भारतीय ड्रोन बाजार (Indian Drone Market) अब केवल एक नई तकनीक नहीं रहा, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा इंजन बनता जा रहा है। जहां कुछ साल पहले ड्रोन को सिर्फ कैमरे या शौक की चीज़ माना जाता था, वहीं आज यह खेती, रक्षा, लॉजिस्टिक्स, पर्यावरण और आपदा प्रबंधन जैसे कई क्षेत्रों में इस्तेमाल हो रहे हैं।
वर्ष 2025 में भारतीय ड्रोन बाजार (Indian Drone Market) का अनुमानित मूल्य 0.47 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹39,000 करोड़) है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही गति बनी रही, तो 2030 तक यह बाजार तीन गुना होकर 1.39 अरब डॉलर तक पहुँच जाएगा। यानी आने वाले पाँच वर्षों में लगभग 24% की वार्षिक वृद्धि (CAGR) दर्ज की जाएगी।
क्यों बढ़ रहा है भारत का ड्रोन बाजार?
भारतीय ड्रोन बाजार (Indian Drone Market) तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि सरकार ने इस क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए कई नीतिगत सुधार किए हैं, जैसे PLI योजना, ड्रोन नियम 2021, और सब्सिडी आधारित कृषि योजनाएँ। इसके साथ ही, रक्षा, कृषि, सर्वेक्षण, और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में ड्रोन की मांग तेजी से बढ़ी है। सस्ती तकनीक, स्थानीय उत्पादन, और स्टार्टअप्स के नवाचारों ने ड्रोन को आम लोगों और व्यवसायों तक पहुंचाया है। यही कारण है कि 2025 से 2030 के बीच यह बाजार 24% की वार्षिक दर से बढ़ने की उम्मीद है।
भारतीय ड्रोन उद्योग की तेज़ प्रगति के पीछे के महत्वपूर्ण कारण हैं —
1️⃣ सरकारी समर्थन और नीतियाँ
भारत सरकार ने ड्रोन निर्माण को बढ़ावा देने के लिए Production Linked Incentive (PLI) योजना शुरू की। इस योजना के तहत अब तक 120 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि दी जा चुकी है। इससे भारतीय कंपनियाँ आत्मनिर्भर बन रही हैं और ड्रोन आयात पर निर्भरता 80% से घटकर लगभग 40% रह गई है।
2️⃣ नए नियम और आसान लाइसेंसिंग
पहले ड्रोन उड़ाने के लिए कई तरह की अनुमतियाँ लेनी पड़ती थीं। अब DGCA और DigitalSky Portal के ज़रिए ग्रीन, येलो और रेड ज़ोन की प्रणाली से यह प्रक्रिया बहुत आसान हो गई है।
अब ड्रोन सिर्फ कैमरे तक सीमित नहीं हैं — इनमें AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता), सौर ऊर्जा, और 5G कनेक्टिविटी जैसी आधुनिक तकनीकें जुड़ गई हैं। ये ड्रोन खुद तय कर सकते हैं कि कहाँ उड़ना है और क्या डेटा इकट्ठा करना है।
4️⃣ स्टार्टअप्स का बढ़ता योगदान
2025 तक भारत में 500 से अधिक ड्रोन स्टार्टअप्स पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें से कई कंपनियाँ अपने-अपने क्षेत्र में अनोखे प्रयोग कर रही हैं — जैसे खेती, रक्षा और मेडिकल डिलीवरी में।
📊 भारतीय ड्रोन बाजार की वृद्धि (2025–2030)

| वर्ष | बाज़ार मूल्य (अमेरिकी डॉलर में) | साल-दर-साल वृद्धि (%) | मुख्य कारण |
|---|---|---|---|
| 2025 | 0.47 अरब | – | PLI योजना, कृषि सब्सिडी |
| 2026 | 0.58 अरब | 23.4% | रक्षा अनुबंधों में बढ़ोतरी |
| 2027 | 0.72 अरब | 24.1% | लॉजिस्टिक्स में ड्रोन प्रयोग |
| 2028 | 0.89 अरब | 23.6% | ASEAN देशों को निर्यात |
