की, जिसका लक्ष्य ₹370 करोड़ के निवेश आकर्षित करना है। इस नीति के तहत ड्रोन निर्माताओं और ऑपरेटरों को 40% कैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी (अधिकतम ₹30 करोड़) दी जाती है। यह विशेष रूप से सोयाबीन और गेहूं वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर उपयोग होने वाले कृषि ड्रोन के लिए अत्यंत उपयोगी है।
अतिरिक्त प्रोत्साहनों में शामिल हैं:
- 25% लीज़ रेंटल प्रतिपूर्ति (हर वर्ष अधिकतम ₹5 लाख),
- 100% स्टाम्प ड्यूटी रिफंड,
- टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन के लिए ₹5 लाख तक सहायता,
- R&D परियोजनाओं के लिए प्रति प्रोजेक्ट ₹2 करोड़ तक अनुदान।
2025 में लगभग 500 ऑपरेटर इन लाभों का उपयोग कर चुके हैं। इनमें से भोपाल की एक कंपनी ने सेटअप लागत में ₹10 करोड़ की बचत की और ₹50,000 को मेगा-फ्लीट इंश्योरेंस में निवेश किया।
यह नीति शैक्षणिक संस्थानों को भी समर्थन देती है, जहाँ ड्रोन पाठ्यक्रमों के लिए 50% CAPEX सब्सिडी (अधिकतम ₹25 लाख) प्रदान की जाती है। इससे प्रशिक्षित पायलट तैयार होते हैं, जिन्हें बीमा की आवश्यकताओं की बेहतर समझ होती है। भूमि आवंटन और ड्रोन डेटा रिपॉजिटरी जैसे गैर-आर्थिक लाभ संचालन में सुधार करते हैं, जिससे जोखिम आकलन बेहतर होने पर प्रीमियम परोक्ष रूप से कम हो जाता है।
इन सब प्रावधानों के साथ मध्य प्रदेश तेजी से एक ड्रोन हब के रूप में उभर रहा है, जहाँ 2025 में 2,000+ उपयोगकर्ताओं के लिए वाणिज्यिक ड्रोन बीमा और अधिक किफायती हो गया है।
- 40% पूंजी सब्सिडी (₹30 करोड़ तक) — निर्माण इकाइयों व बड़े ऑपरेटरों के लिए।
- लीज़ रेंटल रिइम्बर्समेंट, स्टाम्प ड्यूटी माफ़ी, R&D के लिए ₹2 करोड़ तक सहायता।
- 500+ कंपनियाँ लाभान्वित।
5. तमिलनाडु – मुफ्त प्रशिक्षण और CHC रेंटल मॉडल
तमिलनाडु 100% निःशुल्क ड्रोन प्रशिक्षण और प्रभावी रेंटल मॉडल के माध्यम से किसानों के लिए ड्रोन तकनीक को अधिक सुलभ बनाने पर ध्यान देता है। वर्ष 2025 में राज्य SMAM योजना के तहत अतिरिक्त सब्सिडी प्रदान कर रहा है, जिससे धान के खेतों और नारियल बागानों में कार्यरत FPOs को 70% तक की सहायता मिलती है।
कोयंबतूर और मदुरै में किराये पर मिलने वाले कस्टम हायरिंग सेंटर्स (CHCs) प्रति एकड़ ₹150 से ₹300 तक शुल्क लेते हैं, और सब्सिडी के कारण यह लागत किसानों के लिए काफी कम हो जाती है। एक किसान यदि किराये की सेवाओं पर ₹4 लाख की बचत करता है, तो वह आसानी से ₹10,000 का लाइबिलिटी बीमा वहन कर सकता है। 1,800 से अधिक किसानों ने इन सुविधाओं का लाभ उठाया है, और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शहरी क्षेत्रों के पास स्थित खेतों के लिए प्राइवेसी ऐड-ऑन कवरेज पर विशेष जोर दिया जाता है।