| 2029 | 1.10 अरब | 23.6% | AI और स्वचालन की प्रगति |
| 2030 | 1.39 अरब | 26.4% | पूर्ण व्यावसायिक उपयोग |
डेटा स्रोत: IBEF, Invest India, MarketsandMarkets, Drone Federation of India
जहाँ ड्रोन कर रहे हैं सबसे ज़्यादा बदलाव
भारत में ड्रोन अब केवल आसमान में उड़ने वाले गैजेट नहीं रहे, बल्कि यह उन क्षेत्रों में वास्तविक परिवर्तन ला रहे हैं जहाँ पहले तकनीक की पहुँच सीमित थी। सबसे बड़ा असर कृषि क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। भारत की लगभग 58% आबादी खेती पर निर्भर है, और ड्रोन इस पारंपरिक प्रणाली में आधुनिक क्रांति ला रहे हैं। आज किसान ड्रोन की मदद से कीटनाशक छिड़काव, फसल की सेहत का विश्लेषण, और मिट्टी की नमी का आकलन कर पा रहे हैं। इससे न सिर्फ समय की बचत होती है, बल्कि उत्पादन में भी 20–25% तक की बढ़ोतरी देखी गई है।
दूसरा बड़ा क्षेत्र है रक्षा और सुरक्षा। सीमा क्षेत्रों में निगरानी के लिए भारतीय सेना अब स्वदेशी ड्रोन जैसे SWITCH UAV और Rustom-2 का उपयोग कर रही है। इनसे दूरदराज़ इलाकों में गश्त करना आसान हुआ है और सैनिकों की सुरक्षा भी बढ़ी है।
लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स में भी ड्रोन का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। बड़े शहरों के साथ-साथ अब छोटे कस्बों में भी दवाओं, खाद्य सामग्री और दस्तावेज़ों की डिलीवरी ड्रोन के ज़रिए की जा रही है।
इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर, खनन और पर्यावरण निगरानी में भी ड्रोन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सड़क निर्माण, नदियों की मैपिंग और प्रदूषण मापने जैसे कार्य अब ज़्यादा सटीक और तेज़ी से हो पा रहे हैं।
| क्षेत्र | 2025 में बाजार हिस्सा (%) | 2030 का अनुमानित मूल्य (अरब डॉलर) | मुख्य उपयोग |
|---|---|---|---|
| कृषि | 45 | 0.63 | खेतों में स्प्रेइंग, बीज बोना, फसल विश्लेषण |
| रक्षा | 30 | 0.42 | निगरानी, सीमा सुरक्षा, टोही मिशन |
| लॉजिस्टिक्स | 15 | 0.21 | ई-कॉमर्स और मेडिकल सप्लाई डिलीवरी |
| इंफ्रास्ट्रक्चर | 7 | 0.10 | निर्माण और स्मार्ट सिटी मैपिंग |
| अन्य (खनन, पर्यावरण) | 3 | 0.04 | प्रदूषण मॉनिटरिंग, भू-सर्वेक्षण |
ड्रोन का सबसे बड़ा असर कृषि क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। ड्रोन के व्यापक उपयोग ने किसानों के जीवन में बड़ी क्रांति ला दी है। पहले किसान खेतों में कीटनाशक या उर्वरक का छिड़काव हाथ से करते थे, जिससे समय, श्रम और लागत — तीनों अधिक लगते थे। लेकिन अब कृषि ड्रोन इस पूरी प्रक्रिया को स्वचालित बना रहे हैं। एक आधुनिक ड्रोन मात्र 10 से 15 मिनट में एक एकड़ खेत में समान रूप से स्प्रे कर सकता है, जिससे किसान की मेहनत और खर्च दोनों घटते हैं।
ड्रोन कैमरों और सेंसरों से लैस होते हैं जो फसल की स्थिति, नमी, और रोगों का सटीक विश्लेषण करते हैं। इन आंकड़ों के आधार पर किसान तय कर सकते हैं कि किस हिस्से में ज्यादा पानी या खाद की जरूरत है। इससे उत्पादन में 20–30% की वृद्धि और कीटनाशक के उपयोग में 30% तक की कमी संभव हुई है।
सरकार भी इस बदलाव में सक्रिय है — “नमो ड्रोन दीदी योजना” जैसी पहल के ज़रिए महिलाओं को ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण और 80% तक की सब्सिडी दी जा रही है। इससे न केवल खेती आसान हो रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खुल रहे हैं।
सच्चे अर्थों में कहा जाए तो, ड्रोन ने खेती को पारंपरिक मेहनत से निकालकर डेटा-आधारित स्मार्ट फार्मिंग में बदल दिया है — जिससे किसान अब सिर्फ मेहनतकश नहीं, बल्कि तकनीकी उद्यमी बन रहे हैं। उदाहरण के लिए —
- पंजाब में ड्रोन से स्प्रे करने से कीटनाशक उपयोग में 30% कमी आई है।
- किसानों की लागत में प्रति एकड़ ₹5000 तक की बचत हुई है।
भारत की अग्रणी ड्रोन कंपनियाँ (2025)
वर्ष 2025 तक भारत का ड्रोन उद्योग दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक बन गया है। इस बदलाव के केंद्र में हैं वे भारतीय ड्रोन कंपनियाँ, जिन्होंने न केवल तकनीकी नवाचार किया है, बल्कि “मेक इन इंडिया” को भी नई उड़ान दी है।
सबसे आगे है IdeaForge Technology, जिसने भारत के पहले स्वदेशी सर्विलांस ड्रोन विकसित किए हैं। इसका “SWITCH UAV” और “NETRA V4” मॉडल भारतीय सेना, पुलिस और कृषि क्षेत्र में व्यापक रूप से इस्तेमाल हो रहा है। IdeaForge की ड्रोन तकनीक अब तक 50,000 से अधिक उड़ान घंटे पूरे कर चुकी है और कंपनी का 95% उत्पादन भारत में ही होता है।
रक्षा क्षेत्र में Hindustan Aeronautics Limited (HAL) और Bharat Electronics Limited (BEL) की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। HAL का “Tapas-BH-312” ड्रोन अब लंबे मिशनों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि BEL उन्नत सेंसर और संचार प्रणाली बना रही है जो ड्रोन को “स्मार्ट फोर्स” बनाते हैं।
Zen Technologies ने प्रशिक्षण के क्षेत्र में कदम रखा है — इसके VR-आधारित ड्रोन सिम्युलेटर सेना और पुलिस बलों में प्रशिक्षण के लिए उपयोग किए जा रहे हैं। वहीं, Paras Defence & Space Technologies ने ड्रोन पेलोड्स और कैमरा सिस्टम में भारत को आत्मनिर्भर बनाया है।
स्टार्टअप जगत में Garuda Aerospace, Asteria Aerospace, और Thanos Technologies जैसी कंपनियाँ खेती, आपदा प्रबंधन, और अग्निशमन जैसे क्षेत्रों में कम लागत वाले ड्रोन बनाकर नए मानक स्थापित कर रही हैं।
इन सभी कंपनियों की साझी कहानी यह है कि उन्होंने ड्रोन को केवल उड़ने वाली मशीन नहीं, बल्कि रोज़गार, सुरक्षा, और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बना दिया है। वर्ष 2025 भारत के लिए वह समय है जब ड्रोन उद्योग “आसमान की सीमा से आगे” जाने को तैयार है।
| कंपनी | मुख्य क्षेत्र | 2025 का राजस्व (₹ करोड़) | प्रमुख नवाचार |
|---|---|---|---|
| IdeaForge | निगरानी, कृषि ड्रोन | 450 | स्वचालित उड़ान नियंत्रण |
| HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स) | रक्षा ड्रोन | 28,000 | लंबी दूरी के UAV |
| BEL (भारत इलेक्ट्रॉनिक्स) | सेंसर और संचार प्रणाली | 19,500 | क्वांटम-सेक्योर डेटा लिंक |
| Zen Technologies | ड्रोन ट्रेनिंग सिम्युलेटर | 350 | VR आधारित प्रशिक्षण |
| Paras Defence | ड्रोन पेलोड्स | 280 | अंतरिक्ष-योग्य उपकरण |
| Garuda Aerospace | कृषि और आपदा प्रबंधन | 200 | किफायती भारतीय मॉडल |
| Thanos Technologies | अग्निशमन ड्रोन | 80 | थर्मल इमेजिंग |