तमिलनाडु के ग्रीन-प्रमाणित ड्रोन हेतु दिए जाने वाले प्रोत्साहन सुरक्षा-आधारित छूट (सेफ्टी डिस्काउंट) के माध्यम से बीमा प्रीमियम को कम करते हैं। इससे NAMO Drone Didi योजना के तहत 1,200 स्वयं-सहायता समूहों (SHGs) को लाभ मिला है।
- FPOs के लिए 70% सब्सिडी।
- किराए पर ड्रोन उपलब्ध – ₹150–300 प्रति एकड़।
- बचत से किसान आसानी से इंश्योरेंस खरीद रहे हैं।
अन्य राज्य
| राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | प्रमुख प्रोत्साहन |
|---|---|
| आंध्र प्रदेश | 50% टॉप-अप, आपदा प्रबंधन ड्रोन हेतु अनुदान |
| गुजरात | 50% कृषि ड्रोन सब्सिडी, स्टार्टअप ग्रांट |
| उत्तर प्रदेश | 50% सब्सिडी, 2,500+ SHGs को समर्थन |
| तेलंगाना | 60% सब्सिडी, स्टार्टअप प्रोत्साहन |
| केरल | 50% सब्सिडी, पर्यावरणीय ड्रोन पर विशेष छूट |
| राजस्थान | 55% जल निगरानी ड्रोन सब्सिडी |
| हरियाणा | 60% सब्सिडी (सहकारी समितियों में) |
| बंगाल | 50% आपदा/बाढ़ प्रबंधन ड्रोन सहायता |
| बिहार | छोटे किसानों को ₹2 लाख अनुदान |
| ओडिशा | 70% सब्सिडी CHC मॉडल में |
| जम्मू-कश्मीर | 50% सेब बागानों हेतु ड्रोन सब्सिडी |
| दिल्ली | मैपिंग ड्रोन हेतु ₹2 लाख तक |
| पुडुचेरी | 45% तटीय कृषि सहायता |
केंद्र सरकार की प्रमुख ड्रोन योजनाएँ
1. PLI Scheme for Drones (2025 विस्तार)
- कुल प्रोत्साहन: ₹2,000 करोड़
- स्थानीय उत्पादन पर 4–7% इंसेंटिव
- निर्माण लागत 15–20% कम — इंश्योरेंस के लिए बजट बचता है।
2. Drone Shakti Program
- DaaS स्टार्टअप्स को ₹10 लाख तक ग्रांट।
- 2025 में 500 स्टार्टअप्स लाभान्वित।
3. GST और आयात शुल्क राहत
- 2025 में ड्रोन पर GST घटकर 12%।
- बैटरी, सेंसर आदि पर आयात शुल्क माफी।
- ड्रोन 10–15% सस्ते हुए — बचत इंश्योरेंस पर खर्च की जा रही है।
प्रोत्साहन योजनाओं का सार
| योजना | लाभ | पात्रता | इंश्योरेंस पर प्रभाव |
|---|---|---|---|
| NAMO Drone Didi | 80% सब्सिडी | महिला SHGs | बचत से इंश्योरेंस लेना आसान |
| SMAM | 40–50% सब्सिडी | किसान | हुल + केमिकल लाइबिलिटी कवर |
| PLI | 4–7% प्रोत्साहन | निर्माता | सस्ते ड्रोन → सस्ता इंश्योरेंस |
| Drone Shakti | ₹10 लाख अनुदान | ड्रोन स्टार्टअप | अनिवार्य इंश्योरेंस खरीद आसान |
| GST कटौती | 12% GST | सभी ऑपरेटर | लागत में बचत |
उदाहरण: कैसे सब्सिडी ने करोड़ों बचाए
नीचे दिए गए वास्तविक उदाहरण इन पहलों के प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
केस स्टडी 1: उत्तर प्रदेश की महिला-नेतृत्व वाली कृषि सहकारी समिति
NAMO Drone Didi योजना के तहत एक महिला स्वयं-सहायता समूह ने ₹10 लाख का स्प्रेइंग ड्रोन खरीदा, जिस पर ₹8 लाख की सब्सिडी मिली। सहकारी समिति ने हुल, केमिकल लाइबिलिटी और पेलोड कवरेज सहित एक व्यापक बीमा पॉलिसी के लिए हर वर्ष ₹15,000 आवंटित किए। 2025 में एक दुर्घटना में ड्रोन का स्प्रेयर क्षतिग्रस्त हो गया, लेकिन बीमा ने ₹1.2 लाख की मरम्मत लागत को कवर किया, जिससे समूह वित्तीय संकट से बच गया। सब्सिडी ने बीमा अपनाने को संभव बनाया, जिससे संचालन रुकने से होने वाले लगभग ₹3 लाख के नुकसान को रोका जा सका।