| Asteria Aerospace | रियल एस्टेट और मैपिंग | 150 | LiDAR आधारित सर्वेक्षण |
तकनीक जो ड्रोन उद्योग का भविष्य बदल रहे हैं
ड्रोन उद्योग में तकनीक अब केवल उड़ान तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेंसर टेक्नोलॉजी, और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों से जुड़कर एक नई दिशा बना रही है। भारत में 2025 तक जो बदलाव दिख रहे हैं, वे आने वाले दशक की नींव रख रहे हैं।
सबसे बड़ा परिवर्तन AI आधारित स्वार्म ड्रोन में है — ये ऐसे ड्रोन होते हैं जो एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं और बिना मानव नियंत्रण के एक साथ 50 से ज्यादा कार्य कर सकते हैं, जैसे फसल स्प्रेइंग या सीमाओं पर निगरानी। इसके अलावा, सौर ऊर्जा से चलने वाले ड्रोन अब 8 घंटे तक उड़ान भर सकते हैं, जिससे लागत घटती है और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होता।
5G कनेक्टिविटी ने ड्रोन को और शक्तिशाली बना दिया है, जिससे रियल-टाइम डेटा ट्रांसफर, मेडिकल सप्लाई और लॉजिस्टिक्स की डिलीवरी पहले से कहीं तेज़ हो गई है। हाइपरस्पेक्ट्रल सेंसर और लिडार तकनीक से अब मिट्टी, पौधों और पर्यावरण की स्थिति का सटीक विश्लेषण संभव हो गया है।

इन सभी नवाचारों ने ड्रोन को एक साधारण उपकरण से बदलकर भारत के तकनीकी भविष्य का केंद्र बना दिया है — जहाँ आसमान अब सिर्फ उड़ने की जगह नहीं, बल्कि नवाचार का मंच बन चुका है।
निवेशकों के लिए सुनहरा अवसर: Drone Stocks 2025
भारत का ड्रोन सेक्टर 2025 में उन चुनिंदा उद्योगों में शामिल है जो आने वाले वर्षों में निवेशकों को सबसे अधिक लाभ दे सकते हैं। जहाँ पहले ड्रोन को केवल रक्षा या निगरानी के लिए देखा जाता था, वहीं अब यह कृषि, लॉजिस्टिक्स, रियल एस्टेट, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। इसका मतलब है — विविध निवेश अवसर और स्थायी रिटर्न।
मार्केट रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय ड्रोन उद्योग का मूल्य 2025 में करीब 0.47 बिलियन अमेरिकी डॉलर है और 2030 तक इसके 1.39 बिलियन डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद है। यानी लगभग 24% की वार्षिक वृद्धि दर (CAGR)। यह आंकड़ा बताता है कि यह क्षेत्र आने वाले समय में स्टॉक मार्केट का नया सितारा बन सकता है।

कई प्रमुख कंपनियाँ जैसे IdeaForge, HAL, Bharat Electronics, Zen Technologies, और Paras Defence तेजी से आगे बढ़ रही हैं। इनके शेयरों ने पिछले एक वर्ष में 35-60% तक की वृद्धि दर्ज की है। सरकार की PLI योजना, ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग इंसेंटिव्स, और ‘मेक इन इंडिया’ मिशन ने इस सेक्टर को और मजबूत किया है।
निवेशकों के लिए यह समय “आसमान में निवेश करने का” सुनहरा अवसर है — क्योंकि यह उद्योग सिर्फ उड़ान नहीं भर रहा, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊँचाइयों तक ले जा रहा है। आने वाले वर्षों में, जो आज निवेश करेगा, वही कल भारत की “ड्रोन क्रांति” के असली विजेताओं में शामिल होगा।
| कंपनी | शेयर मूल्य (₹, अक्टूबर 2025) | YTD रिटर्न (%) | मुख्य कारण |
|---|---|---|---|
| IdeaForge | 720 | 45% | विदेशी निर्यात अनुबंध |
| Zen Tech | 1,396 | 28% | DRDO अनुबंध |
| Paras Defence | 725 | 60% | अंतरिक्ष पेलोड प्रोजेक्ट |
| BEL | 285 | 22% | रक्षा सेंसर मांग |
| HAL | 5,200 | 15% | सैन्य ड्रोन उत्पादन |
| RattanIndia NeoSky | 85 | 35% | कृषि लॉजिस्टिक्स ड्रोन |
विश्लेषक मानते हैं कि ये शेयर अगले 5 वर्षों में औसतन 25–30% वार्षिक रिटर्न दे सकते हैं।
भारतीय ड्रोन उद्योग का भविष्य
भारत का ड्रोन उद्योग अब केवल विकास की कहानी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता (Atmanirbhar Bharat) और सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) का प्रतीक बन चुका है। सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर ऐसे समाधान विकसित कर रहे हैं जो न केवल तकनीकी रूप से उन्नत हैं बल्कि पर्यावरण के लिए भी अनुकूल हैं।
स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग पर ज़ोर देने से अब भारत विदेशी आयात पर कम निर्भर हो गया है। पहले जहाँ 80% ड्रोन पार्ट्स बाहर से आते थे, अब यह आंकड़ा 40% से भी नीचे पहुँच गया है। यह बदलाव ‘मेक इन इंडिया’ मिशन और PLI स्कीम की सफलता को दर्शाता है।
दूसरी ओर, पर्यावरण-अनुकूल ड्रोन जैसे सोलर पावर्ड UAVs और बायोडिग्रेडेबल मटेरियल से बने मॉडल्स यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि विकास की रफ्तार प्रकृति के साथ तालमेल में रहे।
भविष्य में, भारत न केवल घरेलू जरूरतें पूरी करेगा बल्कि वैश्विक ड्रोन निर्यात हब के रूप में उभरेगा। आत्मनिर्भरता, नवाचार और स्थिरता के इस संगम से भारत का ड्रोन उद्योग विश्व मानचित्र पर नई ऊँचाइयाँ छूने के लिए तैयार है।
निष्कर्ष
भारत का ड्रोन उद्योग अब सिर्फ एक तकनीकी प्रयोग नहीं, बल्कि एक आर्थिक क्रांति का प्रतीक बन चुका है। 2025 तक आते-आते यह क्षेत्र कृषि, रक्षा, लॉजिस्टिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, और सर्विलांस जैसे अनेक उद्योगों का अभिन्न हिस्सा बन गया है। जहाँ पहले ड्रोन केवल फिल्मों या सेना तक सीमित थे, अब वे हर सेक्टर में उत्पादकता और पारदर्शिता का नया अध्याय लिख रहे हैं।
सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना, डिजिटल स्काई प्लेटफ़ॉर्म, और नमो ड्रोन दीदी जैसी पहलों ने इस उद्योग को मजबूत नींव दी है। इसके परिणामस्वरूप, देश में 500 से अधिक ड्रोन स्टार्टअप्स उभर चुके हैं, जो न केवल भारतीय ज़रूरतों को पूरा कर रहे हैं बल्कि वैश्विक बाजारों की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
भविष्य में ड्रोन केवल डेटा एकत्र करने या छिड़काव करने तक सीमित नहीं रहेंगे — वे स्वास्थ्य सेवाओं, स्मार्ट शहरों, ई-कॉमर्स डिलीवरी, और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी मुख्य भूमिका निभाएंगे।
संक्षेप में, भारत का आसमान अब सिर्फ उड़ान का प्रतीक नहीं रहा — यह एक नए आर्थिक बाज़ार में बदल चुका है। आने वाले वर्षों में, जो देश ड्रोन तकनीक को अपनाएगा, वही विकास की दौड़ में सबसे आगे होगा। भारत इस दिशा में नई ऊँचाइयों की उड़ान भरने के लिए तैयार है।
भारतीय ड्रोन बाजार (Indian Drone Market) 2025–2030 से सम्बंधित सामान्य प्रश्न (FAQs)
Q.1- भारतीय ड्रोन बाजार का 2025 में अनुमानित मूल्य क्या है?