केस स्टडी 2: बेंगलुरु स्थित ड्रोन स्टार्टअप
कर्नाटक की एक स्टार्टअप कंपनी को मैपिंग ड्रोन विकसित करने के लिए ₹3 लाख का Drone Shakti अनुदान मिला। इस अनुदान ने प्रोटोटाइप लागत को कवर कर लिया, जिससे स्टार्टअप ₹12,000 की बीमा पॉलिसी ले सका, जिसमें लाइबिलिटी और डेटा लॉस का कवरेज शामिल था। सर्वेक्षण के दौरान एक दुर्घटना में ड्रोन को ₹80,000 का नुकसान हुआ, जिसे बीमा ने पूरी तरह कवर किया। स्टार्टअप ने ₹5 लाख मूल्य के अपने क्लाइंट अनुबंध सुरक्षित रखे, जिससे यह साबित हुआ कि सरकारी प्रोत्साहन बीमा अपनाने को बढ़ावा देते हैं।
केस स्टडी 3: पंजाब का एक किसान
पंजाब के एक किसान को कृषि ड्रोन खरीदने के लिए ₹4 लाख की SMAM सब्सिडी मिली। बचत राशि से उसने ₹10,000 की हुल और केमिकल लाइबिलिटी कवरेज वाली पॉलिसी ली। जब ड्रोन तकनीकी खराबी से प्रभावित हुआ, तो बीमा ने ₹1.5 लाख की मरम्मत लागत का भुगतान किया, जिससे छिड़काव में देरी से होने वाले लगभग ₹2 लाख के नुकसान से किसान बच गया। सब्सिडी ने बीमा को किफायती बनाया और संचालन की निरंतरता सुनिश्चित की।
केस स्टडी 4: मुंबई की एक लॉजिस्टिक्स कंपनी
एक लॉजिस्टिक्स फर्म ने 12% GST और ड्यूटी छूट का लाभ उठाकर एक डिलीवरी ड्रोन पर ₹60,000 की बचत की। उन्होंने चोरी और लाइबिलिटी कवरेज वाली ₹15,000 की बीमा पॉलिसी खरीदी। जब उनका एक ड्रोन चोरी हो गया, तो बीमा ने ₹1.8 लाख की भरपाई की, जिससे डिलीवरी बाधित होने से होने वाले लगभग ₹4 लाख के संभावित नुकसान को टाला जा सका।
ये सभी उदाहरण दिखाते हैं कि कैसे वर्ष 2025 की सरकारी ड्रोन प्रोत्साहन योजनाएँ लागत कम करती हैं, जिससे ऑपरेटर बीमा वहन कर पाते हैं और किसी भी हादसे के समय 5–10 गुना तक बचत कर लेते हैं।
ड्रोन सब्सिडी और इंश्योरेंस कैसे प्राप्त करें?
- पात्रता जांचें:
- SHGs, किसान, स्टार्टअप, निर्माता आदि।
- ऑनलाइन आवेदन:
- Digital Sky, राज्य कृषि विभाग, या पंजीकृत बीमा कंपनियाँ।
- जरूरी दस्तावेज:
- आधार, PAN, UIN, RPC, व्यापार/SHG प्रमाण।
- उपयुक्त इंश्योरेंस चुनें:
- Tata AIG, HDFC ERGO, ICICI Lombard आदि ड्रोन-विशिष्ट पॉलिसी देते हैं।
ड्रोन इंश्योरेंस और प्रोत्साहनों का भविष्य (2030 तक)
- AI आधारित जोखिम मूल्यांकन
- ऑटोमैटिक पेआउट वाली पैरामीट्रिक पॉलिसी
- GPS आधारित टेलीमैटिक्स छूट
- ब्लॉकचेन आधारित क्लेम प्रोसेस
- सभी कमर्शियल ड्रोन पर व्यापक कवर अनिवार्य होने की संभावना
ड्रोन इंश्योरेंस सब्सिडी और सरकारी प्रोत्साहन पर पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न (FAQs)
Q1: सरकार द्वारा 2025 में ड्रोन बीमा पर कौन-कौन सी सब्सिडी उपलब्ध हैं?