Ans- भारतीय ड्रोन बाजार 2025 में 0.47 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है, जो सरकार की PLI योजना और कृषि व रक्षा क्षेत्रों में बढ़ते उपयोग से प्रेरित है।
Q.2- 2030 तक भारतीय ड्रोन बाजार की अनुमानित वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) क्या है?
Ans- भारतीय ड्रोन बाजार 2030 तक लगभग 24% की वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ने की उम्मीद है, जिससे इसका मूल्य 1.39 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच जाएगा।
Q.3- 2025 में भारतीय ड्रोन बाजार की वृद्धि किन क्षेत्रों से संचालित हो रही है?
Ans- 2025 में कृषि क्षेत्र 45% बाजार हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे है, उसके बाद रक्षा 30%, लॉजिस्टिक्स 15%, इंफ्रास्ट्रक्चर 7%, और खनन व पर्यावरण निगरानी जैसे अन्य क्षेत्र 3% हिस्सेदारी रखते हैं।
Q.4- 2025 की शीर्ष भारतीय ड्रोन कंपनियाँ कौन-सी हैं?
Ans- 2025 की शीर्ष भारतीय ड्रोन कंपनियों में IdeaForge Technology (सर्विलांस), Hindustan Aeronautics Limited – HAL (डिफेंस UAVs), Bharat Electronics Ltd – BEL (सेंसर टेक्नोलॉजी), Zen Technologies (सिमुलेटर) और Paras Defence (पेलोड्स) शामिल हैं।
Q.5- PLI योजना का भारतीय ड्रोन बाजार पर क्या प्रभाव पड़ा है?
Ans- PLI योजना के तहत 120 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ है, जिससे आयात निर्भरता 80% से घटकर 40% से नीचे आ गई है और हार्डवेयर लागत में लगभग 15% की कमी आई है।
Q.6- 2025 में भारत के नए ड्रोन कानून क्या हैं?
Ans- 2025 के ड्राफ्ट सिविल ड्रोन बिल के अनुसार 250 ग्राम से अधिक वजन वाले सभी ड्रोन को UIN (यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर) की आवश्यकता होगी, DigitalSky के माध्यम से रियल-टाइम ट्रैकिंग जरूरी है, और ग्रीन, येलो व रेड ज़ोन निर्धारित किए गए हैं। उल्लंघन पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना या 3 साल की सजा हो सकती है।
Q.7- 2025 में भारत में कौन-सी नई ड्रोन तकनीकी प्रवृत्तियाँ उभर रही हैं?
Ans- 2025 में भारत में AI-ड्रिवन स्वॉर्म ड्रोन, सोलर पावर्ड UAVs, 5G आधारित BVLOS ऑपरेशन, हाइपरस्पेक्ट्रल सेंसर, और eVTOL हाइब्रिड्स जैसी तकनीकें तेजी से उभर रही हैं।
Q.8- 2025 के लिए भारत के सर्वश्रेष्ठ कृषि ड्रोन कौन-से हैं?
Ans- 2025 के सर्वश्रेष्ठ कृषि ड्रोन हैं: Marut AG 365 (सटीक छिड़काव), DJI Agras T50 (मल्टीस्पेक्ट्रल एनालिसिस), Garuda Aerospace KisanDrone (किफायती समाधान), Fasal Scout (NDVI मैपिंग), और BharatAgri UAV (स्वॉर्म ऑपरेशन)।
Q.9- 2025 में कृषि ड्रोन के लिए कौन-कौन सी सब्सिडी उपलब्ध हैं?
Ans- 2025 में कृषि ड्रोन के लिए Namo Drone Didi योजना के तहत 80% तक (8 लाख रुपये) सब्सिडी, उत्तर प्रदेश योजनाओं में 50% सहायता, SMAM योजना के तहत 40–100% सब्सिडी, और NABARD की कम ब्याज दर वाली ऋण सुविधा उपलब्ध है।
Q.10- 2025 में निवेश के लिए किन ड्रोन शेयरों पर ध्यान देना चाहिए?
Ans- 2025 के प्रमुख ड्रोन स्टॉक्स हैं — IdeaForge (45% YTD वृद्धि), Zen Technologies (28% रिटर्न), Paras Defence (60% उछाल), Bharat Electronics (22% राजस्व ड्रोन से), HAL, और RattanIndia NeoSky।
Q.11- भारतीय ड्रोन सेक्टर में कृषि की बाजार हिस्सेदारी कितनी है?
Ans- भारतीय ड्रोन सेक्टर में कृषि की 45% बाजार हिस्सेदारी है, जो 2030 तक 0.63 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने की संभावना है। इसमें AI एनालिटिक्स और प्रिसिजन स्प्रेइंग जैसी तकनीकें मुख्य भूमिका निभा रही हैं।
Q.12- 2025 में भारत के रक्षा क्षेत्र में ड्रोन का उपयोग कैसे हो रहा है?
Ans- भारत में 2025 में ड्रोन का उपयोग सीमा निगरानी, स्वॉर्म इंटेलिजेंस आधारित टोही अभियानों, और लंबी दूरी की उड़ानों के लिए किया जा रहा है। 2030 तक इस क्षेत्र का मूल्य 0.42 बिलियन डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद है।
Q.13- 2025 में भारतीय ड्रोन बाजार को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है?
Ans- 2025 में भारतीय ड्रोन बाजार की प्रमुख चुनौतियाँ हैं — 5G स्पेक्ट्रम आवंटन की कमी, प्रशिक्षित पायलटों की कमी (केवल 5,000 प्रमाणित बनाम 20,000 आवश्यक), और कड़े नियामक अनुपालन।
Q.14- 2027 तक भारत के ड्रोन निर्यात का लक्ष्य क्या है?
Ans- भारत का लक्ष्य 2027 तक 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ड्रोन निर्यात का है, जिससे वह चीन के बाद एशिया का दूसरा सबसे बड़ा UAV हब बन जाएगा। विशेष फोकस अफ्रीका और ASEAN देशों पर है।
Q.15- ड्रोन अपनाने से भारत में खेती पर क्या प्रभाव पड़ा है?
Ans- ड्रोन तकनीक ने भारत में खेती को आधुनिक बनाया है — कीटनाशक उपयोग में 30% कमी, प्रति एकड़ ₹5,000 की बचत, और 25% अधिक उत्पादकता हासिल हुई है, विशेष रूप से महाराष्ट्र के गन्ना क्षेत्रों में।
Q.16- 2025 में भारतीय ड्रोन में AI की क्या भूमिका है?
Ans- 2025 में भारतीय ड्रोन में AI तकनीक से स्वचालित नेविगेशन, फसल छिड़काव के लिए स्वॉर्म समन्वय, और वैरिएबल-रेट एनालिटिक्स संभव हुआ है। AI आधारित नवाचारों में कुल 30% निवेश केंद्रित है।
Q.17- Marut AG 365 ड्रोन की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
Ans- Marut AG 365 ड्रोन में 20 लीटर स्प्रे कैपेसिटी, AI पाथिंग की सुविधा, और 12 लाख रुपये (सब्सिडी से पहले) की कीमत है। यह मल्टी-यूटिलिटी कृषि कार्यों के लिए भारत का सबसे लोकप्रिय मॉडल है।
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