Ans: 2025 में भारत सरकार कृषि ड्रोन के लिए सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (SMAM) के अंतर्गत बीमा प्रीमियम पर आंशिक सब्सिडी प्रदान करती है। इससे किसानों और ड्रोन सेवा प्रदाताओं की कुल बीमा लागत कम हो जाती है।
Q2: 2025 में कौन-सी सरकारी योजनाएँ किसानों के ड्रोन बीमा खर्च को कवर करती हैं?
Ans: PM-किसान ड्रोन योजना और नम्मो ड्रोन दीदी योजना के अंतर्गत ड्रोन उपयोग करने वाले किसानों को बीमा प्रीमियम सब्सिडी और वित्तीय सहायता मिलती है, जिससे थर्ड-पार्टी दायित्व और उपकरण क्षति से सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
Q3: क्या कृषि क्षेत्र के बाहर के वाणिज्यिक ड्रोन ऑपरेटर भी बीमा सब्सिडी के पात्र हैं?
Ans: हाँ। 2025 में मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया पहलों के तहत लॉजिस्टिक्स, डिलीवरी और इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग जैसे क्षेत्रों में DGCA-प्रमाणित ड्रोन ऑपरेटरों को भी सब्सिडी का लाभ मिलता है।
Q4: 2025 में ड्रोन बीमा प्रीमियम पर कितनी सब्सिडी मिलती है?
Ans: कृषि ड्रोन पर प्रीमियम का 80% तक और लॉजिस्टिक्स, माइनिंग तथा सर्वेक्षण जैसे क्षेत्रों में वाणिज्यिक ड्रोन के लिए 30–50% तक सब्सिडी उपलब्ध है।
Q5: क्या ड्रोन के लिए PLI योजना में बीमा सहायता भी शामिल है?
Ans: परोक्ष रूप से हाँ। PLI योजना मुख्य रूप से ड्रोन निर्माण को प्रोत्साहित करती है, लेकिन 2025 में इसमें उन निर्माताओं के लिए प्रोत्साहन भी शामिल है जो अपने ड्रोन के साथ सस्ती बीमा योजनाएँ भी प्रदान करते हैं।
Q6: ड्रोन बीमा प्रोत्साहनों में DGCA की क्या भूमिका है?
Ans: DGCA, ड्रोन नियम 2021 के तहत थर्ड-पार्टी देयता बीमा को अनिवार्य बनाता है। 2025 में DGCA बीमा कंपनियों के साथ मिलकर सब्सिडी वाली योजनाओं को विनियमित करता है और डिजिटल स्काई प्लेटफ़ॉर्म पर डिजिटल बीमा रिकॉर्ड के माध्यम से अनुपालन सुनिश्चित करता है।
Q7: क्या नम्मो ड्रोन दीदी योजना के तहत महिला SHG को बीमा सब्सिडी मिलती है?
Ans: हाँ। इस योजना के तहत ड्रोन संचालित करने वाली महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) को पहले वर्ष में 100% बीमा प्रीमियम सहायता और अगले वर्षों में रियायती प्रीमियम मिलता है।
Q8: क्या 2025 में ड्रोन बीमा करवाने पर व्यवसायों को कर लाभ मिलता है?
Ans: हाँ। वाणिज्यिक ड्रोन ऑपरेटरों द्वारा भुगतान किया गया बीमा प्रीमियम आयकर अधिनियम के तहत व्यवसायिक खर्च माना जाता है, जिससे कर योग्य आय कम होती है।
Q9: क्या सरकारी प्रोत्साहन केवल देयता बीमा को कवर करते हैं या हुल (ड्रोन क्षति) बीमा को भी?
Ans: 2025 में सब्सिडी थर्ड-पार्टी देयता बीमा (अनिवार्य) और हुल बीमा (ड्रोन क्षति/चोरी) दोनों को कवर करती है, विशेषकर कृषि और लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों के लिए।
Q10: 2025 में राज्य सरकारें ड्रोन बीमा के लिए क्या सहायता प्रदान करती हैं?
Ans: मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सहित कई राज्य किसानों और सहकारी समितियों को वितरित किए गए कृषि ड्रोन के बीमा प्रीमियम पर अतिरिक्त राज्य-स्तरीय सब्सिडी प्रदान करते हैं।
Q11: क्या भारत में डिलीवरी स्टार्ट-अप्स को भी ड्रोन बीमा सब्सिडी मिलती है?
Ans: हाँ। ड्रोन डिलीवरी सेवाओं वाले स्टार्ट-अप्स स्टार्ट-अप इंडिया प्रोत्साहनों के तहत रियायती बीमा प्रीमियम पा सकते हैं और इसे सेक्टर-विशिष्ट योजनाओं जैसे कृषि-लॉजिस्टिक्स सब्सिडी के साथ भी जोड़ सकते हैं।
Q12: छोटे ड्रोन ऑपरेटरों के लिए सरकार के प्रोत्साहन प्रवेश बाधाएँ कैसे कम करते हैं?
Ans: प्रीमियम सब्सिडी और बीमा से जुड़े सॉफ्ट लोन के माध्यम से सरकार अग्रिम जोखिम और लागत को कम करती है, जिससे छोटे किसान, SHG और MSME बिना बड़े दायित्व भय के ड्रोन अपना सकते हैं।
Q13: क्या 2025 में ड्रोन प्रशिक्षण कार्यक्रम बीमा सब्सिडी से जुड़े हुए हैं?
Ans: हाँ। DGCA-स्वीकृत ड्रोन पायलट प्रशिक्षण पूरा करने वाले ऑपरेटरों को अधिक बीमा सब्सिडी मिलती है, क्योंकि प्रशिक्षित पायलट से जोखिम और दावे कम होते हैं।
Q14: क्या 2025 में साइबर जोखिम बीमा भी प्रोत्साहनों में शामिल है?
Ans: 2025 में कुछ बीमा उत्पाद GPS स्पूफिंग या हैकिंग जैसे साइबर जोखिम ऐड-ऑन भी प्रदान करते हैं। यद्यपि सब्सिडी मुख्य रूप से देयता और हुल बीमा को कवर करती है, उच्च-मूल्य संचालन के लिए साइबर जोखिम सहायता का परीक्षण जारी है।
Q15: 2025 में ऑपरेटर ड्रोन बीमा सब्सिडी के लिए कैसे आवेदन कर सकते हैं?
Ans: आवेदन डिजिटल स्काई प्लेटफ़ॉर्म, राज्य कृषि विभागों, या NABARD, PSU बैंकों और सहकारी समितियों से जुड़े नामित बीमा प्रदाताओं के माध्यम से किया जा सकता है, जो प्रीमियम सब्सिडी वितरण की सुविधा प्रदान करते हैं।
निष्कर्ष: हमेशा सुरक्षित तरीके से उड़ान भरें
2025 में भारत सरकार की विविध सब्सिडियों, प्रोत्साहनों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों ने ड्रोन उद्योग को नई ऊँचाइयों पर पहुंचा दिया है। ड्रोन खरीद पर भारी सब्सिडी के कारण ऑपरेटर अब आसानी से व्यापक ड्रोन इंश्योरेंस ले पा रहे हैं, जिससे दुर्घटना के समय लाखों की बचत होती है।
अगर आप ड्रोन चलाते हैं, किराए पर देते हैं या खरीदने की सोच रहे हैं—तो यह सही समय है कि आप सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं और अपने ऑपरेशन को पूरी सुरक्षा के साथ आगे बढ़ाएं।

